जम्मू-कश्मीर में मिल रही हैं औसत से ज्यादा सरकारी नौकरियां, आर्टिकल 370 हटने के बाद और क्या बदला? जानिए
5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 और आर्टिकल-35ए के हटने के चार वर्ष पूरे हुए। इन चार वर्षों में इस केंद्र शासित प्रदेश में क्या बदलाव हुआ है, इसको लेकर दुनिया भर के लोगों में एक दिलचस्पी बनी हुई है।
जम्मू और कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने ईटी को एक विस्तृत इंटरव्यू दिया है, उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कभी आतंकियों की दहशत के साए में रहने वाला यह प्रदेश आज कैसा है? इन चार वर्षों में वहां क्या परिवर्तन हुए हैं?

आर्टिकल 370 हटने के बाद क्या बदला?
एलजी मनोज सिन्हा के मुताबिक अब सड़कों पर होने वाली हिंसा पूरी तरह से थम चुकी है। पहले साल के 150 दिन अलगाववादियों की ओर से बंद रखने से कारोबार, ट्रैफिक से लेकर आम जन-जीवन तक ठहर जाता है। लेकिन, अब यह इतिहास बन चुका है। पहले सूरज ढलने से पहले लोग घर लौट जाते थे, अब देर रात तक झेलम के किनारे गिटार बजाते और आईसक्रीम खाते देखे जा सकते हैं। अब न कोई फरमान जारी होता है और न ही लोगों के जीवन में कोई दूसरा दखल दे सकता है। 34 साल बाद शांतिपूर्ण तरीके से मुहर्रम का जुलूस निकाला गया है।

टारगेट किलिंग की सच्चाई ?
हाल के समय में कश्मीर में निशाना बनाकर होने वाली हत्याओं के बार में उनका कहना है कि तथ्य ये है कि ऐसी घटनाएं बढ़ी नहीं हैं। दरअसल, लोगों की उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। पहले ऐसी घटनाएं होती थीं तो लोग मानकर चलते थे कि ऐसा होगा ही। लेकिन, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते लोग, इसकी उम्मीद नहीं करते। हम वही लक्ष्य हासिल करना चाह रहे हैं।

बदल गया है दृष्टिकोण
उनके मुताबिक केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद से काम करने का दृष्टिकोण ही बदल चुका है। पहले तात्कालिक शांति की कोशिश की जाती थी। अब स्थायी शांति में विश्वास किया जा रहा है। गृहमंत्री के अधीन यह रणनीति तैयार की गई है कि सिर्फ आतंकवादी को नहीं मार गिराना है, बल्कि पूरे आतंकी इकोसिस्टम को तबाह कर देना है।

पर्यटन के क्षेत्र में बदलाव
इस साल पिछले 11 वर्षों में अबतक सबसे ज्यादा तीर्थयात्री अमरनाथ यात्रा पर गए हैं। यात्रा को लेकर उनमें संतुष्टि का स्तर 93 से 94% है। अब सरकार यात्रा के साथ-साथ इकोलॉजी पर भी ध्यान दे रही है। यात्रा पर जाने वालों को सिर्फ तीर्थयात्री के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि उन्हें पर्यटक भी माना जा रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। अन्य पर्यटन भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। इसके चलते अर्थव्यवस्था के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

जम्मू-कश्मीर में निवेश
2021 तक राज्य में उद्योगों की कमी थी। तब तक सिर्फ 13,000 करोड़ रुपए के निवेश आए थे। 2021 में नई औद्योगिक योजना शुरू की गई। जीएसटी पर 300% इंसेंटिव की व्यवस्था की गई। उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली। अभी तक 27,000 करोड़ रुपए का काम चल रहा है। अगले डेढ़ वर्षों में कम से कम 75,000 करोड़ रुपए के निवेश आने वाले हैं।

जम्मू-कश्मीर में नौकरियां
राज्य में सिर्फ एक साल में 29,000 सरकारी नौकरियां दी गई हैं। अगर आबादी के अनुपात में सरकारी नौकरियों की तुलना की जाए तो अन्य राज्यों के मुकाबले जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा सरकारी नौकरियां मिल रही हैं। सिर्फ 35 लाख की आबादी वाले केंद्र शासित प्रदेश में 5 लाख लोग सरकारी जॉब कर रहे हैं। उनके मुताबक अब बदलाव सिर्फ ये हुआ है कि केवल उन्हीं को सरकारी नौकरियां मिलती हैं, जिनमें इसे पाने की क्षमता है। अगले डेढ़ साल में जिस निवेश की बात की गई है, उससे 5 लाख लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिलने की संभावना है।

जम्मू-कश्मीर आज कृषि के मामले में भी आत्म-निर्भर है। अगले साल तक दूध उत्पादन में भी यह केंद्र शासित प्रदेश आत्म-निर्भर बन जाएगा।












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