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Jabalpur News: रेत खनन माफियाओं का नया पैटर्न, नदी में छलांग लगाने वाले गुर्गे, जबलपुर में माइनिंग टीम परेशान

एमपी के रेत के अवैध उत्खनन को रोकने पहुंच रही माइनिंग विभाग की टीम परेशान है। माफियाओं ने नया तरीका अपना लिया है और उनके गुर्गे पकड़ में नहीं आ रहे।

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New pattern of sand mining mafia: मध्य प्रदेश में रेत का अवैध उत्खनन रोकने तमाम कोशिशे की जा रही हैं, लेकिन माफियाओं ने बचने के लिए अब नया पैटर्न अख्तियार कर लिया हैं। जबलपुर में नर्मदा समेत आसपास की नदियों में चल रहे इस कारोबार में ऐसे लोगों को रखा जा रहा हैं, जो तेज बहाव में भी छलांग लगाने में माहिर हो। साथ ही कई फीट गहराई में तैरते हुए नदी के दूसरे छोर निकलना जानते हो। इस वजह से मौके पर कार्रवाई करने पहुंच रही माइनिंग टीम परेशान है। आरोपियों को पकड़ने में पसीने छूट रहे हैं।

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एमपी में नर्मदा समेत कई नदियों में लुके-छिपे तरीके से रेत का अवैध उत्खनन जारी हैं। खनन माफियाओं की सेहत पर माइनिंग डिपार्टमेंट की सख्ती का कोई फर्क नहीं पड़ रहा। नदी के घाट से लेकर उनके ठिकाने तक धंधा धड़ल्ले से जारी है। उत्खनन के दौरान पकड़े न जाए, इससे बचने अब पुराने तरीके को और एडवांस बना लिया है। नदी के जिस हिस्से से अवैध रेत निकालने का प्लान होता है, उसमें माफिया तीन कैटेगिरी में अपनी टीम तैनात कर रहे है। जानकारी के मुताबिक नदी तक पहुंचने वाले सभी रास्तों पर दो-दो गुर्गे खनिज टीम की दबिश पर नजर रखने तैनात कर दिए जाते हैं। दूसरी टीम के कुछ सदस्य किश्ती और मोटर वोट पर रहते मोबाइल से लैस रहते हैं। जिनको पहली टीम के मेंबर, दूसरी टीम के सदस्यों को यह सूचना देते है कि माइनिंग टीम कार्रवाई करने आ रही है। तीसरी टीम के सदस्यों की जिम्मेदारी रेत निकालने की होती हैं। जिनको हर पल से अपडेट किया जाता है।

जबलपुर जिले के खनिज निरीक्षक सतीश मिश्रा ने बताया कि नर्मदा समेत अन्य नदी के घाटों पर जब दबिश दी तो अवैध खनन करने वाले नदी में छलांग लगाकर भाग गए। अब इस अवैध कारोबार में माफिया, रेत निकालने वाले ट्रेंड तैराकों को रख रहे हैं। जो तेज बहाव और गहराई में तैरकर दूसरे छोर पर निकलना जानते हो। आलम यह है कि मोटर वोट की मदद से भी आरोपी पकड़ में नहीं आ रहे। पानी की गहराई में किस दिशा में बचकर कहाँ निकल जाते है। पता ही नहीं लग पाता। खनिज विभाग के पास ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए गोतोखोरों के रूप में संसाधन भी नहीं हैं। लिहाजा अब कार्रवाई करना चुनौती बनता जा रहा है।

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