राजस्थान का पहला केस: पत्नी व भाभी के लिवर के टुकड़ों को जोड़कर बचाई 126KG वजनी इंद्रपाल की जान
राजस्थान में मेडिकल साइंस का अनूठा केस सामने आया है। जयपुर के एक निजी अस्पताल में पत्नी व भाभी के लिवर को जोड़कर मरीज की जान बचाई गई है।
जयपुर के महात्मा गांधी अस्प्ताल के डॉक्टरों की टीम दावा करती है कि 16 घंटे चले ऑपरेशन में डोनर पत्नी व भाभी के लिवर के हिस्सों को जोड़कर मरीज की जान बचाने का यह राजस्थान का पहला मामला है।

अस्पताल के सेंटर फॉर डाइजेस्टिव साइंजेस के चेयरमैन और लिवर प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. नैमिष एन मेहता ने बताया कि मरीज व डोनर को 20 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
डॉ. मेहता के अनुसार भरतपुर निवासी 50 वर्षीय मरीज इंद्रपाल सिंह को पीलिया, पेट में पानी भरने और सूजन की शिकायत थी। उन्हें खाने-पीने में भी परेशान हो रही है।
जांच में पता चला कि मरीज की जान बचाने के लिए लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत है। इसलिए उनके लिवर का आकार भी सामान्य बड़ा था।
इस तरह के मामले में प्रत्यारोपण चुनौती था। परिजन को इसकी जानकारी दी तो मरीज की पत्नी की पत्नी तारावती लिवर डोनेट करने के लिए सहमत हो गई। लेकिन 126 किलोग्राम वजनी मरीज के लिवर का आकार बड़ा था।
इसके बाद मरीज की भाभी मंजू ने लिवर डोनेट करने की सहमति जता दी। इस मरीज की पत्नी के लिवर का 520 ग्राम और उसकी भाभी के लिवर 220 ग्राम हिस्ससा प्रत्यारोपित किया गया।












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