20 साल बाद रेखा को जन्मदिन पर मिली बाल विवाह की बेड़ियों से आजादी, जानिए कैसे
जयपुर, 9 सितंबर। राजस्थान के जोधपुर में एक बालिका वधू को पारिवारिक न्यायालय ने विवाह के 20 साल बाद उसके जन्मदिन के मौके पर बाल विवाह की बेड़ियों से आजाद कर अनूठा तोहफा दिया है। मामला जोधपुर जिले के रसीदा गांव का है। यहां रेखा विश्नोई की शादी 2002 में उसके दादाजी के मौसर पर गांव के ही निवासी राजेश के साथ हुई थी। कुछ साल पहले रेखा के ससुराल वालों ने उसके परिवार पर गौना विदा करने का दबाव बनाया। जो एएनएम की पढ़ाई कर रही रेखा को नागवार गुजरा। उसे एएनएम बनने का सपना टूटता दिखाई दिया। रेखा ने ससुराल जाने से इनकार कर दिया तो ससुराल वालों ने जातीय पंचायत बैठकर रेखा पर 10 लाख रुपए का आर्थिक दंड थोप दिया। लेकिन रेखा ने हार नहीं मानी। उसने सारथी ट्रस्ट की कृति भारती के जरिए पारिवारिक न्यायालय की शरण ली।


सदी की सबसे बड़ी कुरीति
बालिका वधू रेखा विश्नोई ने कृति भारती के जरिए पारिवारिक न्यायालय में बाल विवाह को निरस्त करने की अर्जी लगाई। इस दौरान कृति भारती ने न्यायालय में पैरवी करते हुए बाल विवाह और आयु प्रमाण पत्र के तथ्य पेश किए। जिस पर सुनवाई करते हुए पारिवारिक न्यायालय संख्या दो के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मोदी ने करीब 20 साल पहले एक साल की उम्र में हुए रेखा के बाल विवाह को निरस्त करने का आदेश दिया। न्यायालय ने कहा कि एक सदी से बाल विवाह की कुरीति को हम नहीं मिटा पाए हैं। अब सभी को मिलकर बाल विवाह को जड़ से मिटाने का संकल्प लेना चाहिए।

रेखा का सपना होगा पूरा
जोधपुर की रेखा विश्नोई को 21 साल की उम्र में जन्मदिन के मौके पर बाल विवाह निरस्त होने का उपहार मिला है। अब रेखा का एएनएम बनने का सपना पूरा होगा। वह अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख पाएगी। इसे लेकर रेखा बहुत खुश है। सारथी ट्रस्ट की कृति भारती ने बताया कि रेखा के बेहतर पुनर्वास के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्दी ही वह नया जीवन शुरू करेगी।

कम पढ़ा लिखा था लड़का
सारथी ट्रस्ट की डॉ. कृति भारती के मुताबिक राजेश ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था। जबकि रेखा शुरू से पढ़ाई में होशियार थी। पढ़ लिख कर आगे बढ़ना उसका सपना था। इसी के चलते उसने एएनएम बनने का सपना देखा था। वह इसकी तैयारी कर ही रही थी। इसी दौरान जातीय पंचायत की आड़ में उस पर आर्थिक दंड थोप दिया गया। उसे पारिवारिक न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

20 साल तक पीहर में रही रेखा
अमूमन बेटी का ब्याह होने के बाद उसे ससुराल भेज दिया जाता है। लेकिन रेखा विश्नोई को बाल विवाह जैसी कुरीति की वजह से अपने पीहर में रहना पड़ रहा था। ऐसे में उसने कई सामाजिक यातनाएं झेली है। मानसिक रूप से वह कई बार अवसाद में गई। लेकिन उसने अपने आप को मजबूत बनाए रखा। वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत रही। आखिरकार न्यायालय में जाकर उसे न्याय मिल पाया।

रेखा को मिलेगी बेहतर जिंदगी
सोशल एक्टिविस्ट कृति भारती बताती हैं ऐसी अनेक लड़कियां हैं। जो बाल विवाह की बेड़ियों में जकड़ी हुई है। समाज और परिवार के दबाव के चलते वे लड़कियां अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाती है। लेकिन वक्त के साथ समाज को बदलना होगा। अब हम ही लोगों को आगे आकर इस कुरीति को मिटाना होगा। बाल विवाह का विकल्प तलाक कभी नहीं हो सकता। इसे निरस्त ही किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने रेखा बिश्नोई का बाल विवाह निरस्त कर उसे जीवन का सबसे बड़ा तोहफा दिया है। अब रेखा बेहतर जीवन जी सकेगी और अपने सपनों को पूरा करेगी। उनके पुनर्वास के प्रयास किए जा रहे हैं।

बाल विवाह का दंश झेल रहा समाज
राजस्थान में अनेक बालिका वधू बाल विवाह का दंश झेल रही है। यह एक ऐसी कुरीति है। जो आज भी समाज में मौजूद है। समाज की तमाम उन्नति के बावजूद इसे जड़ से मिटाने में नाकाम साबित हुआ हैं। अनेकों लड़कियां आज भी बाल विवाह की वजह से नारकीय जीवन जी रही है। यह एक ऐसा विवाह है। जिसमें लड़की अपनी पसंद का वर नहीं चुन पाती। ना ही वह अपने जीवन के सपनों को पूरा कर पाती है।












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