Rajasthan: 50 हजार महात्मा गांधी सेवा प्रेरकों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट की रोक, भर्ती जारी रख सकती है सरकार
Mahatma Gandhi Seva Prerak Recruitment 2023: राजस्थान में 50 हजार महात्मा गांधी सेवा प्रेरकों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए शांति एवं अहिंसा विभाग से जवाब मांगा है।
Mahatma Gandhi Seva Prerak Recruitment 2023: राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 की तारीखों के ऐलान से पहले राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान में महात्मा गांधी सेवा प्रेरकों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट जोधपुर ने रोक लगा दी है। साथ ही शांति अहिंसा विभाग से जवाब भी मांगा है।
राजस्थान पत्रिका की खबर के अनुसार राजस्थान सरकार यह भी भर्ती प्रक्रिया जारी रख सकती है। न्यायाधीश अरुण भंसाली की एकल पीठ ने भी कहा कि राजस्थान सरकार प्रक्रिया भले ही जारी रखें, लेकिन किसी अभ्यर्थी को प्रेरक के पद पर नियुक्ति नहीं दी जाए।

दरअसल, राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने 13 अगस्त को पंचायत स्तर तथा शहरी निकायों में 50 हजार महात्मा गांधी सेवा प्रेरकों की भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। जिसमें 50 हजार युवाओं को एक वर्ष के लिए 4800 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से अस्थायी नियुक्ति दी जानी है।
लछीराम मीणा एवं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पीआर मेहता ने मामले की पैरवी करते हुए कि महात्मा गांधी सेवा प्रेरकों भर्ती विज्ञप्ति में ऐसे अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दिए जाने का उल्लेख है, जिनको राजस्थान सरकार की ओर से आयोजित महात्मा गांधी दर्शन प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने का अनुभव है। यह शिविर महज एक दिन का था, जिसमें कुछ व्याख्यान आयोजित किए गए थे।
महात्मा गांधी सेवा प्रेरकों की भर्ती विज्ञप्ति न तो संवैधानिक सिद्धांतों के अनुकूल है और न ही यह किसी विधान के तहत जारी की गई है। विज्ञप्ति एवं इस संबंध में जारी दिशा निर्देशों में प्रेरकों की कार्य की शर्तों एवं कार्य की दशाओं का उल्लेख तक नहीं है। चयन के लिए योग्यता संबंधी वरीयता तय करने जैसे प्रावधानों का भी अभाव है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि समान प्रकृति के कार्य के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न नियुक्ति नियमों सहित संविदा अथवा अस्थायी नियुक्तियों के संबंध में विभिन्न सेवा नियम बना रखे हैं, जिनके तहत तत्काल एवं अस्थायी आधार पर नियुक्ति के प्रावधान है, लेकिन राज्य सरकार ने आसन्न विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बड़ी संख्या में एक वर्ष के लिए अस्थायी नियुक्तियों के आवेदन आमंत्रित किए हैं, जो न केवल नियुक्ति संबंधी विधिक प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि जनता के धन का दुरुपयोग भी है। जबकि याचिककर्ताओं को कई वर्षों तक प्रेरक के रूप में कार्य करने का अनुभव है, लेकिन उनके अनुभव की अनदेखी की गई है।












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