राजस्थान: महेश जोशी के इस्तीफे के बाद सामने आए प्रभारी रंधावा, कहा "अशोक गहलोत सबसे बड़े नेता"
राजस्थान में मुख्य सचेतक महेश जोशी के इस्तीफे के बाद प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पार्टी के उदयपुर फार्मूले को लागू करते हुए यह फैसला किया गया है। पार्टी के भीतर कोई मतभेद नहीं है। सब एकजुट हैं।
राजस्थान में मुख्य सचेतक महेश जोशी के इस्तीफे के बाद से कांग्रेस में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। जोशी के इस्तीफे के बाद प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि यह तो पहले ही हो जाना चाहिए था। जब पार्टी के उदयपुर अधिवेशन में फैसला हो गया कि कोई व्यक्ति दो पदों पर नहीं रह सकता है। मुख्यमंत्री को यह बहुत पहले ही कर देना चाहिए था। जोशी के बयान पर रंधावा ने कहा कि ऐसे बयान आना ठीक नहीं है। अगर उन्हें लगता है कि 25 सितंबर की वजह से हुआ है तो अभी उसके बारे में हाईकमान ने कोई बात नहीं की है। ना ही मैंने कोई बात की है। पार्टी के अधिवेशन में फैसला हुआ कि एक ही पद पर एक ही व्यक्ति रह सकता है। वह फैसला मैंने लागू कर दिया। जिस पर एक्शन होना है। ऊपर से आएगा तो लागू कर देंगे।

प्रदेश में गहलोत कांग्रेस के बड़े नेता
प्रदेश प्रभारी रंधावा ने कहा कि पूरी कांग्रेस एकजुट है जो गिले-शिकवे हैं वह दूर हो जाएंगे राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता है राजनीति में कल का दोस्त आगे दुश्मन बन जाता है दुश्मन दोस्त बन जाता है पायलट खेमे की बातें मेरे आने से पहले की है वह हाईकमान की नजर में है एक्शन होगा या नहीं यह तो उनसे ही पूछना चाहिए जिन्होंने मुझे भेजा है मैंने तो ऊपर से आए आदेश को 15 मिनट में लागू कर दूंगा।
पार्टी में कोई मतभेद नहीं, सब एकजुट
प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सचिन पायलट नेता है। गहलोत सबसे बड़े नेता हैं। कोई मनमुटाव है तो गहलोत साहब को अपने आप ही उनके पास जाना पड़ेगा। कोई भी व्यक्ति परिवार का हेड है तो उन्हें ही बात करनी होगी। सचिन पायलट की भूमिका पर रंधावा ने कहा कि पायलट का रोल हमेशा ही रहेगा। हमारे यूथ लीडर है। उनके पिता भी कांग्रेसी रहे हैं। इग्नोर तो किसी को भी नहीं किया जा सकता है। गहलोत तीन बार जनरल सेक्रेटरी रहे हैं। तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं। पंजाब में पिछली बार गहलोत ने ही टिकट बांटे थे। गहलोत की ओर से जिम्मेदारी ज्यादा बन जाती है। मतभेद कैसे खत्म करने हैं। गहलोत हमसे ज्यादा अनुभवी हैं। प्रदेश में 25 सितंबर की घटना पर कांग्रेस लीडरशिप ने बीच का रास्ता निकालने के प्रयास शुरू कर दिए है। उस घटना से अब तक प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है।












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