Ahmed Raza : बिना हाथों वाले 7 साल के अहमद रजा का डांस आपको भी बना देगा दीवाना, देखें VIDEO
जयपुर, 13 अगस्त। यह कहानी है नागौर जिले के मकराना के 7 साल के अहमद रजा की, जिसे कुदरत ने बचपन से ही दोनों हाथ नहीं दिए। पैरों में भी विकृति है, लेकिन अहमद रजा अपने आप को दिव्यांग नहीं कहलाना चाहता। वह एक कामयाब डांसर के रूप में अपना करियर बनाना चाहता है।
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कहानी के किरदार अहमद रजा के पिता फरहान
इस कहानी के किरदार अहमद रजा के पिता फरहान भी हैं, जो अहमद रजा को कामयाब बनाने के लिए रोज अपने शहर से 27 किलोमीटर दूर कुचामन सिटी में डांसिंग क्लास के लिए लाते हैं। अहमद रजा के डांस गुरु आशीष भी इस कहानी के मुख्य किरदार हैं। उनका सपना है कि अहमद रजा को आने वाले वक्त में लोग दिव्यांग के रूप में नहीं बल्कि एक कामयाब शख्सियत के रूप में पहचान मिले। अगर हौसला हो तो बड़ी से बड़ी परेशानी भी हल हो जाती है, कुछ ऐसा ही हौसला दिखाया नागौर जिले के मकराना के निवासी फरहान ने जिन्हें 7 साल पहले कुदरत ने ऐसा पुत्र दिया जिसके जन्म से ही दोनों हाथ नहीं थे। पैरों में भी विकृति थी।

रजा के जन्म के बाद माता-पिता पूरी तरह से निराश हो गए
बच्चे अहमद रजा के जन्म के बाद माता-पिता पूरी तरह से निराश हो गए थे। रिश्तेदारों ने पिता फरहान अहमद गैसावत को नसीहत दी कि बच्चे को अनाथालय छोड़ आए। फरहान अहमद गैसावत ने किसी की नहीं सुनी और हौसला दिखाते हुए फैसला किया कि वह अपने बच्चे को ऐसा बनाएंगे कि लोग उसकी कमजोरी को नहीं बल्कि खूबी को पहचाने।

दिव्यांगता से परे हीरा बनाने की ठानी
मार्बल के क्षेत्र में मजदूरी करने वाले गरीब पिता ने अपने कलेजे के टुकड़े को दिव्यांगता से परे हीरा बनाने की ठानी और अब नतीजा यह है कि वह दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद 7 साल का अहमद रजा अव्वल डांसर बनने की राह पर है। पिता फरहान अख्तर चाहते हैं कि सरकार या कोई स्वयंसेवी संस्था अहमद को कामयाब बनाने के लिए उनका साथ दें तो अहमद अपनी मंजिल को पा सकता है।

माता-पिता ने अहमद रजा को खुदा की नेमत मानकर परवरिश की
माता-पिता ने अहमद रजा को खुदा की नेमत मानकर परवरिश की। नारायण सेवा संस्था उदयपुर से विकृत पैरों का उपचार करवा उन्हें कुछ सीधा करवाया। सोशल मीडिया पर दिव्यांगों के साहसिक कारनामों के वीडियो देखकर हिम्मत बंधी। राजा की कम उम्र से ही डांस में रुचि थी।इसलिए माता-पिता ने अहमद रजा का करियर डांसिंग कब क्षेत्र में बनाने का फैसला किया। अपने बेटे अहमद रजा को कामयाब बनाने के लिए फरहान मकराना से 27 किलोमीटर दूर कुचामन सिटी रोजाना आते हैं ताकि वह डांस क्लासेस के जरिए अपने आप को निखार सके। पिता फरहान की तरह अहमद रजा भी बुलंद हौसला रखता है। उसका कहना है कि वह एक दिन जरूर कामयाब डांसर बनेगा।

कुचामन का एडी ग्रुप ऑफ डांस इंस्टीट्यूट, डांस का प्रशिक्षण दे रहा
बता दें कि अहमद रजा को कुचामन का एडी ग्रुप ऑफ डांस इंस्टीट्यूट, डांस का प्रशिक्षण दे रहा है। उसके पिता रोजाना उसे मकराना से 27 किलोमीटर दूर कुचामन लाते हैं। डांस प्रशिक्षक आशीष रावल और निर्मल चौहान, अहमद रजा को विभिन्न तरह के डांस का प्रशिक्षण दे रहे हैं। डांस गुरु आशीष रावल बताते हैं कि जब अहमद रजा शुरू में उनके पास आया था तो उसके हाथ नहीं होने के साथ पैरों में विकृति को देखकर उन्हें एक बार लगा था कि कुछ मुश्किल आ सकती है, लेकिन उन्होंने जब अहमद रजा को सिखाना शुरू किया तो अहमद ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए डांस के हर एक स्टेप को आसानी से सीखना शुरू कर दिया।

रजा किसी भी चीज को बहुत जल्दी से सीख लेता है
रजा किसी भी चीज को बहुत जल्दी से सीख लेता है। यह उसकी खूबी है। अहमद रजा अब डांस कला में इतना पारंगत होने लगा है कि पिछले दिनों अखिल भारतीय स्तर के एक ऑनलाइन डांस कंपटीशन में उसने अपने गुरु निर्मल चौहान के साथ पार्टनर बन हिस्सा लिया और परिणाम के रूप में पूरे भारत में दूसरा स्थान हासिल किया था। आशीष रावल आत्मविश्वास से लबरेज होकर कहते हैं कि अहमद रजा एक दिन अपनी कला के जरिए दुनिया में नाम रोशन करेगा।












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