तीन महीने से मानसिक रोगियों को नहीं मिल पा रही दवा, हाथ-पैर बांधकर रखना पड़ रहा है
घाटशिला। लॉकडाउन के चलते कई अस्पतालों में अन्य बीमारियों की सेवा कुछ दिनों के लिए ठप कर दी गई थी। साथ ही सभी तरह की सेवाएं बंद थी। ऐसे में अन्य बीमारी के मरीजों को काफी समस्या का सामना करना पड़ा। ताजा मामला घाटशिला जिले के धालभूमगढ़ प्रखंड के पावड़ा नरसिंहगढ़ और कोकपाड़ा नरसिंहगढ़ के पंचायत के करीब 10 से 15 मानसिक रोगी हैं। लॉकडाउन में दवा नहीं मिलने के कारण इन मानसिक रोगियों में पागलपन बढ़ता जा रहा है।

एक परिवार की तो ऐसी हालत है कि उनके सदस्यों को दिनभर हाथ-पैर बांध कर रखा जाता है। इन सभी मरीजों को प्रति माह दवा खिलाई जाती है तब इनकी हालत कुछ स्थिर रहती है। लेकिन लॉकडाउन के चलते इनको दवा नहीं मिल पा रही है, जिससे इन सभी मरीजों की हालत खराब होती जा रही है। न्यूज 18 से बात करते हुए धालभूमगढ़ प्रखंड के पावड़ा नरसिंहगढ़ निवासी बेला कालंदी ने बताया कि उनका एक ही बेटा है, जो कि मानसिक रोगी है।
उन्होंने बताया कि पहले हर महीने समाजसेवी संगीता अग्रवाल के जरिये दवा मिल जाती थी। फिर उनकी मौत के बाद घाटशिला के रामकृष्ण मिशन मठ से निःशुल्क दवा मिलती है। जमशेदपुर से डॉक्टर रामकृष्ण मिशन मठ में आते थे और वहीं पर सभी मानसिक रोगियों को दवा दी जाती थी। लेकिन लॉकडाउन के चलते न ही डॉक्टर मठ में आए और न ही कोई दवा की व्यवस्था की गई।
इसके बाद मानसिक रोगी के परिवारों से कहा गया कि उन्हें जमशेदपुर सदर अस्पताल में जा कर दवा लानी होगी। ऐसे में लॉकडाउन के दौरान पीड़ित परिवार जमशेदपुर नहीं जा सके और मानसिक रोगी मरीज की हालत खराब होते चली गयी। अब तो हालत यह है कि किशन कांलदी को तो परिवार वाले ने बांध कर रखा गया है। वहीं दूसरे मरीज का नाम सरोज नामाता है, जो कुछ ठीक होने पर बच्चों के साथ खेलते हैं, लेकिन कब उत्पात मचा दे कहना मुश्किल है।












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