मौसम भविष्यवाणी : जोधपुर के धणी ने दिए संकेत, वर्ष 2019 में कम होगी बारिश, बीमारियों का रहेगा प्रकोप

jodhpur News in Hindi, जोधपुर। देश में अकाल या सुकाल को लेकर तंत्र-मंत्र और ज्योतिष की अनूठी परंपरा राजस्थान के जोधपुर में पिछले कई सालों से निभाई जा रही है। यह परंपरा अक्षय तृतीया ( आखा तीज ) के दिन धणी को लेकर हवन यज्ञ कर दो मासूम बच्चों को हाथ में बांस की दो पट्टियां पकड़वाकर संकेत लिए जाते हैं कि मौसम का शगुन किसी और रहेगा। अक्षय तृतीया 2019 के मौके पर मंगलवार को जोधपुर धणी ने जो संकेत दिए हैं, वो चिंताजनक है। धणी के संकेत इशारा कर रहे हैं कि वर्ष 2019 में कम बारिश होगी। बीमारियों और प्राकृतिक प्रकोप का भी रहेगा। वहीं, राजनीतिक तौर पर बात करें तो उथल-पुथल रहने की संभावनाओं के संकेत भी सामने आए हैं।

क्या है जोधपुर की धणी परम्परा

क्या है जोधपुर की धणी परम्परा

जोधपुर के घणी आयोजन में दो बालकों को मिट्टी के ढेर पर खड़ा किया जाता है। उस मिट्टी के ढेर पर 7 तरह के अनाज होते हैं। साथ मंत्रोंच्चारण भी चलता रहता है। मिट्टी के बीच एक स्तंभ लगाया जाता है। उसी स्थान पर दो शूल लगाने के बाद जो पट्टी इन दोनों शूल के बीच में जाकर रुकती है, वैसे संकेत मिलते हैं। मंत्रोच्चार के चलते यह दोनों पट्टियां देवी शक्ति के चलते ऊपर नीचे होने लगती हैं। एक पर पट्टी पर लाल कुमकुम और दूसरी बांस की पट्टी पर काले रंग के निशान लगाए जाते हैं। जब लाल कुमकुम की बांस की पट्टी ऊपर जाती है तो यह माना जाता है कि सुकाल रहेगा और काले निशान वाली पट्टी ऊपर जाती है तो माना जाता है कि अकाल रहेगा।

बच्चे को आए चक्कर ने दिए बीमारियों के संकेत

बच्चे को आए चक्कर ने दिए बीमारियों के संकेत

घाची समाज के बालू राम ने बताया कि आखातीज 2019 के मौके पर मंगलवार को हुए धणी के आयोजन में पहले तो अकाल की पट्टी बार-बार ऊपर उठने लगी। वैसे में पास बैठी जनता ने जयकारे लगाए तो काले निशान वाली पट्टी बार-बार ऊपर होती रही। कुछ ही समय बाद धणी में खड़े एक बालक को चक्कर आ गया और वह गिर गया। इसका संकेत वहां बैठे लोगों ने बताया कि प्राकृतिक आपदा और बीमारियों के संकेत है।

आधा जमाना होगा, ये मिला संकेत

आधा जमाना होगा, ये मिला संकेत

जोधपुर के राजेन्द्र भाटी के अनुसार मंगलवार को धणी आयोजन में कुछ ही समय बाद दूसरे बच्चों को धणी बनाकर खड़ा किया गया क्योंकि पहले वाले बच्चों के जोड़े में किसी की भी दोनों शूल के बीच कोई पट्टी नहीं पहुंची थी, जिसके चलते दूसरे बच्चों को खड़ा करना पड़ा। उसके बाद सुकाल की पट्टी लगातार सात बार दोनों शूलों के बीच गई, जिसका साफ संकेत यह है कि जमाना आधा होगा, लेकिन महामारी व बीमारियां बढ़ेगी और बारिश ज्यादा होगी तो उससे भी नुकसान होगा।

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