Jabalpur News: दुश्मनों के छक्के छुड़ाएंगे मैंगो प्रोजेक्ट के टैंकभेदी बम, जबलपुर OFK में उत्पादन की तैयारी

Jabalpur News: हिन्दुस्तान की सेना के लिए एक से बढ़कर एक आयुध हथियार मुहैया कराने वाली जबलपुर की ऑर्डिनेंस खमरिया फैक्ट्री भी हैं। मैंगो प्रोजेक्ट के तहत 125 मिमी टैंकभेदी बमों का फिर निर्माण शुरू होगा। बेहद ताकतवर इन बमों के उत्पादन के लिए अब अलग बिल्डिंग का निर्माण हो रहा हैं।

जबलपुर की आयुध निर्माणी खमरिया फैक्ट्री में इस बिल्डिंग का विशेष तकनीक के साथ निर्माण कराया जा रहा हैं। इसके लिए फैक्ट्री प्रबंधन रशियन विशेषज्ञों से लगातार संपर्क में हैं। कुछ समय पहले मैंगो प्रोजेक्ट के तहत बमों का निर्माण शुरू तो हुआ था, लेकिन तकनीकी वजहों ने उत्पादन पर ब्रेक लगा दिया था।

ओएफके पीआरओ आरके कुम्हार ने बताया कि मैंगो प्रोजेक्ट के तहत बम निर्माण के लिए रूस के साथ टीओटी (ट्रांसफर आफ टेक्नालाजी) करार हैं। लिहाजा रशियन विशेषज्ञों की सलाह और तय मापदंडों के अनुरूप एक अलग बिल्डिंग निर्माण की जरुरत थी। इसका कार्य चल रहा हैं। उम्मीद है कि इस साल के अंत में बमों का निर्माण शुरू हो जाएगा।

Ordnance-Factory-Khamaria-in-jabalpur-Mango-Project

अलग बिल्डिंग की इसलिए पड़ी जरुरत
ओएफके प्रबंधन का कहना है कि अलग-अलग तरह के आयुध उत्पादन में सामग्री के हिसाब से निर्माण स्थल तैयार रखना होता हैं। कई चरणों में बनने वाले इन बमों के लिए तापमान का मेंटनेंस जरुरी हैं। इसके लिए विशेष तकनीक बिल्डिंग की आवश्यकता थी। विशेषज्ञों की सलाह के बाद बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। जो अंतिम चरण में हैं। तापमान के अनुकूल कार्य करने वाले कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया गया हैं।

बमों की यह है खासियत
आयुध निर्माणी विशेषज्ञ बताते हैं कि मैंगो प्रोजेक्ट के बमों का आधुनिक तकनीक से उत्पादन होता हैं। इनकी मारक क्षमता बड़े से बड़े टैंक और दूर स्थित बंकरों को तबाह करने की होती हैं। यह बम दो हिस्सों में बना होने की वजह से इसका पहला हिस्सा तेज गति से दुश्मनों के टैंक से टकराकर उसकी मोटी चादर को भेदता है और टैंक के अंदर पहुंचते ही बम का दूसरा हिस्सा जबर्दस्त विस्फोट कर टैंक के परखच्चे उड़ा देता है।

एक बम की इतनी है कीमत
रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर आयुध निर्माणी बोर्ड ने ओएफके को यह अत्याधुनिक गोला-बारूद बनाने (उत्पादन) की जवाबदारी सौंपी है। जबलपुर OFK में बनने वाले 125 मिमी एफएसएपीडीएस के एक नग की लागत चार लाख बीस हजार रुपये है। जानकारी के मुताबिक करीब सवा दो सौ करोड़ की लागत से बम के 5 हजार नग जल्द से जल्द बनाने यह निर्माणी तैयार है। अनुमान है इस काम के शुरू होने से OFK को औसतन 8 सौ करोड़ रुपये का काम अतिरिक्त मिलने लगेगा।

अब बंद नहीं होगा उत्पादन!
शक्तिशाली इन बमों के निर्माण के लिए निर्माणी के कर्मचारियों ने रशिया के इंजीनियरों से प्रशिक्षण भी हासिल किया हैं। 2019 में इन बमों का उत्पादन रोक दिया गया था। लेकिन एक बार फिर इस निर्माणी से उत्पादित होने वाले बम विदेशों की सेनाओं के बीच देश का मान बढ़ाएंगे। सूत्रों के मुताबिक रशिया और स्वीडन से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से मैंगो प्रोजेक्ट का काम रूक सा गया था। लेकिन नई बिल्डिंग में दोबारा शुरू होने वाला उत्पादन अब अनवरत जारी रहेगा।

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