J&K: आरोग्य सेतु का डेटा पुलिस को क्यों दिया, RTI जवाब से उठे सवाल

श्रीनगर: आरटीआई से मिले एक जवाब के बाद आरोग्य सेतु डेडा पुलिस के साथ शेयर करने को लेकर जम्मू और कश्मीर प्रशासन सवालों के घेरे में है। इसके मुताबिक जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आरोग्य सेतु का डेटा कुलगाम पुलिस के साथ शेयर किया है। हालांकि, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि ऐसा करने का मकसद क्या है। लेकिन, लोगों के स्वास्थ्य संबंधी निजी डेटा को पुलिस विभाग को देने को लेकर राज्य प्रशासन पर निजता के उल्लंघन का आरोप लग रहे हैं। गौरतलब है कि आरोग्य सेतु एक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप है, जिसे कोरोना वायरस के संक्रमितों का पता लगाने और उससे सबंधित तमाम जानकारियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और अभी इसका इस्तेमाल वैक्सीन से जुड़ी जानकारियों के लिए भी हो रहा है। आज की तारीख तक इसके 17.29 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं।

jammu kashmir:After an reply from RTI, Arogya Sethu is in the circle of Jammu and Kashmir administration for sharing with Deda police

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    आरोग्य सेतु का डेटा शेयर करने पर सवाल
    इससे पहले एमआईटी के शोधकर्ताओं ने इस ऐप को डेटा कलेक्शन में पारदर्शिता नहीं होने और इसके शेयरिंग प्लान को लेकर इसे पांच में से सिर्फ एक अंक दिए थे। आरटीआई दायर करने वाले ऐक्टिविस्ट सौरव दास ने दावा किया है कि, 'दिसंबर में मैंने एक आरटीआई दायर किया था और इसके डेवलपर एनआईसी (नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर) से जानकारी मांगी थी कि यूजर के डेटा को सुरक्षित रखने के लिए वो क्या कदम उठा रहे हैं। एनआईसी ने तत्काल जानकारी उपलब्ध नहीं कराई और इसके बदले मांगी गई जानकारी को प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के स्वास्थ्य सचिवों को भेजकर जवाब देने के लिए कह दिया।' दास ने आरोप लगाया है कि करोड़ों भारतीयों के संवेदनशील निजी डेटा की पहुंच रखने वालों के बारे में जानकारी नहीं रखना अपने आप में एनआईसी का जिम्मेदारी से भागना है। उनके मुताबिक, 'डेटा का इस्तेमाल सिर्फ स्वास्थ्य विभाग को करना था। लेकिन, स्पष्ट है कि ऐसा नहीं हो रहा है। सबसे चिंताजनक बात ये है कि हम इस संभावना से इनकार नहीं कर सकते कि कुछऔर राज्य भी संभवत: ये जानकारियां दूसरी लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज या दूसरी सरकारी संस्थाओं के साथ साझा की होंगी। '

    आईटी मिनिस्ट्री ने जारी किया था प्रोटोकॉल
    11 मई, 2020 को आईटी मिनिस्ट्री ने एक प्रोटोकॉल(जो बाध्यकारी नहीं था) जारी किया था कि इस ऐप के जरिए जुटाए गए डेटा को कैसे स्टोर और शेयर किया जाएगा। प्रोटोकॉल के मुताबिक डेवलपर को उन सभी सरकारी एजेंसियों की लिस्ट रखनी थी, जिनके साथ डेटा शेयर किया जाना था और इसमें यह बात भी थी कि इसे सिर्फ महामारी को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। (तस्वीर-सांकेतिक)

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