J-K Assembly Elections 2024: घाटी में BJP नेताओं में नाराजगी क्यों? किस ओर जा रही पार्टी
Jammu Kashmir Elections 2024: भारतीय जनता पार्टी जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव 2024 (Jammu Kashmir Assembly Elections) अकेले दम पर लड़ रही है। पार्टी की मंशा यहां पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की है। लेकिन हरियाणा या फिर छत्तीसगढ़ भारत के अन्य सभी राज्यों से जम्मू कश्मीर की राजनीति ही कुछ अलग रही है। यहां पिछले कई दशकों से चुनावी मुद्दा सिर्फ विकास ही नहीं रहा, भले ही बीजेपी इस बार घाटी समेत पूरे जम्मू कश्मीर में बदलाव की बयार बहने और शांति की बातों को दोहरा रही हो। घाटी में राजनीति की बात करें तो यहां बीजेपी (BJP) ने आधी से अधिक सीटों के लिए कैंडिडेट ही नहीं घोषित किए।
जम्मू कश्मीर की कुल 24 विधानसभा सीटों में से 18 सीटें सिर्फ कश्मीर घाटी की ही हैं। लेकिन बीजेपी ने इन 18 सीटों में से सिर्फ 8 पर ही कैंडिडेट्स उतारे हैं। ऐसे में बीजेपी कार्यकर्ताओं में हताशा का भी माहौल है। घाटी उन 10 सीटों पर बीजेपी वर्कर इस सोच हैं कि वे क्या करें?

दरअसल, जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अब तक 44 कैंडिडेट्स के नाम घोषित किए हैं। पार्टी ने इनमें से दूसरे और तीसरे चरण के लिए कुल 29 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। इन चरणों में घाटी के लिए बीजेपी का सिर्फ एक कैंडिडेट है।
हालांकि ये पहला मौका नहीं है, जब बीजेपी ने जम्मू कश्मीर चुनाव में किसी सीट के लिए कैंडिडेट नहीं घोषित नहीं किए हैं। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने कश्मीर की तीनों सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे।
बीजेपी के पुराने दिग्गज हो रहे अलग
घाटी में कई नेताओं ने बीजेपी का साथ छोड़ा। बीजेपी में आए शौकत गयूर को जब पार्टी ने टिकट दिया तो विरोध बढ़ गया और पुलवामा से बीजेपी के डिस्ट्रिक्ट डेवलमेंट काउंसिल के इकलौते सदस्य मिन्हा लतीफ ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया। इन नेताओं ने बीजेपी पर गुटबाजी के आरोप लगाए और कहा कि मनचाहे लोगों को टिकट दलवाया जा रहा। ऐसा बीजेपी को सामूहिक इस्तीफे की धमकी देकर किया जा रहा है। पार्टी के अलग होने वाले कार्यकर्ताओं और पूर्व पदाधिकारियों ने कहा कि घाटी में बीजेपी में दलबदलू नेता पार्टी की छवि खराब करने में लगे हैं और पार्टी हाईकमान का ध्यान भी इस ओर नहीं जा रहा है।
पीडीपी के साथ गठबंधन में हालत थे बेहतर
जम्मू कश्मीर में 10 साल पहले विधानसभा चुनाव हुए थे। तब बीजेपी ने पीडीपी के साथ मिलकर इलेक्शन लड़ा था। चुनाव जीतने और सरकार बनने के बाद ये गठबंधन सरकार का कार्यकाल पूरा होने से पहले टूट गया। इस बार जब बीजेपी अकेले दम पर चुनाव लड़ रही है तो पार्टी नेताओं की नाराजगी कुछ अलग ही लेवल पर है। हालात ये हैं कि कश्मीर घाटी के कुछ इलाकों में बीजेपी के पास गिने-चुने कार्यकर्ता ही हैं। वहीं पार्टी के नाराज नेताओं की शिकायत है कि मुश्किल वक्त में उन्होंने ने बीजेपी का साथ दिया। लेकिन जब उन्हें मौका देने का समय था, तो टिकट दलबदलुओं को थमा दिया।












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