Prahlad Sahay Meena : जहां गैंगमैन बनकर करते थे पटरियों की मरम्मत, 5 सरकारी नौकरी छोड़ वहीं बने IPS

Prahlad Sahai Meena IPS : राजस्थान के किसान का वो बेटा जो 5 सरकारी नौकरी छोड़कर बना आईपीएस

जयुपर। मिलिए इनसे। ये हैं प्रहलाद सहाय मीना। किसान के बेटे हैं। गुदड़ी के लाल हैं। मेहनत और कामयाबी की मिसाल भी। इन्होंने वो कमाल कर दिखाया जो इनके आस-पास के गांवों में कोई नहीं कर सका। 6 बार सरकारी नौकरी लगे। 5 बार सिर्फ इसलिए छोड़ दी कि भारतीय पुलिस सेवा का अफसर बनने का लक्ष्य था, जो पूरा कर दिखाया।

गैंगमैन से आईपीएस बनने का सफर

गैंगमैन से आईपीएस बनने का सफर

प्रहलाद सहाय मीना का रेलवे गैंगमैन से आईपीएस बनने का सफर आसान नहीं रहा। यूपीएससी में तीन बार और आरपीएससी में एक बार असफलता भी मिली, मगर मेहनत करना नहीं छोड़ा। नतीजा हम सबके सामने है। वन इंडिया हिंदी से बातचीत में प्रहलाद सहाय मीना ने बयां किया अपनी कामयाबी का सफर, जो हर किसी के लिए प्रेरणादायी है। प्रहलाद सहाय मीना बताते हैं कि वे अपने परिवार और गांव से पहले आईपीएस हैं। खास बात है कि गैंगमैन के रूप में ये ओड़िशा में पटरियों की देखभाल व मरम्मत करते थे। संयोग देखिए कि अब ओड़िशा में ही आईपीएस अधिकारी हैं।

कौन हैं आईपीएस प्रहलाद सहाय मीना

कौन हैं आईपीएस प्रहलाद सहाय मीना

प्रहलाद सहाय मीना उड़िसा कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। मूलरूप से राजस्थान के दौसा जिले की रामगढ़ पचवारा तहसील के निजामपुर के गांव आभानेरी के रहने वाले हैं। इनके पिता शिवराम मीना किसान हैं। माता प्रेमी देवी गृहणी हैं। प्रहलाद सहाय मीना का जनवरी 2017 में भारतीय पुलिस सेवा में 951वीं रैंक पर चयन हुआ। 27 फरवरी 1988 को जन्मे प्रहलाद सहाय मीना वर्तमान में ओड़िशा के मलकनगिरी में बतौर एसडीपीओ कार्यरत हैं। फिलहाल नेशनल पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण पर हैं।

सरकारी स्कूल में पढ़कर हासिल की सफलता

सरकारी स्कूल में पढ़कर हासिल की सफलता

प्रहलाद सहाय मीना का बचपन गांव में बीता। पढ़ाई सरकारी स्कूल से हुई। दसवीं कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। दसवीं के बाद दोस्तों ने साइंस विषय लेने की सलाह दी। प्रहलाद मीणा इंजीनियर बनना चाहते थे, मगर परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इंजीनियरिंग करने बाहर नहीं भेज सकते थे। गांव के पास किसी विद्यालय में विज्ञान संकाय नहीं था। ऐसे में कला संकाय से 12वीं कक्षा में भी प्रथम स्थान पाया। फिर प्राथमिकता बदल गई। इंजीनियर की बजाय सरकारी नौकरी लगना चाहते थे।

जयपुर में किराए का रूम लेकर रहे

जयपुर में किराए का रूम लेकर रहे

12वीं की पढ़ाई के दौरान इनके गांव के एक लड़के का भारतीय रेलवे में ग्रुप डी (गैंगमैन) चयन हुआ। उससे प्रेरित होकर प्रहलाद मीना भी रेलवे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुट गए। साथ ही कॉलेज की पढ़ाई के लिए जयपुर आ गए। किराए का रूम लेकर रहने लगे। राजस्थान कॉलेज में प्रवेश लिया और ​बीए द्वितीय वर्ष 2008 में पहली बार सरकारी नौकरी लगे।

इन पदों पर लगी सरकारी नौकरी

इन पदों पर लगी सरकारी नौकरी

1. वर्ष 2008 में भारतीय रेलवे में भुवनेश्वर बोर्ड से गैंगमैन बने।
2. वर्ष 2008 भारतीय स्टेट बैंक सहायक (एलडीसी)
3. वर्ष 2010 भारतीय स्टेट बैंक SBI में प्रोबेशनरी अधिकारी
4. रक्षा मंत्रालय के अधीन सहायक लेखा अधिकारी- AAO
5. रेल मंत्रालय में सहायक अनुभाग अधिकारी- ASO
6. भारतीय पुलिस सेवा में ओडिशा कैडर के 2017 के IPS

सिविल सेवा परीक्षा में तीन बार हुए असफल

सिविल सेवा परीक्षा में तीन बार हुए असफल

ऐसा नहीं है कि हर बार प्रहलाद सहाय मीना को सिर्फ सफलता ही मिली। सिविल सेवा परीक्षा में तीन बार फेल भी हुए, मगर हौसला बनाए रखा। ​मेहनत करनी नहीं छोड़ी। इन्होंने वर्ष 2013 में दिल्ली आकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2013 तथा 2014 में मुख्य परीक्षा तक ही पहुंच पाए। 2015 में प्रिलिमनरी परीक्षा में असफल रहे। वर्ष 2016 के प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में पास हुए और वर्ष 2017 में भारतीय पुलिस सेवा में चयन हुआ। ओड़िशा कैडर के आईपीएस अधिकारी बने।

आरपीएससी में एक नंबर से चूके

आरपीएससी में एक नंबर से चूके

लगातार तीन साल तक सिविल सेवा परीक्षा में असफल रहने के बाद प्रहलाद सहाय मीना हिन्दी साहित्य से एमए के साथ ही नेट जेआरएफ की तैयारी करने लगे। इसी साल में राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की गई कॉलेज लेक्चरर परीक्षा में शामिल हुए। साक्षात्कार के लिए चुने जाने में एक नंबर से चूक गए।

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