दिल्ली के रामलीला मैदान में गरजेंगे MP के किसान, जीएम सरसों का विरोध MSP तय करने की मांग
19 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बार फिर किसानों की रैली होने जा रही जा रही हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर समेत कई इलाकों के किसान जुटेंगे, जिसमें भारतीय किसान संघ के बैनर तले कई मांगों को लेकर आवाज बुलंद की जाएगी
एमपी में अगले साल विधानसभा चुनाव है और सियासी दल तैयारियों का खाका तैयार करने में जुटे हैं। इसी बीच प्रदेश के किसानों अपने हक़ की लड़ाई के लिए एक बार फिर आवाज बुलंद कर रहे हैं। अपनी मेहनत के वाजिब हक़ के लिए भारतीय किसान संघ के बैनर तले राजधानी दिल्ली से हुंकार भरने की तैयारी है। 19 दिसंबर को रामलीला मैदान में जुटने वाले किसानों की एमएसपी, जीएम सरसों की खेती की खिलाफत समेत कई मांगे हैं।

करीब 11 महीने बाद अगले साल मप्र में होने वाले विधानसभा चुनाव के ढोल नगाड़े गूंजेंगे, उससे पहले प्रदेश के किसानों की आवाज गूंजना शुरू हो गई हैं। जिसकी वजह उनके खेती में लागत के हिसाब से वाजिब हक़ न मिलना है। महाकौशल, बुंदेलखंड समेत प्रदेश के जिन इलाकों में कृषि उत्पादन से सरकार अपना सिर ऊंचा किए है, वहां के किसान सरकारी उपेक्षा से खफा है। भारतीय किसान संघ अब अपने हक़ की लड़ाई के लिए राजधानी दिल्ली पहुंचेगा। जहां 19 दिसंबर को किसान गर्जना रैली का ऐलान किया है। संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद चौधरी का कहना है कि किसान जिन फसलों का उत्पादन कर रहे है, उसकी लागत के हिसाब से एमएसपी नहीं मिल रहा है। पहले के मुकाबले लागत में बढ़ोत्तरी होती जा रही है, जिस पर सरकार भी ध्यान नहीं दे रही। जबकि बड़े-बड़े मंचो से वादे किए जाते रहे है कि किसानों का हक़ नहीं मारा जाएगा।
किसान संगठन का यह भी कहना है कि अन्य कारोबारियों की तरह कृषि क्षेत्र से जुड़े किसानों को सरकार 50 फीसदी लाभांश के आधार पर MSP तय की जाए। साथ ही कृषि उपकरणों समेत अन्य कृषि सामग्री पर GST ख़त्म किया जाए। इसके अलावा जेनेटिकिली माडीफाइड सरसों यानि जीएम सरसों की उत्पादन नीति पर चल रहे विचार को अमल में नहीं लाए जाया जेनेटिकिली माडीफाइड सरसों किसानों ने बताया कि यदि जीएम सरसों की खेती हुई तो देश में पारंपरिक सरसों का उत्पादन करने वाले किसानों का बड़े स्तर पर नुकसान होगा। देश में इसकी लॉन्चिंग किसी कीमत में नहीं होने दी जाएगी।












Click it and Unblock the Notifications