Power Crisis : कोल इंडिया के चेयरमैन ने बताई राजस्थान में कोयले की कमी की असली वजह
जयपुर, 12 अक्टूबर। राजस्थान समेत देश के कई हिस्से इस वक्त बिजली संकट से जूझ रहे हैं। कोयले की कमी के चलते कहीं पर पावर प्लांट बंद हो गए तो कहीं चालू प्लांटों में बिजली उत्पादन घट गया।

135 बिजलीघरों में से 108 में महज सात दिन से भी कम का कोयला बचा
बिजली संकट के बीच खबर आई कि देश के 135 बिजलीघरों में से 108 में महज सात दिन से भी कम का कोयला बचा था और 16 बिजली घर तो कोयले की कमी के कारण बंद ही हो गए। बात अगर राजस्थान की करें तो यहां छबड़ा थर्मल और सूरतगढ़ थर्मल प्लांट बंद हुए हैं।
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अक्टूबर की शुरुआत में ऐसे बिजली घरों की संख्या 64
ताजा हालात जानें तो देश में रविवार तक 70 पावर प्लांट में 4 दिन का ही कोयला बचा था। चार दिन से कम का कोयला शेष रहना सुपर क्रिटिकल स्टॉक माना जाता है। अक्टूबर की शुरुआत में ऐसे बिजली घरों की संख्या 64 थी जो अब बढ़कर 70 तक पहुंच गई है।

2.17 लाख मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक
इधर, राजस्थान में 6 बड़े बिजली उत्पादन कंपनियों के पास सोमवार तक 2.17 लाख मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक है। इससे तीन दिन तक ही उत्पादन हो सकता है। प्रदेश में बिजली की संकट की असली वजह कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल से बातचीत में सामने आई है।

छह सौ करोड़ रुपए का बकाया भी नहीं चुकाया
देश की बिजली उत्पादन कंपनियों को कोयला सप्लाई करने वाली कंपनी कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि राजस्थान ने पूरे साल कोयला नहीं लिया। छह सौ करोड़ रुपए का बकाया भी नहीं चुकाया और अब बारिश में अचानक कोयला मांगने लगे हैं जबकि बारिश के दिनों में खदानों में पानी भर जाता है।

राजस्थान के पास खुद की कोयला खान हैं
कोल इंडिया चेयरमैन इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि राजस्थान के पास खुद की कोयला खान हैं। प्रदेश खुद कोयले का उत्पादन शुरू करके कोयले की कमी पूरी कर सकता है।












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