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10 फरवरी क्यों है छत्तीसगढ़ के लिए अहम तारीख, जानिए शहीद गुण्डाधुर और भूमकाल दिवस के बारे में

भूमकाल दिवस , शहीद गुण्डाधुर , बस्तर , अंग्रेज , 10 फरवरी 1910 , छत्तीसगढ़ ,आदिवासी ,भूपेश बघेल ,कांकेरBhumkal diwas , gundadhur , britishers, chhattisgarh , tribal , bhupesh baghel , kanker , 10 February 2010

रायपुर, 09 फरवरी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को भूमकाल स्मृति दिवस से एक दिन पहले छत्तीसगढ़ के शहीद आदिवासी जननायक अमर शहीद गुंडाधुर को नमन करते हुए उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने सीएम हाउस से ही कांकेर के घड़ी चौक में स्थापित अमर शहीद गुण्डाधुर की प्रतिमा का वर्चुअल लोकार्पण किया।आइए जानते है,भूमकाल दिवस और गुण्डाधुर के बारे में।

शहीद गुण्डाधुर ने बस्तर में छेड़ी थी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई

शहीद गुण्डाधुर ने बस्तर में छेड़ी थी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई

छत्तीसगढ़ के अमर शहीद गुण्डाधुर ने बस्तर में भूमकाल आंदोलन का नेतृत्व किया था। भूमकाल क्रांति के महानायक अमर शहीद गुण्डाधुर ने आजादी के 37 साल पहले सन् 1910 में बस्तर जैसे वनांचल क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई छेड़ी थी। भूमकाल आंदोलन आदिवासियों के स्वाभिमान, आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन तथा आदिवासियों की स्वतंत्रता की लड़ाई थी। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अंग्रेजों से लोहा लिया। वो अंग्रेजों के सामने झुके नहीं। उन्होंने आदिवासी समाज को जोड़ा।

छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ उठा था विरोध का स्वर

छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ उठा था विरोध का स्वर

दरअसल आजादी सेे पहले अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में भी विरोध का स्वर उठा था। इस विरोध को बुलंद करने में आदिवासी जननायकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। इन्हीं जननायकों में से एक अमर शहीद गुुडाधुर के नेतृत्व में सन् 1910 में बस्तर में हुए भूमकाल विद्रोह में आदिवासियों ने जल, जंगल और जमीन के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ डटकर संघर्ष किया था। आदिवासी चेतना के प्रतीक के रूप में शहीद गुंडाधुर जनमानस में हमेशा से जीवित रहें हैं। उनका बलिदान हमेशा आदिवासियों को शोषण के विरूद्ध आवाज बुलंद करने का साहस देता रहेगा।

 हर साल 10 फरवरी को मनाते है भूमकाल दिवस

हर साल 10 फरवरी को मनाते है भूमकाल दिवस

छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य यानि में रहने वाले स्थानीय लोग हर साल 10 फरवरी को भूमकाल दिवस के तौर पर मनाते है। माना जाता है कि इसी दिन 1910 में बस्तर के आदिवासियों की तरफ से अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंका गया था।भूमकाल का अर्थ होता अपनी भूमि के हक की खातिर लड़ना। भूमकाल आंदोलन में अंग्रेजो के खिलाफ लड़ने वाले हजारों आदिवासियों ने अपनी जान गंवाई थी। शहीद गुंडाधुर को भूमकाल का नायक माना जाता है।

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