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सबसे रहस्यमयी शिवालय,जहां आते हैं बाणासुर, कुदरत करती है शिव का अभिषेक !

आज हम आपको छत्तीसगढ़ के घने जंगलों के बीच एक दुर्गम स्थान में मौजूद गुफा में विराजमान शिवलिंग के बारे में बताएंगे,जिसका अभिषेक कुदरत खुद करती है।

दण्तेवाड़ा, 14 जून। भारत ही नहीं बल्कि, दुनियाभर में भगवान शिव के साधक मौजूद हैं। विश्व के कोने कोने में भगवान शिव के अद्भुत मंदिर मौजूद हैं,जिनका अपना आध्यात्मिक इतिहास है। आज हम आपको छत्तीसगढ़ के घने जंगलों के बीच एक दुर्गम स्थान में मौजूद गुफा में विराजमान शिवलिंग के बारे में बताएंगे,जिसका अभिषेक कुदरत खुद करती है। इतना ही नहीं आज भी वहां हजारों साल से कोई रहस्यमयी शख्स शिव पूजन करने आता है।

रहस्यमयी गुफा है,जिसके अंदर सदियों से विराजित है शिवलिंग

रहस्यमयी गुफा है,जिसके अंदर सदियों से विराजित है शिवलिंग

छत्तीसगढ़ का बस्तर कई अनसुलझे रहस्यों के लिए दुनियाभर में विख्यात है। यहां मौजूद स्थानों का अपना अलग इतिहास है या कहें तो मान्यताएं है। जंगलो से भरे दंडकारण्य क्षेत्र के दंतेवाड़ा जिले में बारसूर ब्लॉक के जंगल भगवान शिव के प्रताप से रौशन है। यहां एक रहस्यमयी गुफा है,जिसके अंदर सदियों से एक शिवलिंग विराजित है। इस शिवलिंग पर हरदिन प्राकृतिक रूप पानी रिसता रहता है या कहें कुदरत हर दिन महादेव का जलाभिषेक करती रहती है। घने जंगलों में होने के कारण इसपर ज्यादा रिसर्च सम्भव नहीं है,शायद इसलिए आजतक कोई पता नहीं लगा सका कि गुफा में पानी कहां से आता है।

तुलार गुफा तक पहुंचना नहीं है आसान

तुलार गुफा तक पहुंचना नहीं है आसान

इस अदभुत देवस्थान को तुलार गुफा के नाम से जाना जाता है ,जो कि बस्तर संभाग के जगदलपुर मुख्यालय से करीब 132 किमी दूर पर स्थित है। तुलार गुफा बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लाक में है,लेकिन शिवभक्त बारसूर से ही तुलार गुफा दर्शन के लिए जाते है। बारसूर से 20 किमी कच्चे सड़क मार्ग से मजबूत मोटरसाइकल या साइकल से ही पहुंचा जा सकता है। उसी मध्य इंद्रावती नदी के दो तटों को पार करने के बाद गोदुम, कोसलनार, मंगनार गांव से गुजरते हुए तुलार गुफा पहुंचा जा सकता है। चारों तरफ घनघोर जंगल होने की वजह से यहां की प्राकृतिक सुंदरता आकर्षण का केंद्र है।

बाणासुर आते हैं शिवपूजन करने !

बाणासुर आते हैं शिवपूजन करने !

मान्यता है कि तुलारगुफा में बाणसुर नामक राक्षस ने खुद को महान बनाने के लिए कई सालों तक तपस्या की थी। पौराणिक कथाओं , वेद-पुराणों में लिखा है कि 5000 बरस पहले बाणासुर ने इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की थी। क्योंकि महाभारतकालीन चित्रित राक्षसराज बाणासुर आज भी अमर हैं, इसलिए कृष्ण के एक वरदान के कारण वह रोज तुलारगुफा में भगवान शिव के पूजन के लिए आता है।यह बात वाकई में अचरज में डालती है कि हर दिन कोई अनजान शख्स तुलारगुफा के शिवलिंग पर फूल और चंदन लगाकर चला जाता है। स्थानीय लोग बरसों से शिव का श्रृंगार होते देख रहे हैं,लेकिन आजतक कोई बुझ नहीं सका कि कौन ,कब शिवदरबार पहुंचकर फिर गायब हो जाता है।

स्थान की महिमा निराली

स्थान की महिमा निराली

सावन के मौसम में भारी वर्षा के कारण इस स्थान तक पहुंचना बेहद जोखिमभरा होता है,लेकिन शिवभक्त इस जोखिम को भी उठाकर भोलेनाथ के दर्शन करने दूर-दूर से पहुंचते हैं। उफनती इंद्रावती नदी के कारण मार्ग अवरुद्ध हो जाने के कारण लोग अलग-अलग रास्तो से गुफा तक पहुंचते हैं। घना जंगल और नक्सल प्रभावित ,बेहद ही सवेंदनशील क्षेत्र होने की वजह से आम दिनों में भक्त यहां जाने से परहेज करते है, लेकिन महाशिवरात्रि को यहां दुर्गम रास्ता तय करके भक्त पहुँच ही जाते हैं। इस स्थान की महिमा इतनी निराली है कि सीआरपीएफ और बीएसएफ की टुकड़ी भी यहां शिव दर्शन के लिए पहुँचती है।

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