जयपुर नगर निगम ग्रेटर की मेयर सौम्या गुर्जर से छिन सकती है कुर्सी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बढ़ाई मुश्किल
जयपुर, 23 सितम्बर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के नगर निगम ग्रेटर की मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इनसे मेयर की कुर्सी छिन सकती है। सौम्या गुर्जर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मेयर सौम्या गुर्जर के मामले में राजस्थान सरकार की ओर से पेश की गई न्यायिक जांच रिपोर्ट को सही मानते हुए राजस्थान सरकार को कार्रवाई के लिए स्वतंत्र किया है। साथ ही कहा है कि 25 सितम्बर के बाद से कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि 23 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अजय ओक व जस्टिक संजय किशन कौल ने मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। मेयर सौम्या गुर्जर और अन्य तीन पार्षदों के खिलाफ जून 2021 में शुरू की गई न्यायिक जांच की रिपोर्ट पिछले महीने 10 अगस्त को सरकार को पेश की गई थी, जिसमें सौम्या समेत अन्य 3 पार्षदों को दोषी पाया गया था। इस रिपोर्ट को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था और मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की थी।
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार मेयर सौम्या गुर्जर की तरफ से पैरवी सीनियर एडवोकेट रूचि कोहली ने की। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष सिंघवी ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के बाद निर्देश दिए हैं कि सरकार न्यायिक जांच की रिपोर्ट के बाद नियमानुसार कार्रवाई करें।
बता दें कि 4 जून 2021 को जयपुर नगर निगम ग्रेटर मुख्यालय में मेयर सौम्या गुर्जर के चैम्बर में एक बैठक चल रही थी, जिसमें तत्कालीन कमिश्नर यज्ञमित्र सिंह देव और अन्य पार्षद वार्ड 72 से भाजपा के पार्षद पारस जैन, वार्ड 39 से अजय सिंह और वार्ड 103 से निर्दलीय शंकर शर्मा भी मौजूद थे। किसी फाइल पर साइन करवाने की बात पर कमिश्नर से पार्षदों और मेयर की हॉट-टॉक हो गई। कमिश्नर बैठक को बीच में छोड़कर जाने लगे। इस दौरान पार्षदों ने उन्हें गेट पर रोक दिया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। कमिश्नर ने पार्षदों पर मारपीट और धक्का-मुक्की करने का तीनों पार्षदों पर आरोप लगाते हुए सरकार को लिखित में शिकायत की और ज्योति नगर थाने में मामला दर्ज करवाया।
जयपुर नगर निगम क मेयर सौम्या व अन्य तीन पार्षदों के खिलाफ जून 2021 में शुरू की गई न्यायिक जांच की रिपोर्ट पिछले महीने 10 अगस्त को सरकार को पेश की गई थी, जिसमें सौम्या समेत अन्य 3 पार्षदों को दोषी पाया गया था। इस रिपोर्ट को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था और मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की थी।












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