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MP News: जबलपुर में बस पर बवाल, VHP-बजरंग दल ने रोका, थाने में मारपीट, धर्मांतरण या तीर्थ यात्रा, जानिए सच

Jabalpur News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में सोमवार, 31 मार्च 2025 को उस वक्त हंगामा मच गया, जब विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक यात्री बस को बीच सड़क पर रोककर हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू कर दिया। मामला भंवरताल पार्क से शुरू हुआ और रांझी थाने तक जा पहुंचा।

संगठनों का दावा है कि बस में मंडला के महाराजपुर से लाए गए आदिवासी लोगों को चोरी-छिपे धर्म परिवर्तन के लिए ले जाया जा रहा था। लेकिन बस में सवार यात्रियों ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, "हम अपनी मर्जी से चर्च की तीर्थ यात्रा पर निकले थे।" इस बीच, थाने में मारपीट और पुलिस से बहस ने इस घटना को और सनसनीखेज बना दिया।

Chaos on a bus in Jabalpur VHP-Bajrang Dal stopped it conversion or pilgrimage

बस रोककर शुरू हुआ तमाशा

सुबह करीब 8:30 बजे VHP को सूचना मिली कि मंडला से दो बसें संदिग्ध तरीके से जबलपुर आ रही हैं। संगठन के कार्यकर्ता तुरंत हरकत में आए और भंवरताल पार्क के पास एक बस को रोक लिया। दूसरी बस मौके से निकल भागी, लेकिन पहली बस का ड्राइवर भी भागने की कोशिश में जुट गया। कार्यकर्ताओं ने उसका पीछा किया और रांझी इलाके में उसे दबोच लिया। बस में करीब 50 लोग सवार थे, जिन्हें संगठन ने "धर्मांतरण का शिकार" बताते हुए सीधे रांझी थाने पहुंचा दिया। वहां से शुरू हुआ पूछताछ का सिलसिला, जो जल्द ही गहमागहमी में बदल गया।

यात्रियों का जवाब: "हम तो तीर्थ यात्रा पर थे!"

बस में सवार एक युवती ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई, जो संगठन के दावों से बिल्कुल उलट थी। उसने कहा, "हम लोग अपनी मर्जी से तीर्थ यात्रा पर निकले थे। बस हमें भंवरताल और रांझी के चर्च ले जा रही थी। अचानक कुछ अंकल आए, हमें रोका और थाने ले आए। वे कह रहे हैं कि हमें बहकाया गया, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। हमने 500-500 रुपये किराया देकर खुद ये यात्रा प्लान की थी।" अन्य यात्रियों ने भी यही बात दोहराई और कहा कि वे ईस्टर से पहले चर्चों के दर्शन के लिए निकले थे।

VHP का दावा: "आईडी में क्रिश्चियन नहीं, तो धर्मांतरण पक्का"

विश्व हिंदू परिषद के सदस्य संजय तिवारी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा, "अगर ये लोग क्रिश्चियन हैं, तो उनकी आईडी में भी यही दर्ज होना चाहिए। लेकिन इनके आधार कार्ड में तो आदिवासी लिखा है। हमें शक है कि इन्हें बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन के लिए ले जाया जा रहा था।" तिवारी ने बताया कि सुबह सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे थे, जहां दो बसें दिखीं। एक बस भाग निकली, लेकिन दूसरी को रोककर वे थाने ले आए। संगठन का आरोप है कि यह सब एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।

थाने में मारपीट और पुलिस से तकरार

हंगामा यहीं खत्म नहीं हुआ। बस यात्रियों से मिलने थाने पहुंचे दो लोगों पर VHP और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हमला बोल दिया। उनका आरोप था कि ये लोग ही आदिवासियों को धर्मांतरण के लिए उकसा रहे थे। थाने के अंदर मारपीट की नौबत आ गई, जिसके बाद पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। इस दौरान कार्यकर्ताओं की पुलिस से भी तीखी बहस हुई। एक कार्यकर्ता ने कहा, "पुलिस इन लोगों को छोड़ने की तैयारी में है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।" स्थिति को काबू में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।

पुलिस का पक्ष: "तीर्थ यात्रा थी, जबरदस्ती की बात नहीं"

रांझी थाना प्रभारी मानस द्विवेदी ने मामले को सुलझाने की कोशिश करते हुए बताया, "बस में सवार सभी लोग मंडला के महाराजपुर के निवासी हैं और वहां के चर्च से जुड़े हैं। ये लोग ईस्टर से पहले तीर्थ यात्रा पर निकले थे। उनका प्लान भंवरताल गार्डन के चर्च, रांझी चर्च और फिर सदर होते हुए वापस लौटने का था।" उन्होंने कहा कि संगठनों ने धर्मांतरण का शक जताया है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि इन लोगों को जबरदस्ती लाया गया। पुलिस ने मंडला की टीम से संपर्क किया है और यात्रियों की पहचान व बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

दोनों तरफ से दावे, जांच में जुटी पुलिस
यह घटना अब जबलपुर में चर्चा का विषय बन गई है। एक तरफ VHP और बजरंग दल इसे धर्मांतरण की साजिश बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ यात्री इसे अपनी आस्था और मर्जी का मामला कह रहे हैं। बस ड्राइवर से भी पूछताछ की जा रही है, जो दावा कर रहा है कि उसने सिर्फ किराए पर बस चलाई थी। थाना प्रभारी ने कहा, "हम हर पहलू की जांच कर रहे हैं। यात्रियों के दस्तावेज, चर्च के रिकॉर्ड और संगठनों के आरोपों की पड़ताल की जाएगी। सच जल्द सामने आ जाएगा।"

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी है। कुछ लोग VHP के कदम को सही ठहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि "धर्मांतरण के खिलाफ सख्ती जरूरी है।" वहीं, कुछ ने इसे "हिंदुत्व का उन्माद" बताते हुए सवाल उठाया कि "अगर लोग अपनी मर्जी से जा रहे थे, तो उन्हें रोकने का हक किसे है?" यह मामला अब धार्मिक भावनाओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच की बहस को और गर्म कर सकता है।

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