Jammu Kashmir Chunav: पहली बार डालेंगे वोट, करीब 5,700 हिंदू परिवारों को किसने दिलाया उनका हक?

Jammu Kashmir Chunav 2024: जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी जैसी पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में आर्टिकल 370 की वापसी का वादा किया है। लेकिन, इस केंद्र शासित प्रदेश में ऐसे करीब 5,700 हिंदू परिवार हैं, जिन्हें आर्टिकल 370 की वजह से कभी वोट नहीं डालने दिया जाता था। इनमें से भी अधिकांश दलित या अनुसूचित जाति (SC) समाज के लोग हैं, जो पहली बार मतदान करने वाले हैं।

जम्मू कश्मीर के जिन लगभग 5,700 हिंदू परिवारों की बात हो रही है, वे मूलरूप से पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी हैं, जिनके पूर्वजों ने 1947 में देश के विभाजन के दौरान अपनी जान और इज्जत बचाने के लिए अपना घर-बार छोड़कर भारत में शरण लिया था। आर्टिकल 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा खत्म होने की वजह से इस बार उन्हें पहली बार वोट डालने का मौका मिलने जा रहा है।

jammu kashmir chunav

1 अक्टूबर को पहली बार शरणार्थी हिंदू डाल पाएंगे वोट
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर (PoK) या पाकिस्तान के सियालकोट से भारत आए हिंदू शरणार्थियों में अधिकतर आज भी जम्मू के पास 39 मलिन बस्तियों (शरणार्थी कैंप) में रहते हैं।

इस बार ये अंतिम चरण यानी 1 अक्टूबर को मतदान में हिस्सा लेंगे, जो पहले नहीं कर पाते थे। ऐसा इसलिए संभव हो पाया है, क्योंकि आर्टिकल 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जा खत्म होने की वजह से इन शरणार्थियों को स्थायी निवासी का दर्जा मिला है।

पाकिस्तानी शरणार्थियों के लिए असेंबली में दो सीटें भी रिजर्व
इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने प्रवासियों के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 2 सीटें भी आरक्षित करवाई हैं, जिसपर केंद्र सरकार इनके दो सदस्यों को मनोनीत करेगी। वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमेटी के अध्यक्ष लाभू राम कहते हैं 'मतदान का दिन हमारे लिए उत्सव की तरह होगा।'

ये लोग उस दिन पूड़ी-हलवा और लड्डू खाकर इस अवसर पर अपनी खुशियों का इजहार करने की तैयारी कर रहे हैं।

इन हिंदुओं के साथ अबतक क्यों होती रही नाइंसाफी?
जम्मू के एक ऐसे ही कैंप में रहने वाले देस राज कहते हैं, 'निरस्त (आर्टिकल 370) होने से हमारे राजनीतिक स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव आया है और आखिरकार हमें निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सेदार बनने का अवसर मिल गया है। अब तक हम दूसरे दर्जे के नागरिक के तौर पर रह रहे थे।

ये बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार हमसे उन लोगों ने छीन लिया था, जो आज लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करने का दावा करते हैं।'

1947 में कई हिंदू शरणार्थियों को पीओके से भगा दिया गया और कुछ जम्मू की सीमा से सटे सियालकोट से भाग कर आए थे। 1960 के दशक में इन्हें जम्मू में जमीन तो दी गई, लेकिन आर्टिकल 370 की वजह से इन्हें उसका स्वामित्व मिलना असंभव था।

इसका असर ये होता था कि ना तो इन्हें सरकारी आवास योजनाओं का फायदा मिलता था और ना ही इन्हें उस जमीन पर बैंकों से लोन ही उपलब्ध हो पाता था।

इस साल इन हिंदुओं को मिला जमीन का मालिकाना हक
इस साल 2 अगस्त को जम्मू कश्मीर प्रशासन ने इन शरणार्थियों को उस जमीन का मालिकाना हक दे दिया, जहां दशकों पहले इनके पूर्वजों को सरकार ने जमीन उपलब्ध करवाई थी।

सियालकोट से आने वाले ज्यादातर शरणार्थी या तो कठुआ और आरएस पुरा इलाकों में आए थे, तो अधिकतर ने जम्मू का रुख किया था। कुछ शरणार्थी दिल्ली, पंजाब और देश के दूसरे राज्यों में भी चले गए थे।

इतिहासकारों के मुताबिक जम्मू आना इनके लिए इसलिए सुविधाजनक था, क्योंकि तब यह इलाका सियालकोट से रोड और रेल दोनों से जुड़ा हुआ था और इनकी संस्कृति भी आपस में काफी मिलती-जुलती थी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+