Rajasthan News: राजस्थान में भाजपा क्यों नहीं ले पा रही सीएम फेस को लेकर फैसला, जानिए सियासी वजह

Rajasthan News: राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। प्रदेश में भाजपा कुशल नेतृत्व नहीं होने की वजह से पार्टी कमजोर विपक्ष साबित होती जा रही है। भाजपा राजस्थान में पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात करती है। लेकिन क्षेत्रीय क्षत्रपों की अनदेखी और पार्टी के भीतर गुटबाजी के चलते भाजपा कमजोर पड़ती जा रही है। बीजेपी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर भारी घमासान है। उधर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा राजस्थान को लेकर कोई फैसला नहीं किए जाने से पार्टी के कार्यकर्ता निराश हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विकल्प के तौर पर जिन नेताओं को तैयार किया था। वे ही अब मुख्यमंत्री पद के दावेदार बन गए हैं। इसकी वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बानी हुई है। इसके आलावा केंद्र से बड़े नेताओं के लगातार दौरों के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं को सभाओं को सफल करने में लगा दिया जाता है। इससे पार्टी कार्यकर्त्ता फील्ड में काम नहीं कर पा रहे हैं। जानकार बताते हैं कि पार्टी के चुनाव लड़ने वाले कार्यकर्ताओं के साथ भी आ रही है। जानकार आगे बताते हैं कि साल 2003, 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में मजबूत होकर उभरी थी। प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने जिन नेताओं को आगे किया। उनके विरोधाभास के चलते पार्टी नेतृत्व कोई फैसला नहीं ले पा रही है। प्रदेश में कांग्रेस ने गुरुवार को चुनाव समिति गठित कर दी है। अब बीजेपी कार्यकर्ताओं को चुनाव समिति के गठन का इंतजार हैं।

भाजपा में मुख्यमंत्री पद को लेकर गुटबाजी

राजस्थान में भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर भारी गुटबाजी है। प्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने विधानसभा चुनाव को लेकर अब तक जिन चेहरों को आगे किया है। वे ही अब मुख्यमंत्री पद के दावेदार बन गए हैं। पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राजसमंद सांसद दिया कुमारी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। आपको बता दें पिछले दिनों पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने सवाई माधोपुर में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल गुटबाजी पर प्रदेश के नेताओं के प्रति नाराजगी जाहिर की थी। राजनीति के जानकार कहते हैं कि कर्नाटक चुनाव के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी विधानसभा चुनाव में क्षेत्रीय क्षत्रपों को आगे कर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

vasundhara raje

प्रदेश में वसुंधरा राजे के नाम की चर्चा

राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। चर्चा है कि पार्टी वसुंधरा राजे को चुनाव अभियान समिति की चैयरमेन बना सकती है। पार्टी प्रदेश में मोदी के चेहरे पर चुनाव तो लड़ेगी। लेकिन मोदी के चेहरे की साख बचाए रखने की जिम्मेदारी राजे को सौंपी जा सकती है। पार्टी सूत्रों की मानें तो वसुंधरा राजे के नाम पर पार्टी में कभी भी सहमति बन सकती है। लेकिन प्रदेश के दिल्ली से जुड़े नेताओं द्वारा राजे के नाम पर असहमति दी जा रही है। प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। ऐसे में राजस्थान को लेकर वसुंधरा राजे को हरी झंडी मिलने की पूरी संभावना है।

देखिए राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की पूरी सूची
https://hindi.oneindia.com/list-of-chief-ministers-of-rajasthan/

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