अशोक गहलोत के एक पद पर रहने के बयान के बाद गरमाई राजस्थान की सियासत, सीएम पद को लेकर सरगर्मियां तेज

जयपुर, 23 सितंबर। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में राजस्थान कांग्रेस की राजनीति को पूरी तरह से गरमा दिया है। राजस्थान की सियासत कब गरमा गई है । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक दिन पहले दिए बयान में बदलाव लाते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी बड़ी होती है। उसे पूरा करने के लिए पूरा देश देखना पड़ता है। ऐसे में वह दूसरे पद के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे। गहलोत के इस बयान से कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर वे राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो मुख्यमंत्री का पद छोड़ेंगे। गहलोत के इस बयान के बाद राहुल गांधी ने एक व्यक्ति एक एक पद को लेकर साफ संकेत दिए हैं कि एक व्यक्ति के पास दो पद नहीं रहेंगे। राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस के अध्यक्ष पद से जोड़ कर देखा जा रहा है। अशोक गहलोत संभवतया 28 सितंबर को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भर सकते हैं। इस बीच राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है।

ashok gahlot

अशोक गहलोत के इस्तीफे को लेकर भी चर्चा

अशोक गहलोत के इस्तीफे को लेकर भी चर्चा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विरोधियों ने राहुल गांधी के बयान को इस तरीके से हवा दी है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नामांकन से पहले ही इस्तीफा देंगे। जबकि राहुल गांधी और अशोक गहलोत ने अपने बयान में ऐसा कुछ नहीं कहा है। गहलोत ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद बड़ी जिम्मेदारी है। स्वाभाविक है वह दूसरे पद से न्याय नहीं कर पाएगा। राहुल गांधी ने भी पार्टी के संकल्प मानने की बात कर वही कहा है। जो एक नेता के रूप में उनको कहना चाहिए था। लेकिन असल में होगा क्या। यह किसी को पता नहीं। जो संकेत मिल रहे हैं। उसके मुताबिक अशोक गहलोत अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो मुख्यमंत्री का पद एकदम नहीं छोड़ेंगे। पूरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उसमें एक महीने से ज्यादा का वक्त लग सकता है। संकेत इस बात के भी हैं कि मुख्यमंत्री गहलोत बजट पेश करने के बाद खुद पद छोड़ने का फैसला करें। लेकिन यह तय है कि गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री पद को लेकर हाईकमान करेगा फैसला

मुख्यमंत्री पद को लेकर हाईकमान करेगा फैसला

अशोक गहलोत ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कोच्चि में कहा कि जो हालात राजस्थान में है। हाईकमान उसकी स्टडी करेगा और विधायकों की भावना देखेगा। साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि हम अगला चुनाव जीते। क्योंकि अब कांग्रेस के पास बड़ा राज्य राजस्थान ही है। हमारे लिए यह फैसला बहुत नाजुक फैसला भी होगा और बहुत सोच समझ कर लेना पड़ेगा। गहलोत ने कहा कि मुख्य विपक्षी की भूमिका में कांग्रेस में फिर से जान डालने के लिए काम करना है। फिर आप दो पद पर कैसे रख सकते हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री के सवाल पर गहलोत ने कहा कि हमें यह देखना है कि कौन आए। जिससे पार्टी की एकजुटता का मैसेज जाए और हम किसी भी कीमत पर सरकार रिपीट करें। इससे अन्य राज्यों में भी पार्टी फिर से खड़ी हो सके। यह फैसला बहुत बड़ा होगा और बहुत सोच समझ कर लेना होगा।

मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ी सरगर्मियां

मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ी सरगर्मियां

अशोक गहलोत के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने के फैसले के बाद ही राजस्थान के मुख्यमंत्री पद को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है। इस पद को लेकर प्रदेश के सभी बड़े नेता सक्रीय होकर अपनी लॉबिंग में जुट गए हैं। चर्चा है कि सीएम गहलोत ने सोनिया गांधी के सामने मुख्यमंत्री पद के लिए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी के नाम का सुझाव रखा है। वही मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार सचिन पायलट ने भी विधायकों से बातचीत करना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि पायलट अपने विरोधी विधायकों से भी संपर्क कर रहे हैं। पायलट शुक्रवार को दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे।

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