हवाई जहाज के जमाने में MP जबलपुर का एक ऐसा गांव, 5 साल की Voting का करता है बेसब्री से इंतजार, शायद इसलिए

Jabalpur News: लोकतंत्र के महायज्ञ में आहुति देने के लिए मध्य प्रदेश की आवाम तैयार हैं। जो 2023 में बनने वाली नई सत्ता की साक्षी बनेगी। जब चांद-सूरज की सतह पर पहुंचने की चर्चा के बीच जबलपुर का एक गांव हर चुनाव में सुर्ख़ियों में रहता है। क्योकि यहां के लोग 5 साल में ही सिर्फ एक बार किसी बाहरी व्यक्ति को देखते हैं।

महानगर के रास्ते पर रफ़्तार पकड़ते शहरों के सामने जितना छोटा यह गांव है, उससे गुना ज्यादा उम्मीदों के साथ यहां गिनती के 262 मतदाता, मतदान करने का इंतजार करते हैं। यह तमन्ना भी बड़ी कठिनाई से पूरी होती हैं।

क्योकि कठौतिया नाम का यह गांव जबलपुर के बरगी बांध के डूब क्षेत्र में हैं। नर्मदा की लहरों के बीच से गुजरते हुए मतदान दल यहां बड़ी मुश्किल से पहुंचता हैं। मोटरबोट के सहारे इस विधानसभा चुनाव के मतदान के लिए भी जब दल यहां पहुंचा तो ग्रामीण खुशी से झूम उठे।

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मतदान करने के साथ इन ग्रामीणों की खुशी में चार चांद इसलिए भी लग जाते है, क्योकि पहुंचने का आसान साधन न होने से यहां कभी कोई नहीं आता। या तो चुनाव कराने मतदान दल या फिर चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी ही आते हैं। वो भी सिर्फ एक बार।

रानी अवंती बाई सागर परियोजना जिसे बरगी बांध के नाम से जाना जाता है उसके बैक वाटर यानी संग्रहित पानी के बीच ही यह गांव एक टापू पर बसा है, इस गांव की कुल जनसंख्या 326 है जिसमें 148 महिलाएं और 178 पुरुष है। 132 साक्षर नागरिक है और साक्षरता 40% है, कठौतिया गांव में कुल 80 घर बने हुए हैं जो कच्चे पक्के दोनों ही है।

आने-जाने का सिर्फ एक ही साधन
इस गांव में जाने का एक ही साधन है हाथ से चलने वाली चप्पू वाली नाव , शहरी घाट से कठौतिया तक जाने में लगभग 1 घंटे तक नाव चलानी पड़ती है इसलिए किसी भी दल के नेता चुनाव के अलावा कभी भी इस गांव में नहीं आते हैं। इस गांव के बहुत बुरे हाल है, क्योंकि पढ़ने के लिए बच्चों के पास स्कूल नहीं है गांव की स्कूल सिर्फ आठवीं क्लास तक है। यदि उसके बाद बच्चे पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें बरगी नगर जाना पड़ता है , इसके लिए 1 घंटे में 6 किलोमीटर नाव चलानी पड़ती है और वापस आते समय भी 6 किलोमीटर नाव चलानी पड़ती है।

इस बार मतदान दल के साथ रवाना हुए पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार यादव ने बताया ठंड और बारिश में नाव चलाना बहुत कठिन होता है, इसलिए बहुत से बच्चे आठवीं तक ही पढ़ते हैं। नाव चलाने के लिए बारिश का मौसम सबसे खतरनाक होता है। क्योंकि बीच रास्ते में कभी भी जोरदार तूफान और बारिश आ जाती है, जिस से नाव डूबने का खतरा रहता है , तब कोई भी रास्ता नहीं होता अपनी जान बचाने का इसलिए इस गांव के लोग सिर्फ गर्मी या ठंड के सुबह ही अपनी आवश्यक कार्यों के लिए बरगी नगर की ओर जाते हैं। इतनी परेशानियों के बावजूद भी आज तक यहां के लोग मतदान करना ही सबसे धर्म-पूजा मानते हैं। एक तरह से उत्सवी माहौल में यहां के लोग मतदान के लिए घर से निकलते हैं।

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