राजस्थान: प्रदेश में जाट समुदाय को भाजपा के खिलाफ उकसाने की कोशिश कर रहे पूनिया समर्थक ! जानिए पूरी वजह
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया समर्थक जाट समुदाय को पार्टी के विरोध में उकसाने का काम कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके पुत्र जाट राजघराने से हैं। राजे दो बार सीएम और उनके पुत्र दूसरी बार सांसद हैं।

राजस्थान में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया के समर्थक जाट समुदाय को पार्टी के विरोध में उकसाने का काम कर रहे हैं। पार्टी ने प्रदेश में सतीश पूनिया को रिप्लेस करते हुए चित्तौड़गढ़ से सांसद सीपी जोशी को पार्टी का नया मुखिया नियुक्त किया है। इसके बाद से ही जाट समुदाय द्वारा लगातार सतीश पूनिया को हटाए जाने का विरोध किया जा रहा है। आपको बता दें सतीश पूनिया का कार्यकाल पूरा होने के बाद उनका कार्यकाल बढ़ाए जाने की चर्चा थी। लेकिन इससे पहले पार्टी ने प्रदेश में नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। इसके बाद से ही सतीश पूनिया समर्थक उन को हटाए जाने का विरोध कर रहे हैं।
पुतले जलाने से पार्टी हाईकमान में नाराजगी
भाजपा में सतीश पूनिया को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद उनके समर्थकों ने जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के पुतले जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि सतीश पूनिया ने इस विरोध प्रदर्शन से किनारा कर लिया। पूनिया का दावा है कि यह मेरे समर्थक नहीं है। लेकिन यह खबर पार्टी हाईकमान तक पहुंच गई है। चर्चा है कि पार्टी हाईकमान इससे बेहद नाराज है।

जाट समुदाय की बहू वसुंधरा राजे रह चुकी है प्रदेश की सीएम
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जाट राजघराने की बहू है। वसुंधरा राजे दो बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी है। उनके पुत्र सांसद दुष्यंत सिंह झालावाड़ से दूसरी बार सांसद हैं। दुष्यंत सिंह खुद जाट राज परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सतीश पूनिया भी लंबे समय से खुद को किसान पुत्र के रूप में बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करते रहे हैं। सतीश पूनिया प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए अपने पद को जातीय समीकरणों से जोड़कर देखते रहे हैं। यही वजह है कि सतीश पूनिया पार्टी पर दबाव बनाने के लिए खुद को किसान पुत्र या जाट पुत्र बताकर मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल है। प्रदेश में जाट समुदाय से आने वाले बड़े परिवार मिर्धा, ओला और मदेरणा कांग्रेस से जुड़े हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि इस समुदाय का अब ज्यादा झुकाव हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी की तरफ माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया साफ तौर पर दावा करते हैं कि विरोध करने वाले लोग उनके समर्थक नहीं हैं। उन्होंने बतौर कार्यकर्ता पार्टी के लिए काम किया है और आगे भी करते रहेंगे। पूनिया ने ट्वीट के जरिए यह जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा भी की है।












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