IAF वीरता पदक विवाद : सार्जेंट सिंह का दावा-'पायलट को मैंने बचाया, अवार्ड मिला फ्लाइट लेफ्टिनेंट राव को'

जोधपुर, 22 अगस्‍त। 'इस बार के स्वतंत्रता दिवस के दो दिन बाद मेरे एक दोस्‍त ने वॉट्सऐप पर भारतीय वायुसेना में गैलेंट्री अवार्ड पाने वालों की सूची भेजी। मैं उस सूची में फ्लाइट लेफ्टिनेंट डी. रवींद्र राव का नाम गैलेंट्री अवार्ड के लिए पढ़ा तो चौंक गया। मेरा चौंकना लाजिमी भी था, क्‍योंकि जिस बहादुरी के लिए डी. रवींद्र राव को चुना गया वो तो मैंने किया था। मुझे अवार्ड न मिलने का दुख नहीं है, लेकिन अपनी बहादुरी के साथ ऐसा धोखा बर्दाश्त नहीं कर पा रहा....'

घनश्याम सिंह सार्जेंट पद से रिटायर

घनश्याम सिंह सार्जेंट पद से रिटायर

यह कहना है इंडियन एयर फोर्स में सार्जेंट पद से रिटायर घनश्याम सिंह का। इन्‍होंने 15 अगस्त 2022 को इंडियन एयरफोर्स के फ्लाइट लेफ्टिनेंट डी. रवींद्र राव को वीरता पदक दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। सिंह का आरोप है कि पायलट की जान बचाने का साहसिक कार्य इन्‍होंने किया था। जबकि उसी काम के लिए अवार्ड राव को दे दिया गया। राव तो उस दिन प्लेन में धमाके के डर से दूर भाग गए थे।

जगुआर फाइटर प्लेन क्रैश हुआ था

जगुआर फाइटर प्लेन क्रैश हुआ था

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में भारतीय वायुसेना के रिटायर सार्जेंट घनश्याम सिंह ने दावा किया कि 6 नवंबर 2021 को उत्‍तर प्रदेश के आगरा स्थित एयर फोर्स स्टेशन के अंदर लैंड करते समय जगुआर फाइटर प्लेन क्रैश हुआ था। पायलट बुरी तरह फंसा हुआ था। उसकी जान बचाने का श्रेय राव को देते हुए पदक दिया गया है। जबकि जान मैंने बचाई थी।

 धमाके के साथ क्रैश हो गया

धमाके के साथ क्रैश हो गया

सिंह कहते हैं कि 6 नवम्बर 2021 दोपहर 12.30 बजे की बात है। मैं आगरा एयरफोर्स स्टेशन पर एयर सेफ्टी ऑफिसर के पद पर तैनात था। वहां 3 जगुआर फाइटर प्लेन लैंड कर रहे थे। दो फाइटर प्लेन सेफ लैंडिंग कर चुके थे और उनके पीछे-पीछे ही तीसरा प्लेन लैंड कर रहा था। तभी वह धमाके के साथ क्रैश हो गया। उस दिन घना कोहरा था। कुछ समझ नहीं आया। क्‍या और कैसे किया?

वहां फ्लाइट लेफ्टिनेंट डी. रवींद्र राव भी पहुंच गए थे

धनश्‍याम सिंह के अनुसार धमाका सुनते ही तुरंत MTDO को सूचना दी और दो CFT (क्रैश फायर टेंडर) टीम के साथ मौके पर पहुंच गया। प्लेन रनवे से नीचे जाकर उल्टा हो चुका था और पीछे के हिस्से में आग लग गई थी। इधर CFT मेंबर्स ने बिना कोई वक्त गंवाए गैस और फोम से आग बुझाने का काम शुरू कर दिया था। वहां फ्लाइट लेफ्टिनेंट डी. रवींद्र राव भी पहुंच गए थे, जो मेरी मदद करने का प्रयास कर रहे थे। मैंने अपनी जान जोखिम में डालकर पायलट को बचाया था।

साहसिक कार्य की खूब सराहना की थी

साहसिक कार्य की खूब सराहना की थी

धनश्‍याम सिंह के अनुसार हादसे के दूसरे दिन वायुसेना सीनियर अफसरों और पायलट के दोस्‍तों ने उनके साहसिक कार्य की खूब सराहना की थी। अफसरों ने उनके द्वारा किए गए कार्य का पूरा विवरण एक कागज पर लिखवाया था। उसकी एक कॉपी सिंह ने अपने पास रख ली थी। अब 15 अगस्‍त पर जब राव को अवार्ड मिला और उनके विवरण में सिंह द्वारा किए गए कार्यों का श्रेय उन्‍हें दिया गया था। इस पर घनश्‍याम सिंह ने वायुसेना को अपनी शिकायत भेजी है, जिसका कोई जवाब नहीं अभी तक नहीं आया है।

घनश्‍याम सिंह मूलरूप से बाड़मेर के रहने वाले

घनश्‍याम सिंह मूलरूप से बाड़मेर के रहने वाले

इधर, मीडिया से बातचीत में तत्कालीन आगरा एयरफोर्स स्टेशन के एटीसी ऑफिसर विंग कमांडर जगत बिहारी दास से इस मामले में कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया। बता दें कि घनश्‍याम सिंह मूलरूप से बाड़मेर के रहने वाले हैं। वर्तमान में जोधपुर में रह रहे हैं। 2002 में भारतीय वायुसेना में भर्ती होने वाले घनश्‍याम सिंह एयरफोर्स में सार्जेंट पद से 30 जून 2022 को रिटायर हुए हैं।

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