राजस्थान: सीएम गहलोत ने केंद्रीय वित्त मंत्री पर साधा निशाना, कांग्रेस नेताओं पर छापे को बताया निंदनीय
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ओपीएस को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधा है। सीएम गहलोत ने इस दौरान छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं के यहां छापों को लेकर भी निंदा की है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ओपीएस को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने जिस तरह से बयान दिए हैं। मैं समझता हूँ कि वित्त मंत्री को स्पष्ट कहना चाहिए था कि हम ओपीएस के खिलाफ है तो मालूम पड़ता कि आपकी मंशा क्या है। गोलमोल जवाब दे रहे हो। यह उचित नहीं है। यह कर्मचारियों के लिए मानवीय दृष्टिकोण का सवाल है। हम कर्मचारियों पर दया नहीं कर रहे हैं। एहसान नहीं कर रहे हैं। 35 साल की सर्विस के बाद भी आम आदमी सुरक्षा महसूस नहीं करें। शेयर मार्केट के ऊपर डिपेंड रहे। सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि यह कहां की समझदारी है। बताना चाहिए उनको। मुझे बहुत दुख होता है कि एक वित्त मंत्री होकर इस प्रकार के जवाब दे रही है कि जिसका कोई अर्थ ही नहीं होता है। जवाब दिया समझ से परे है। मानवाधिकार आयोग विरोध कर चुका है। नियम कायदे बने नहीं। एनपीएस लेकर आ गए।

कर्मचारियों को शेयर मार्केट के भरोसे कैसे छोड़ दें
सीएम गहलोत ने कहा कि अनुभव बताता है कि शेयर मार्केट पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। कर्मचारियों को उनके भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। उन्हें सुझाव देने में क्या दिक्कत है। हमने पहल की है तो चारों तरफ स्वागत हुआ है। चार पांच राज्य तो आगे आ गए हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री कमेटी बना रहे हैं। हो सकता है जल्दी ही लागू भी कर दें। यही इनके हालात हैं। हिमाचल से सबक नहीं लिया है अभी तक। सीएम गहलोत ने कहा कि मेरा मानना है कि स्पष्ट तौर पर ओपीएस लागू करना चाहिए। लाखों कर्मचारियों को विश्वास दिलाना चाहिए कि भारत सरकार और राज्य सरकारें आपके दुख सुख में साथ खड़ी हैं।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं पर छापे की कार्रवाई निंदनीय
सीएम गहलोत ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं के छापे को लेकर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण हैं। 2014 से हम देख रहे हैं कि आयकर, ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है। हालात बहुत गंभीर होते जा रहे हैं। जहां-जहां चुनाव आ रहे हैं। वहां केंद्रीय एजेंसियां छापे मार रही है। रायपुर में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन है। भाजपा खुद को राष्ट्रीय पार्टी कहती है। उसे तो मालूम होगा महाधिवेशन से पहले इस तरह की कार्रवाई करना निंदनीय हैं। हम इसकी निंदा करते हैं। बीजेपी नेताओं पर तो छापे पड़ते नहीं हैं। जो कांग्रेस नेता बीजेपी में शामिल होते हैं। उन पर छापे नहीं पड़ते हैं। यह अलग बात है कि बीजेपी उन पर आरोप लगाती हैं। लेकिन बीजेपी में शामिल होते ही आरोप समाप्त हो जाते हैं।












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