Dussehra 2022: रावण जितना ‘ऊंचा और स्मार्ट’, उतना ही महंगा, GST के साथ थोड़े सस्ते जलेंगे ‘मेघनाथ कुंभकरण’

जबलपुर, 03 अक्टूबर: खूब कहते हुए सुना कि महंगाई का 'रावण' कब जलेगा? बुराई का प्रतीक माने जाने वाले रावण दशहरे में इस बार भी जलने के लिए तैयार हो चुके है। जहां जितना ऊंचा रावण के पुतले का कद और उसकी खूबसूरती, उतना ही महंगा है। इनको बनाने वाले कारीगर बताते है कि निर्माण में लगने वाली सामग्री पहले के मुकाबले महंगी होने के साथ उस पर 18 फीसदी जीएसटी की मार है। मेघनाथ, कुंभकरण के पुतले रावण से छोटे होते है, तो लागत भी कम है। एक तरह से महंगाई ने रामलीला समितियों का बजट बिगाड़ दिया है, फिर रावण तो जलेगा ही, भले ही महंगा क्यों ना हो?

रावण के बाजार में गर्माती महंगाई

रावण के बाजार में गर्माती महंगाई

देश के प्रमुख त्योहारों में दशहरा भी है। बुराई पर अच्छाई की विजय प्रतीक इस पर्व पर रावण के पुतले जलाने की परंपरा है। धूं-धूंकर जलते हुए रावण समाज में अन्याय के खिलाफ लड़ाई का संदेश देते है। प्रतीक स्वरुप संदेश परंपरा के यह आयोजन महंगे होते जा रहे है। हर शहर में रावण जलाया जाता है, लेकिन इस बार इसके लिए बनने वाले रावण के पुतलों के बाजार पर महंगाई का कुछ ज्यादा ही असर देखने को मिल रहा है।

रावण की स्मार्टनेस और ऊंचाई पर भी बढ़े दाम

रावण की स्मार्टनेस और ऊंचाई पर भी बढ़े दाम

अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग कद काठी के रावण जलाए जाते है। कुछ जगहों पर हर साल रावण के पुतलों का कद बढ़ाया जाता है। एमपी के जबलपुर में ऐतिहासिक पंजाबी दशहरे में इस बार 61 फीट ऊंचे रावण का दहन किया गया। पिछले साल इसकी ऊंचाई 55 फीट थी। इसी तरह भोपाल, इंदौर में भी कई जगहों पर पिछले साल के मुकाबले इस बार रावण की ऊंचाई बढ़ाने गई है। पुतलों आकर्षक लुक देने के लिए उन्हें ख़ास अंदाज में सजाया गया है। जिसकी वजह से लागत भी बढ़ी।

कच्चे मटेरियल में लगभग 50 फीसदी दामों का इजाफा

कच्चे मटेरियल में लगभग 50 फीसदी दामों का इजाफा

संस्कारधानी जबलपुर का दशहरा देश के मैसूर और कलकत्ता की तर्ज भी मनाया जाता है। कई दशकों से रावण के पुतले बनाने का काम करने वाले चंद्रेश और देवेश बताते है कि पहले 20 से 30 फीट रावण और 20 से 25 फीट मेघनाथ, कुंभकरण के पुतले बनाने में बीस हजार रुपए का खर्च आता था। उसकी आज कीमत 30 से 35 हजार रुपए हो गई है। बांस, सुतली, रद्दी अखबार, रंगीन कागज, कलर पेंट और आतिशबाजी का सामान लगता है। बांस में 5 फीसदी, रंगीन कागज और कलर पेंट में जीएसटी 12 से 18 प्रतिशत हो गया। इसके साथ ही लेबर कास्ट भी बढ़ने से रावण के पुतले खर्चीले हो गए।

मेघनाथ, कुंभकरण का कम कद, सादे सिंपल

मेघनाथ, कुंभकरण का कम कद, सादे सिंपल

मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों की हाईट रावण से कम रखी जाती है। रावण के मुकाबले इनकी सजावट भी सामान्य रहती है। लिहाजा कम लेबर और सामान में यह तैयार हो जाते हैं। तो जितने खर्च में अकेला एक रावण का पुतला तैयार होता है, उतने खर्च में मेघनाथ और कुंभकरण दोनों पुतले बन जाते है।

अकेले जबलपुर में जलते है करीब 20 रावण

अकेले जबलपुर में जलते है करीब 20 रावण

एमपी के जबलपुर का दशहरा कई मायनों में ख़ास है। पहली बात तो यहां 4 दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर दशहरा जुलूस निकलता है। दूसरी बात जिले भर में शहर और ग्रामीण क्षेत्र मिलाकर लगभग 20 रावण जलाए जाते है। इसके रामलीला और दशहरा आयोजन समितियां महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर देती है। मुख्य रूप से पंजाबी और मुख्य दशहरा चल समारोह देखने मप्र ही नहीं दूसरे राज्यों से लोग पहुंचते है। जहां धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक छटा के एक साथ अद्भुत कई रंग कहीं और देखने को नहीं मिलते।

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