Jabalpur News: 'जो देख नहीं सकते,उनको देखने की कब मिलेगी फुर्सत'? पढ़ाई छोड़ कड़ाके की ठंड में धरने पर दिव्यांग
Jabalpur News: उनको एक तो कुदरत ने इस काबिल नहीं बनाया कि वो अच्छे दुनिया देख सकें, ऊपर से देखने की हैसियत रखने वाले इनकी अनदेखी कर रही हैं। ताजा मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर के दृष्टि बाधित स्कूल और हॉस्टल का है।
शहर और दूर-दराज से यहां आकर नई जिंदगी की उम्मीद की किरण यहां भी धुंधली नजर आ रही हैं। वर्षों से ये पढ़ रहे स्टूडेंट्स बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। लेकिन इनका आरोप है कि जिम्मेदारों की कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। स्कूल में न तो व्यवस्थित पढ़ाई का इंतजाम है और न ही हॉस्टल में रहने की समुचित व्यवस्थाएं।
बदनसीबी के दिन गुजार रहे इस स्कूल के छात्र पढ़ाई छोड़ अब धरने पर बैठ गए हैं। प्रणालीगत मुद्दों के सहारे कड़ाके की ठंड में ये अपनी आवाज बुलंद कर रहे है कि कम से कम सूबे के नए सीएम ही सुध ले लें। छात्र रत्नेश यादव ने बताया कि न तो स्कूल प्रबंधन और न ही स्थानीय प्रशासन इनकी मांगों को सुनने तैयार नहीं। ठंड में भी किसी का दिल नहीं पसीज रहा।

छात्र शहजाद रजा ने बताया कि स्कूल की बिल्डिंग कई जगह से जर्जर है। कैंपस में ही छात्रावास है तो उसके भी ऐसी ही हालत है। एक दिन गुजरता है तो दूसरे दिन उठते ही चिंता सताने लगती है कि बिना खतरे के दिनभर कैसे निकलेगा। स्कूल में जो दूसरी बदइंतजामिया है सो अलग।
इस सिलसिले में दृष्टिबाधित हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य सुरेश यादव से जब फोन पर बात की तो उन्होंने आउट ऑफ़ स्टेशन होना बताया। प्रभारी प्रिंसिपल शिव शंकर कपूर का कहना है कि छात्रों की समस्त मांगों के बारे ने शासन को अवगत कराया गया हैं, जल्द ही समस्याओं का निराकरण कराया जाएगा। उधर आयुक्त निशक्तजन संदीप रजक से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन अभी तक उनकी कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी।
इन 8 प्वाइंट में समझे दृष्टिबाधित छात्रों की समस्याएं-
1. विद्यालय/छात्रावास भवन क्र० 01.02.03 व 04 काफी जर्जर हो चुकी है इससे पहले कोई अन्होनी घटना घटे इसके पूर्व भवनों का रिपेरिंग कार्य कराया जावे तथा जो रिपेरिंग योग्य न हो उन्हें इसी जगह पर नवनिर्माण कराया जावे।
2. संगीत कक्ष में अध्ययन कार्य हेतु उपयोग में लाई जा रही सामग्री जो कि खराब है उनकी रिपेयरिंग कराई जाए। जो सामग्री रिपेरिंग नहीं की जा सकती उनके जगह नई सामग्री क्रय की जाए।
3. कक्षा पहली से सातवीं तक के छात्रों हेतु संगीत शिक्षक उपलब्ध नहीं है जो उपलब्ध कराये जावे तथा कक्षा पहली से कक्षा 12वीं तक की कक्षाओं हेतु नियमित शिक्षक की आवश्यकता है जिससे की हम छात्रों के संगीत विषय का शिक्षण कार्य सुचारू रूप से हो सके।
4. विद्यालय के कम्प्यूटर प्रशिक्षक द्वारा कार्यालयीन कार्य लिया जाता है जिससे हम छात्रों को कम्प्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त करने में असुविधा होती है कम्प्यूटर प्रशिक्षण हेतु नियमित कम्प्यूटर प्रशिक्षक उपलब्ध कराया जावे जिससे हम छात्रों का कम्प्यूटर प्रशिक्षण सुचारू रूप से सम्पन्न हो सके।
5. विगत कई वर्षों से विद्यालय में नियमित अंग्रेजी विषय शिक्षक न होने के कारण हमारा अंग्रेजी विषय का अध्यापन कार्य प्रभावित होता है जिससे काफी परेशानियों का सामना करना पडता है। विषय अंग्रेजी हेतु नियमित शिक्षक की व्यवस्था की जावे। विद्यालय में नियमित खेल प्रशिक्षक की व्यवस्था की जावे।
6. लेखन कार्य हेतु ब्रेल स्लेट कम मात्रा में होने के कारण लेखन कार्य हेतु असुविधा हो रही है जिसको ध्यान रखते हुए लेखन कार्य हेतु ब्रेल स्लेट उपलब्ध कराई जाए।
7. विद्यालय के खेल मैदान की स्थिति अच्छी नहीं है जिससे हम छात्रों को खेलने में असुविधा होती है जिसे समतलीकरण कराया जावें। सभी शिक्षक अपना पाठ्यक्रम समय पर करावे किसी कारणवश यदि पाठ्यक्रम छूट गया है तो उन्हें पाठ्यक्रम पूर्ण किये जाने हेतु अतिरिक्त कक्षा लगाकर कराये जाने के लिये निर्देशित किया जाए।
8. विद्यालय में जो परीक्षाएं लेखक उपलब्ध कराकर कराई जाती है, उन्हें दिये जाने वाली लेखक फीस की राशि 50 रूपये अत्यधिक कम है जिसे बढ़ाया जावे। क्योंकि इतनी कम राशि में कोई भी लेखक लेखन कार्य करने हेतु तैयार नहीं होता है।












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