COVID-19: लखनऊ में हालात हुए भयावह, दाह संस्कार के लिए शव वाहनों की लगी लाइनें
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कोरोना वायरस से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। रोज सैकड़ों नए मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों की मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ये हो गए हैं कि श्मशान स्थल पर भीड़ बढ़ती जा रही है। टोकन देकर अपनी बारी आने का इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में शवों के अंतिम सस्ंकार के लिए भी परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। लखनऊ के भैंसाकुंड विद्युत शव दाह में बुधवार रात अचानक अंतिम संस्कार के लिए शवों की संख्या बढ़ती चली गई। रात में मृतकों के घरवालों को टोकन बांटे गए। रात करीब 11:30 बजे तक शवों का अंतिम संस्कार किया गया।

भैसाकुंड शव दाह केंद्र पर बुधवार रात तक 21 शव पहुंचे थे। यहां दाह संस्कार करने वाले मुन्ना ने बताया कि देर रात तक शवों का आना जारी रहा। वह रात में भी ड्यूटी करते रहे। अपनों के शवों का अंतिम संस्कार कराने के लिए आए कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि गुल्लाला घाट विद्युत शव दाह ग्रह में बुधवार रात तक सिर्फ सात शवों का ही अंतिम संस्कार हो सका। बीते दो दिन पहले गुल्लाला घाट पर दिन में करीब घंटे भर बिजली नहीं आई। बताया ये भी जा रहा है कि भैसाकुंड बैकुंठ धाम में विद्युत शवगृह की भी एक मशीन खराब थी। इस वजह से शवों का अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों को कई-कई घंटों का इंतजार करना पड़ा।
पीजीआई थाना क्षेत्र से आए एक व्यक्ति ने बताया कि उनके ससुर की कोरोना संक्रमण से मौत हुई थी। सुबह 9:30 बजे उनके शव को लेकर भैसा कुंड पहुंचे थे, लेकिन उन्हें टोकन पकड़ा दिया गया। टोकन के हिसाब से उनका समय रात करीब आठ बजे आया। ऐसे में उन्हें 8 घंटे से ज्यादा का इंतजार करना पड़ा। भैसा कुंड के इंचार्ज आजाद ने बताया कि यहां पर 2 विद्युत शवगृह चलते हैं, लेकिन अभी एक मशीन खराब चल रही है। इस वजह से समय लग रहा है। हालांकि, कोविड प्रोटोकॉल के तहत इस बात को सुनिश्चित किया जाता है कि मृत्यु के बाद भी शवों के अंतिम संस्कार में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो।












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