Rajasthan : घनश्याम तिवाड़ी की BJP में घर वापसी के पीछे कौनसी घनघोर सियासी चाल? जानिए इनसाइड स्टोरी
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने फिर से भाजपा का दामन थाम लिया है। तिवाड़ी के भाजपा में दोबारा आने पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो चुकी है कि एक बार फिर से तिवाड़ी को प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के जरिए 13 नम्बर का रथ रोकने का मौका मिलेगा। बता दें कि तिवाड़ी ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से नाराजगी के चलते अपनी पार्टी भारत वाहिनी बनाई और उसके बाद घनश्याम तिवाड़ी ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया था, लेकिन शनिवार को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने उन्हें फिर से भाजपा ज्वाइन करवाई है।

तो ये वजह है घनश्याम तिवाड़ी के भाजपा वापस ज्वाइन करने की
सियासी सूत्रों का कहना है कि तिवाड़ी को वापस भाजपा में लाने की वजह आने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले अंदर ही अंदर वसुंधरा खेमे को कमजोर करना है, क्योंकि पूर्व में तिवाड़ी और राजे विवाद जमकर चर्चा में रहा था और इस बार भी पूनिया तिवाड़ी के माध्यम से दांव खेलना चाहते हैं। गौरतलब है कि जब से पूनिया को राजस्थान भाजपा की कमान सौंपी गई है तब से राजे पार्टी के कार्यक्रमों से दूर-दूर रहने लगी हैं और आज भी पार्टी के वरिष्ठ नेता ने भाजपा का दामन थामा है उस दौरान ना तो राजे कहीं नजर आई और ना ही राजे खेमे से जुड़े नेता वहां दिखाई दिए। वहीं, पूनिया ने तिवाड़ी को वापस पार्टी में लाकर साबित कर दिया है कि पूनिया खेमे को अब नजरअंदाज नहीं की जा सकता।

घनश्याम तिवाड़ी की वापसी पर पूनिया का तर्क
बता दें कि कुछ दिन पूर्व कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटारा ने स्पष्ट कर दिया था कि भाजपा में मुख्यमंत्री पद के दावेदार 6-6 हैं। मीडिया द्वारा तिवाड़ी के भाजपा में फिर से शामिल होने के सवाल पर पूनिया ने बड़ी ही सफाई से जवाब देते हुए इसे केंद्र के तरफ धकेल दिया और कहा कि भाजपा में हम सभी लोग परिवार की तरह काम करते हैं। कई परिस्थिति के कारण परिवार के लोग अलग हो जाते हैं। पूनिया ने कुछ नामों का भी उदाहरण दिया जैसे उमा भारती, कल्याण सिंह बाबूलाल मरांडी सहित कई बड़े कद के लोग किसी परिस्थिति के कारण पार्टी से अलग हुए, लेकिन बाद में इन्होंने पार्टी के प्रति निष्ठा व्यक्त की और बाद में हमारे साथ आए।

डूंगरपुर में भाजपा कांग्रेस गठजोड़ पर क्या बोले पूनिया
डूंगरपुर में भाजपा और कांग्रेस के गठजोड़ मामले पर बीटीपी अभी भी दोनों पार्टियों पर निशाना साधे हुए हैं। हालांकि इस पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पूनिया ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि परिस्थिति के अनुसार फैसला होता है। छोटे चुनावों में स्थानीय ईकाई के आधार पर और राजनीति परिस्थिति के आधार उनको जो फैसला उचित लगा वो लिया। इसको मैं छिपाउंगा नहीं। एनडीए के सहयोगी दल आरएलपी के पार्टी छोड़ने की चेतावनी मामले पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने साफ कर दिया कि जाने वाले जा रहे हैं। उन्हें हम रोक नहीं रहे हैं। वह जा सकते हैं, जो पार्टी में आ रहे हैं उनका हम स्वागत करते हैं। वहीं, भाजपा में शामिल होते ही घनश्याम तिवाड़ी ने एक बार फिर से पार्टी का गीत अलापना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी से बाहर होने के बाद भी मन से पार्टी के अंदर था। तिवाड़ी ने कहा कि मेरी विचारधारा पूर्ण रूप से भाजपा की है, जो मेरी रग-रग में समाई हुई है।

घनश्याम तिवाड़ी की जीवनी
बता दें कि राजस्थान की राजनीति में घनश्याम तिवाड़ी एक दिग्गज नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। 1980 में पहली बार सीकर से विधायक बने तिवाड़ी ने पार्टी के कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और तिवाड़ी 6 बार चुनाव जीतकर राजस्थान विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। वर्ष 1993 से 1998 तक विधानसभा क्षेत्र चैमूं से विधायक रहे तो वहीं जुलाई 1998 से नवंबर 1998 तक भैरोंसिंह शेखावत सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे और दिसम्बर 2003 से 2007 तक राजे सरकार में शिक्षा मंत्री रहे, लेकिन उसके बाद किसी मतभेद-मनभेद के चलते वह पार्टी से अलग थलग होकर खुद की पार्टी बनाई और फिर कांग्रेस में शामिल हुए, हालांकि इस बार पूनिया ने तिवाड़ी के लिए भाजपा का दरवाजा खोला है।












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