Board Exam 2023: परीक्षा का ये कैसा डर, जान देने मजबूर स्टूडेंट, जबलपुर में सामने आया केस, एक्सपर्ट की सलाह
स्कूल-कॉलेज की परीक्षाओं का मौसम आ गया हैं। जरुरी है कि एग्जामफोबिया के शिकार स्टूडेंट्स पर पैरेंट्स का फोकस रहे। यह एक्सपर्ट्स की सलाह हैं। जबलपुर में 12वीं की एक छात्रा का ऐसा ही केस आया, जिसने मौत को गले लगा लिया।

Board Exam anxiety: जिस सीढ़ी से वो जिंदगी की इमारत पर चढ़ना सीख रही थी, डरकर उसने उसी सीढ़ी से मौत को गले लगा लिया। यह जानते हुए कि स्कूल के इंतिहान से लंबा जिंदगी का इंतिहान है। असफलता भी मजबूत तरक्की के रास्ते पर ले जाती हैं। इसके बावजूद मध्य प्रदेश के जबलपुर की 17 साल की छात्रा ने मौत का रास्ता चुना। मेहनतकश मजदूर परिवार के मां-बाप के लिए अब सिर्फ कुशाग्र बुद्धि की बेटी की यादें ही जिंदा हैं। परीक्षाओं के पहले और बाद में बढ़ते ऐसे मामलों को एक्सपर्ट कई नजरिए से देखते है। उनका कहना है कि ऐसे केस को टालने में पैरेंट्स बड़ा रोल अदा कर सकते हैं।

12वीं क्लास की छात्रा ने लगाया मौत को गले
मध्य प्रदेश में 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं अभी शुरू भी नहीं हुई कि जबलपुर से एक बुरी खबर ने सभी को झकझोर दिया। शहर के घमापुर इलाके की 12वीं क्लास में पढ़ने वाली 17 साल की छात्रा ने ख़ुदकुशी कर ली। मृतका रामकृष्ण स्कूल में पढ़ती थी। घर के दूसरी मंजिल के कमरे में उसने पंखे से फांसी लगा ली। बताया गया कि वह रात को खाना खाने के बाद सोने के लिए चली गई थी।

पिता करते है मजदूरी
घमापुर पुलिस के मुताबिक मृतका के पिता मजदूरी करते है। घटना के बारे में बताया गया कि छात्रा की मां अपने मायके गई हुई थी। उसके पिता और एक बहन नीचे बेसमेंट में थे। सभी ने खाना खाया और सोने चले गए। अगली सुबह जब देर तक जब छात्रा ऊपर के कमरे से नीचे नहीं आई तो पिता ने जाकर देखा कि चुनरी के फंदे में छात्रा पंखे से लटकी हुई थी। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि बेटी इस तरह का कभी कदम उठा सकती है, यह सपने में भी कल्पना नहीं की थी। उन्होंने उसके लिए कई अरमान संजोए रखे थे। लेकिन एक पल में सब धराशाही हो गए।

सुसाइड नोट में लिखा- मम्मी पापा आई लव यू
घमापुर टीआई ने बताया कि घटना स्थल वाले कमरे से छात्रा का एक नोट बरामद हुआ है। जिसमें उसने अपने मम्मी-पापा 'आई लव यू' लिखा हैं। साथ ही यह भी लिखा वह छोड़कर जा रही है, माफ़ करना। वहीं माता-पिता ने पुलिस को बयान दिया कि बीते कुछ दिनों से 12वीं के बोर्ड एग्जाम को लेकर चिंतित थी। वह बार-बार कहती थी कि उसकी तैयारी नहीं है, वह परीक्षा में फेल हो जाएगी। 11वीं तक वह अच्छे नंबरों से पास होती आई और साइंस सब्जेक्ट से हायर सेकण्डरी करने की उसकी इच्छा थी।

ऐसे बढ़ते मामलों में एक्सपर्ट ने बताई ये वजहें
जबलपुर की मनोवैज्ञानिक डॉ. अवंतिका वर्मा कहती है कि स्कूल-कॉलेज एग्जाम एक दौरान कई बच्चे डिप्रेशन में चले जाते है। इस केस को जोड़ते हुए उन्होंने बताया कि पढ़ाई में होशियार और बहुत कमजोर बच्चों में इस तरह की सुसाइडियल कंडीशन बढ़ रही थी। होशियार बच्चों में सेल्फ इमेज का फैक्टर होता हैं, उन्हें लगता है कि यदि अनसक्सेस रहे तो लोग क्या कहेंगे? जो पढ़ाई में वीक होते हैं, उनमें भी पर्सनलिटी प्रॉब्लम क्रिएट हो जाती है और डिप्रेशन बढ़ जाता है। एवरेज स्टूडेंट्स में खुद को हैंडिल करने की क्वालिटी डेवलेप हो जाती हैं। इस मामले में छात्रा द्वारा उठाए कदम के पीछे सेल्फ अवेयरनेस को वजह माना जा सकता है।

पैरेंट्स के लिए एक्सपर्ट की ये है सलाह
डॉ. अवंतिका वर्मा कहती है कि स्टूडेंट्स में ख़ुदकुशी की बढ़ती ऐसी प्रवत्ति के पीछे काफी हद तक पैरेंट्स की काउंसलिंग भी जिम्मेदार हैं। कोशिश होना चाहिए कि शांत स्वाभाव और अपनी बात शेयर न करने वाले इंट्रोवर्ट बच्चों पर उनकी हर फील्ड पर फोकस रहे। पॉजिटिव इमोशनली प्रेशर डालने की आदत छोड़ना चाहिए। देखने में आता है पैरेंट्स अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से बहुत ज्यादा करने लगते हैं। उनकी सामर्थ्य से भी ज्यादा एक्सपेक्टेशन बढ़ जाती है। इस वजह से बच्चों का मूड चेंज हो जाता हैं। जिसे वक्त पर भांपना जरुरी है। जहां भी बच्चा खुद को असहज महसूस लगे, उसकी काउंसलिंग करवाना चाहिए।
(फोटो साभार- Unsplash)
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