Pahalgam Terror Attack: हाई-प्रोफाइल यात्रा और कायराना हमला, घाटी में फिर वहीं आतंक की पुरानी रणनीति
Pahalgam Terror Attack: पहलगाम में हुए कायराना आतंकवादी हमले ने एक बार फिर से भारत के सामने आंतरिक सुरक्षा और घाटी में शांति व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी है। बता दें कि 26/11 मुंबई हमले के बाद देश में नागरिकों को निशाना बनाकर किया गया यह सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है।
यह अटैक ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत दौरे पर हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब की दो दिवसीय यात्रा पर गए हुए थे। इसने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है।

Pahalgam Terror Attack: नागरिकों को निशाना, पूरानी रणनीति
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद घाटी में पर्यटकों की भारी भीड़ देखी जा रही थी जो सामान्य स्थिति की ओर लौटने के संकेत दे रहे थे। टूरिस्टों के आने से स्थानीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका को देखते हुए, यह विकास क्षेत्र में स्थायित्व और समृद्धि का प्रतीक बन गया था।
लेकिन पहलगाम हमले ने उस भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले ने 2000 के दशक की शुरुआत के भयावह आतंकी हमलों की यादें ताजा कर दीं जब आम नागरिकों को निशाना बनाना पाक दहशतगर्दों की एक सुनियोजित रणनीति हुआ करती थी। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह हमला उसी रणनीति का दोहराव है, जिसके तहत विदेशी नेताओं की उपस्थिति के दौरान हिंसात्मक घटनाएं रचकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई है।
Pahalgam Terror Attack पर अमेरिका की प्रतिक्रिया
एक बात यह है कि विदेशी नेताओं और अधिकारियों के देश में रहने के दौरान नागरिकों पर आतंकवादी हमलों को अधिकतम अंतर्राष्ट्रीय प्रचार पाने की चाल के रूप में देखा गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जो इन दिनों भारत दौरे पर हैं, ने पहलगाम हमले को लेकर गहरी संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, "उषा और मैं भारत के पहलगाम में हुए विनाशकारी आतंकवादी हमले के पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं। हम इस देश की सुंदरता से अभिभूत हैं। इस भयानक हमले में हमारे विचार और प्रार्थनाएं पीड़ितों के साथ हैं।"
वहीं, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे "कश्मीर से आई बेहद परेशान करने वाली खबर" बताते हुए कहा कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और भारत के लोगों को अपना पूरा समर्थन और सहानुभूति जताई।
Pahalgam Terror Attack से ताजा हुई अतित की यादें
यह पहली बार नहीं है जब विदेशी नेताओं की यात्रा के दौरान इस प्रकार के आतंकी हमले हुए हों। 20 मार्च, 2000 को अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर के चिट्टीसिंहपोरा गांव में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 36 सिख ग्रामीणों का नरसंहार किया था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने क्लिंटन के समक्ष पाकिस्तान की संलिप्तता का मुद्दा उठाया था। उस समय क्लिंटन जयपुर और आगरा के दौरे पर थे, जबकि विदेश मंत्री मैडलिन अलब्राइट और उप विदेश मंत्री स्ट्रोब टैलबोट भारतीय अधिकारियों से बातचीत करने के लिए दिल्ली में ही थे ।
इसके बाद मई 2002 में क्रिस्टीना बी रोका की भारत यात्रा के समय कालूचक में हुए आतंकी हमले ने फिर से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे, जिसमें कई मासूम बच्चों और महिलाओं की जान गई थी।
Pahalgam Terror Attack: पाकिस्तानी सेना प्रमुख के बयान के बाद हुआ हमला
इस ताजा हमले की पृष्ठभूमि में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की हालिया टिप्पणी भी एक अहम कारक मानी जा रही है। ये हमला पाकिस्तान सेना प्रमुख के उस बयान के एक सप्ताह बाद हुआ है जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर इस्लामाबाद की "गले की नस" है उसे भूले न जाने वाली पीड़ा करार दिया था।
पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में ओवरसीज पाकिस्तानी कन्वेंशन को संबोधित करते हुए जनरल मुनीर ने कहा था, "हमारा रुख बिल्कुल साफ है, यह हमारी दुखती रग थी, यह हमारी दुखती रग रहेगी, हम इसे नहीं भूलेंगे। हम अपने कश्मीरी भाइयों को उनके वीरतापूर्ण संघर्ष में नहीं छोड़ेंगे।"
इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "कोई विदेशी चीज गले में कैसे अटक सकती है? यह भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है, और पाकिस्तान को अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करना चाहिए।"
Pahalgam Terror Attack: सऊदी अरब के साथ बातचीत में सुरक्षा प्रमुख मुद्दा
प्रधानमंत्री मोदी की सऊदी अरब यात्रा के दौरान यह आशा की जा रही है कि पहलगाम हमला भी उनकी बातचीत का प्रमुख विषय बनेगा। मोदी ने यात्रा से पूर्व एक साक्षात्कार में कहा था, "हम सऊदी अरब को क्षेत्र में सकारात्मकता और स्थिरता की ताकत मानते है हमने सुरक्षा सहयोग में लगातार प्रगति देखी है, जिसमें आतंकवाद और चरमपंथ से मुकाबला, आतंक के वित्तपोषण को रोकना, और मादक पदार्थों की तस्करी से निपटना शामिल हैं।"












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