Jabalpur News: कौन है कांग्रेस का सियासी माफिया...एमआईसी को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ा वॉर
जबलपुर, 18 अगस्त: किसी तरह जबलपुर में कांग्रेस का मेयर बनने के बाद पार्टी का रुतबा बढ़ने का सपना देखा जा रहा था, लेकिन मेयर इन काउन्सिल गठित होते ही कई नेता पार्टी की थू-थू कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। सबसे बड़ी वजह लोकल लेवल पर नेताओं के बीच गुटबाजी हैं। विधायक संजय यादव के तीखे बयानों के बाद अब सोशल मीडिया पर वॉर छिड़ गया है। निशाने पर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ही हैं।
भ्रष्ट पार्षदों को बना दिया MIC मेंबर !
सोशल मीडिया पर कोई और नहीं बल्कि कई कांग्रेसी पार्षद और उनके परिजन मेयर इन काउन्सिल के चयन को लेकर टिप्पणी कर रहे हैं। निशाने पर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री है। राजेन्द्र प्रसाद वार्ड से पार्षद अदिति बाजपेयी के पति अतुल बाजपेयी ने लिखा है कि
मित्रों बेमन..दो चेहरों का बोझ न उठाया कीजिए, दिल न मिले तो हाथ भी न मिलाया कीजिए...अतुल एक पोस्ट और करते है जिसमें उन्होंने प्रियंका गांधी से मुलाकात तय होने की बात लिखी। उन्होंने लिखा कि 28 सितंबर को प्रियंका से मुलाकात तय है और अब अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी।
मेयर को सियासी माफिया से बचने की सलाह
दरअसल महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने 10 सदस्यीय एमआईसी का गठन किया है। जिसमें कांग्रेस के 26 पार्षदों में 4 पश्चिम विधानसभा, 3 पूर्व विधानसभा, एक पनागर और दो उत्तर मध्य विधानसभा से पार्षदों का चयन किया। एमआईसी में शामिल कई ऐसे चेहरे है, जो दागी है। उसके बाबजूद उनके नाम पर मुहर लगा दी गई। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए महापौर को सलाह दी गई कि वह सियासी दिग्गज माफिया से बचे। इशारा उनकी विधानसभा के ही बड़े नेता को लेकर है, जिनकी सलाह पर MIC के नाम फाइनल हुए।

आरोपों में घिरे पार्षदों को जिम्मेदारी
मेयर इन काउन्सिल में चयनित पार्षदों को लेकर भी कांग्रेस पर कीचड़ उछाला जा रहा है। गुलाम हुसैन को भी जगह दी गई है। कुछ कांग्रेसी तो खुलकर बोल रहे है और कुछ दबीं जुबान में आरोप लगा रहे है कि गुलाम दागी है। पिछले कार्यकाल में पार्षद रहते हुए गुलाम ने निर्माण कार्यों के नाम जमकर भ्रष्टाचार किया था। जिसके प्रमाण सार्वजनिक हुए फिर पुलिस में भी शिकायत की गई थी।

भोपाल में भी हल्ला, बढ़ेगा विरोध
जबलपुर में कांग्रेसियों के बीच आपसी मनमुटाव और गुटबाजी का किस्सा भोपाल तक पहुँच गया है। कई विरोधी तो पीसीसी चीफ कमलनाथ खेमे से ही आते है। बाबजूद उसके खुलकर विरोध हो रहा है। आने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से यह स्थिति पार्टी को कितना नुकसान पहुंचाएगी, यह ऊंचे उठ रहे विरोध के स्वर अभी से बताने लगे है। खबर है कि इस मामले में 25 अगस्त को होने वाली पार्टी फोरम की मीटिंग में बड़ा निर्णय हो सकता है।












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