Phalodi Satta Bazar Inside story: चप्पल, सांड, बारिश पर भी लाखों का सट्टा, CCTV कैमरे से निगरानी
Phalodi Satta Bazar History: महाराष्ट्र-झारखंड में विधानसभा चुनाव 2024 और राजस्थान समेत कई राज्यों में उपचुनाव हो रहे हैं। चुनावों को लेकर फलोदी सट्टा बाजार ने ताजा अनुमान लगाए हैं। इनसे पहले जानिए फलोदी सट्टा बाजार क्या है? कहां पर है? कैसे काम करता है?
राजस्थान में जोधपुर से 144 किलोमीटर दूर फलोदी जिला नया है, मगर सट्टा यहां के लोगों का सदियों पुराना शगल है। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में फलोदी सट्टा बाजार फिर चर्चा में है। फलोदी सट्टा बाजार का इतिहास क्या है? फलोदी में किन-किन बातों पर सट्टा लगता है? फलोदी सट्टे के मामले में कुख्यात या विख्यात क्यों है? इन सारे सवालों के जवाब जानिए।
फलोदी कस्बे के बीचोंबीच गांधी चौक है। यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा लगी हुई है, जिसने वर्षों से अपने आस-पास खूब सटोरिए-दलाल देखें हैं। यहां के बाजार में सरकारें आने-जाने के समीकरण बनते-बिगड़ते सुने हैं। मौसम की भविष्यवाणी सच होते देखी है।

फलोदी में इन बातों पर भी लगता सट्टा
फलोदी के लोग कहते हैं कि यहां हर छोटी बड़ी बातों पर सट्टा लग जाता है। मसलन अगर दो सांड आपस में लड़ रहे हैं तो उनकी हार-जीत पर भी लाखों का दांव लगा देते हैं। चप्पल को हवा में उछालकर उसके उल्टी या सीधी नीचे गिरने पर भी सट्टा लग जाता है। बारिश, आंधी और तूफान पर भी सट्टा लगाने में यहां के लोग माहिर हैं।
बारिश के लिए लगाया 'देसी यंत्र'
फलोदी के सटोरियों ने गांधी पर एक हवेली की छत के बाहर बारिश के सट्टे को लेकर 'देसी यंत्र' लगा रखा है। उसमें यह है कि बारिश कितनी होगी? बरसात का पानी नाली से होता हुआ नीचे आएगा या नहीं? इस बात के सट्टे के लिए उसी देसी यंत्र को देखा जाता है और उसी की नाली में पानी आने पर यह माना जाता है कि इतनी बारिश हुई है कि नाली से पानी आ गया। उस देसी यंत्र से कोई हार-जीत के लिए छेड़छाड़ ना सके। इसके लिए वहां सीसीटीवी कैमरा भी लगाया हुआ है।
मौमस वैज्ञानिक भी हैं फलोदी के लोग!
फलोदी के सटोरिए कहते हैं कि बरसात को लेकर उनके अनुमान सटीक होते हैं। यहां के सटोरियां फलोदी के आस-पास के 15-20 किलोमीटर के दायरे वाले गांवों में भी फोन करके पूछते हैं कि उनके यहां बादल मंडरा रहे हैं कि नहीं? बारिश आने की स्थिति बन रही है कि नहीं? उसके बाद यहां सौदा लगाया जाता है। यहां के सटोरिए तो एक तरह से मौसम विशेषज्ञ हैं। सुबह के साफ मौसम को देखकर शाम को आंधी-तूफान आने तक का अनुमान लगा देते हैं।
फलोदी के सटोरियों की शेयर मार्केट पर भी पकड़
फलोदी सट्टा बाजार के ब्रोकर अंशू चांडा यह भी दावा करते हैं कि फलोदी के लोगों की सट्टा बाजार ही नहीं बल्कि शेयर मार्केट पर भी जबरदस्त पकड़ है। मुम्बई शेयर मार्केट के किसी भी दलाल से यह सवाल किया जा सकता है कि सबसे कमाई कहां से होती है तो जवाब मिलेगा कि फलोदी वालों के जरिए।
500 साल से चल रहा फलोदी सट्टा बाजार
फलोदी के शांतिलाल जैन कहते हैं कि फलोदी सट्टा बाजार 500 साल पुराना है। यहां कई परिवार ऐसे हैं कि जो कई पीढि़यों से इसी काम में लगे हैं। यहां के परिवारों में बच्चे बड़े होने के साथ-साथ सट्टा बाजार के हर दांव पेच अपने आप सीख जाते हैं।
फलोदी सट्टा बाजार कैसे तय करता है सीटें
फलोदी सट्टा बाजार ब्रोकर अंशू चांडा कहते हैं कि यहां से जुड़े स्टोरिए काफी सक्रिय हैं। देशभर में इनका अपना तगड़ा नेटवर्क है, जिसके जरिए ये किसी भी चुनाव की जमीनी हकीकत का सर्वे आसानी से करवा लेते हैं। इसके अलावा टीवी व अखबार की खबरों पर भी इनकी पैनी नजर रहती है।
यही नहीं बल्कि चुनावों में प्रत्याशियों की सूची का भी ये बारीकी से विशलेषण करते हैं। प्रत्याशी की नामांकन रैली से लेकर चुनावी सभाओं में भीड़ से भी वोटों का आकलन लगाने में माहिर हैं।
फलोदी सट्टा बाजार के सटोरिए कहते हैं कि देश के हर राज्य में फलोदी के लोग बड़ी संख्या में रहती हैं। चुनावी राज्यों से फलोदी में अपने घरों पर आने वाले लोगों से सटोरिए वहां के चुनाव पर चर्चा जरूर करते हैं। इसके अलावा फलोदी के सटोरिए भी चुनावी राज्यों का दौरा करते हैं। जातीय समीकरणों को भी बारीकी से समझते हैं। तब जाकर अनुमान लगाते हैं।
फलोदी के शांति लाल जैन कहते हैं कि लाख अंधों में एक काणा राजा होता है। वैसे ही भीड़ में हमारे 1000 आदमी ही करोड़ों लोगों के सर्वे को पीछे दें। चुनावों में जो सर्वे एक करोड़ लोग कर सकते हैं वैसा सर्वे फलोदी के एक हजार लोग कर देते हैं। वो भी सटीक अनुमान के साथ। नेता अगर हमारे पास आ जाए तो हम ही बता दें कि कौन जीतेगा?
(नोट: वन इंडिया हिंदी टीम सट्टा बाजार के दावों का समर्थन नहीं करती है।)
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