MP News Jabalpur: मूसलाधार बारिश का कहर, कलेक्टर दीपक सक्सेना ने लिया बड़ा फैसला, स्कूलों में अवकाश घोषित
MP News Jabalpur: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में पिछले 48 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियां उफान पर हैं, सड़कें जलमग्न हैं, और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट के मद्देनजर जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने तत्काल प्रभाव से बड़ा फैसला लिया है।
बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, कलेक्टर ने 7 और 8 जुलाई 2025 को जिले के सभी शासकीय और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। यह निर्णय शहर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण उत्पन्न खतरनाक स्थिति को देखते हुए लिया गया है।

बारिश का कहर: नदियां उफान पर, सड़कें जलमग्न
जबलपुर में पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर को तर-बतर कर दिया है। नर्मदा नदी सहित कई छोटी-बड़ी नदियां और नाले खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं। शहर के निचले इलाकों जैसे चेरीताल, शिवनगर, रामनगर, शुक्ला नगर, धन्वंतरी नगर, और विजयनगर में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। ओमती नाला और बेलबाग के कंजर मोहल्ला जैसे क्षेत्रों में सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं, जिसके कारण आवागमन ठप हो गया है।
मौसम विभाग के अनुसार, एक सक्रिय मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण जबलपुर सहित महाकौशल क्षेत्र में अगले 24 से 48 घंटों तक भारी से अति भारी बारिश की संभावना है। शनिवार को जिले में 32 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में तीन गुना अधिक है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों में 8 इंच तक बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
कलेक्टर का त्वरित निर्णय: स्कूलों में अवकाश
मौसम विभाग के रेड अलर्ट और बारिश के कारण उत्पन्न जोखिम को देखते हुए, जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने तत्काल कार्रवाई की। रविवार, 6 जुलाई 2025 को देर शाम जारी एक आदेश में, कलेक्टर ने जिले के सभी शासकीय और निजी स्कूलों में 7 और 8 जुलाई को अवकाश घोषित कर दिया। इस फैसले का उद्देश्य बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, क्योंकि भारी बारिश और जलभराव ने स्कूल बसों और अन्य परिवहन साधनों के लिए सड़कों को असुरक्षित बना दिया है।

कलेक्टर सक्सेना ने कहा, "बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम विभाग की चेतावनी और वर्तमान स्थिति को देखते हुए, हम कोई जोखिम नहीं ले सकते। स्कूलों में अवकाश का यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है, और हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।" उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नालों के पास न जाएं।
जनता की मांग: "हमें चाहिए स्थायी समाधान"
जबलपुर में बारिश ने न केवल स्कूलों को प्रभावित किया है, बल्कि आम जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता इस बात से नाराज हैं कि हर साल बारिश के मौसम में जलभराव और बाढ़ की समस्या दोहराई जाती है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
रामनगर के निवासी अजय मिश्रा ने कहा, "हर साल बारिश में हमारा मोहल्ला डूब जाता है। नालों की सफाई समय पर नहीं होती, और सड़कों के गड्ढों ने हालात और खराब कर दिए हैं। प्रशासन को केवल स्कूल बंद करने से काम नहीं चलेगा, हमें स्थायी समाधान चाहिए।"
इसी तरह, चेरीताल की रहने वाली राधा बाई ने बताया, "मेरे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, क्योंकि रास्ते में पानी भरा है। स्कूल बंद करना अच्छा कदम है, लेकिन प्रशासन को जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।"
मौसम विभाग की चेतावनी: रेड अलर्ट का मतलब
मौसम विभाग ने जबलपुर सहित मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, और कटनी जैसे महाकौशल के जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। रेड अलर्ट का मतलब है कि अति भारी बारिश (204.4 मिमी से अधिक) की संभावना है, जिसके साथ बिजली चमकने, तेज हवाएं (30-50 किमी प्रति घंटा), और भूस्खलन का खतरा हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिक दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, "वर्तमान में एक मानसून ट्रफ बीकानेर और जयपुर से होते हुए मध्य प्रदेश के दतिया और सीधी तक फैली हुई है। इसके साथ ही एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन मध्य प्रदेश के ऊपर सक्रिय है, जो भारी बारिश का कारण बन रहा है। जबलपुर और आसपास के जिलों में अगले दो दिनों तक मौसम ऐसा ही रहेगा।"
विभाग ने लोगों को नदी-नालों और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। किसानों को भी सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि उनकी फसलें पानी में डूबने से बच सकें। खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने और केवल मानसून के अनुकूल फसलों जैसे धान, मक्का, और बाजरा की बुवाई करने की सलाह दी गई है।
प्रशासन की तैयारियां: कितनी कारगर?
जबलपुर नगर निगम ने बारिश से पहले नालों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था का दावा किया था, लेकिन शुरुआती बारिश ने ही इन तैयारियों की पोल खोल दी। पुलिस लाइन और कई सरकारी स्कूलों में छत टपकने की खबरें सामने आई हैं, जिसके कारण बच्चों को एक ही कक्षा में बैठाना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता अजय ठाकुर ने कहा, "नगर निगम हर साल लाखों रुपये नालों की सफाई पर खर्च करने का दावा करता है, लेकिन हर बारिश में सड़कें और गलियां डूब जाती हैं। यह प्रशासन की लापरवाही का सबूत है।"
कलेक्टर सक्सेना ने स्थिति पर नजर रखने के लिए एक आपदा प्रबंधन टीम गठित की है, जो प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही है। उन्होंने कहा, "हमारी टीमें 24 घंटे काम कर रही हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों में पंप लगाए गए हैं, और नालों की सफाई तेजी से की जा रही है। हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि जनता को कम से कम असुविधा हो।"
अन्य जिलों में भी स्थिति गंभीर
जबलपुर के अलावा, मंडला और डिंडोरी जैसे पड़ोसी जिलों में भी भारी बारिश ने कहर बरपाया है। मंडला और डिंडोरी में भी स्कूलों में 5 जुलाई तक अवकाश घोषित किया गया था, और अब जबलपुर में भी यह फैसला लिया गया है। नर्मदा नदी के बढ़ते जलस्तर ने कई हाईवे को बंद कर दिया है, जिससे जबलपुर-डिंडोरी मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।












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