Parvati Jangid : राजस्थान की बेटी 120 देशों की महिलाओं में बनीं नंबर 1, 'सेना सिस्टर' की रूप में पहचान क्यों?
जोधपुर। राजस्थान की 24 साल की बेटी ने दुनियाभर में हिंदुस्तान का मान बढ़ाया है। नाम है पार्वती जांगिड़। सामाजिक सरोकारों और मानवीय कार्यों से जुड़ीं पार्वती जांगिड़ को 'ब्यूटी ऑन अर्थ टाइटल' के साथ ही 'द रिपब्लिक ऑफ वुमेन प्रेसिडेंटियल' चुनाव में पहला स्थान प्राप्त किया है।
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द रिपब्लिक ऑफ वुमेन की पहली अध्यक्ष
पार्वती जांगिड़ ने विश्व के 120 से अधिक देशों की महिलाओं को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। सात मार्च को विश्व महिला दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किए गए नतीजों में 882 इलेक्ट्रॉल प्वाइंटस के साथ 'द रिपब्लिक ऑफ वुमेन' की पहली अध्यक्ष चुनी गई हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता पार्वती जांगिड़ का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में पार्वती जांगिड़ ने अपने सामाजिक कार्यों और अब डिजीटल प्लेटफार्म पर छा जाने तक की पूरी कहानी बयां की। साथ ही पार्वती ने भारतीय फौजियों की आवाज उठाने के लिए उनके द्वारा उठाए जा रहे कदमों का भी जिक्र किया।

25 से शुरू हुई थी वोटिंग
बता दें कि द रिपब्लिक ऑफ वुमेन प्रेसिडेंटियल की चुनाव की पोलिंग सचिव अमेरिका की क्लारा ओटेरो ने बताया कि दस फरवरी से 25 फरवरी के बीच 120 में आनलाइन वोटिंग हुई थी। कुल 50 फीसदी से ज्यादा वोटिंग भारत व नाइजरिया से हुई।

इंदौर की मोनिका पुरोहित तीसरे स्थान पर
क्लारा के मुताबिक टॉन टेन की लिस्ट में भारत से चार, नाइजीरिया से तीन, अमेरिका, बांग्लादेश, युगांडा से एक-एक प्रतिभागी ने जगह बनाई। 758 इलक्ट्रॉल प्वाइंट के साथ हॉलीवुड सिंग व एक्टिविस्ट मेरी मिलबेन और इंदौर की सामाजिक कार्यकर्ता मोनिका पुरोहित तीसरे स्थान पर रहीं।

पार्वती जांगिड़ का परिवार
पार्वती जांगिड़ मूलरूप से राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर के गागड़िया गांव की रहने वाली हैं। वर्तमान में जोधपुर के गायत्री नगर में रहती हैं। इनके पिता लूणाराम जांगिड़ का निधन हो चुका है। मां संजू देवी हाउसवाइफ हैं। दो छोटे भाई स्वरूप व दिनेश हैं। जबकि तीन बड़ी बहन हैं। पार्वती ने जोधपुर विश्वविद्यालय से बीए और कोटा खुला विश्वविद्यालय से एमए किया है।

पार्वती जांगिड़ ने गठित की युवा संसद
देश में युवा संसद के गठन का श्रेय पार्वती जांगिड़ को जाता है। जब राष्ट्र निर्माण के लिए इन्होंने युवा संसद का गठन किया तो पीएम मोदी ने भी इन्हें बधाई दी। युवा संसद के तहत साल में दो बार कार्यक्रम भी होता है, जिसमें देशभर के 21 युवाओं को डॉ. एपीजी अब्दुल कलाम राष्ट्र निर्माण पुरस्कार से भी नवाजा जाता है।

पार्वती जांगिड़ को क्यों कहते हैं 'सेना सिस्टर'
पार्वती जांगिड़ खुद सरहदी इलाके की रहने वाली हैं। सरहद पर तैनात फौजी भाइयों की परेशानियों को नजदीक से जानने के लिए ये हर साल रक्षाबंधन पर देशभर के किसी एक सरहदी इलाके में जाती हैं। बॉर्डर पर पीलर टू पीलर जाकर सैनिकों की समस्याओं को नोट करती है। फिर उनसे सेना के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाकर समाधान करवाती हैं। इसलिए बीएसएफ जवानों में पार्वती 'सेना सिस्टर' के रूप में पहचानी जाती है।

सात साल से चल रहा सिलसिला
बता दें कि रक्षाबंधन के मौके पर बॉर्डर पर पहुंच कर दस दिन वहीं पर रहती है। पिछले साल साल से यह सिलसिला चल रहा है। बात चाहे राजस्थान के थार मरूस्थल की हो या गुजरात के रण या फिर जम्मू कश्मीर में बर्फ से ढके बॉर्डर की। हर जगह पार्वती पहुंच चुकी हैं।












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