करोड़पति कबूतर : इनके पास 20 करोड़ की जमीन व 30 लाख का बैंक बैलेंस, जानिए कैसे बने ये इतने अमीर?
जोधपुर, 30 जून। ये जोधपुर ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे अमीर कबूतर हैं। इन कबूतरों के नाम तकरीबन 366 बीघा जमीन है, जिसकी कीमत 20 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है।
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कबूतरों के नाम मकान व दुकान भी
इतना ही नहीं बल्कि इन कबूतरों के नाम से बैंक बैलेंस, मकान, दुकान भी हैं। इनके बाकायदा पैन नंबर भी हैं। कबूतरों के किराएदार भी हैं। उनके किराए और जमीन की आय से धर्म-कर्म से जुड़े काम होते हैं।

असोप कस्बे में हैं करोड़पति कबूतर
ये करोड़पति कबूतर राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर से 90 किलोमीटर दूर असोप कस्बे में रहते हैं। बताया जाता है कि रियासती काल में आसोप के कुछ अमीर लोग जिनके कोई वारिस नहीं था, उन्होंने अपनी जमीन कबूतरों के नाम लिख दी थी।

ट्रस्ट करता है कबूतरों व उनकी सम्पत्ति की देखरेख
इन कबूतरों की देखरेख के लिए एक ट्रस्ट भी बना हुआ है, जो पूरे आय और व्यय का हिसाब किताब रखता है। ट्रस्ट ही हर साल इस जमीन को खेती के लिए किराए पर देता है. आय से कबूतरों के लिए दाना-पानी खरीदा जाता है।

सौ साल पुरानी कबूतरान कमेटी
बता दें कि असोप कस्बे की यूको बैंक शाखा में कबूतरों के नाम पर करीब 30 लाख से अधिक की राशि जमा है। इसके अलावा कबूतरों के नाम कस्बे में तीन पक्की दुकानें हैं। असोप में इन मूक पंछियों के लिए काम करने वाली 100 साल से भी ज्यादा पुरानी कबूतरान कमेटी है।

कबूतरों की जमीन पर कब्जा
आरोप यह भी है कि अब धीरे-धीरे कुछ लोग इन कबूतरों की जमीन पर कब्जा करने लगे हैं। कभी सड़क के नाम पर तो कभी अपने पूर्वजों की जमीन का हवाला देकर लोगों ने कई बीघा जमीन हड़प ली है।

मददगार भी हैं ये करोड़पति कबूतर
करोड़पति होने के साथ यहां के कबूतर सबसे बड़े दानवीर भी है। बताया जाता है कि करीब 10-11 साल पहले अकाल की वजह से जिले के अशोक कस्बे में कृष्ण गोशाला की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी।

गोशाला में उपलब्ध करवाया चारा
गोशाला में चारा भी खत्म हो गया था। चारा खरीदने के लिए गोशाला समिति के पास बजट भी नहीं था। ऐसे में गांव के इन करोड़पति कबूतरों ने लाखों रुपये का दान देकर गोशाला की मदद की थी।

देश का इकलौता मामला
समिति के सचिव हनुमान चौधरी कहते हैं कि संभवतया देश में यह इकलौता मामला है कि कबूतर करोड़ों की सम्प त्ति के मालिक हैं। कबूतरों की जायदाद का पूरा ख्याल रखा जाता है।

वर्षों से चली आ रही परम्परा
ग्रामीण धर्मचंद जैन के अनुसार कबूतरों का करोड़पति होना सुनने में भले ही अजीब लगे, मगर यह सच है कि असोप के कबूतर करोड़पति है। कस्बे में वर्षों से यह परम्परा चली आ रही है।












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