महिला टीचर का आरोप—प्रिंसिपल ने जॉइनिंग के बदले रिलेशन की डिमांड की, जबलपुर के सरकारी स्कूल का मामला

Jabalpur News: मध्य प्रदेश में अब महिला टीचर भी सुरक्षित नहीं है। दरअसल जबलपुर के सरकारी स्कूल की महिला अतिथि शिक्षक ने प्रिंसिपल पर रिलेशन बनाने के लिए डिमांड करने का आरोप लगाया है। टीचर का कहना है की प्रिंसिपल ने कहा है कि अगर बात नहीं मानी तो स्कूल से बाहर निकाल दिया जाएगा।

यह पूरा मामला जबलपुर के बरगी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है, जहां पर महिला अतिथि शिक्षक ने सोमवार को एसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है।

Allegation of female teacher in Bargi School Principal demands relation in exchange of joining

क्या है पूरा मामला

महिला अतिथि शिक्षक का आरोप है कि अगस्त 2024 में प्रिंसिपल किशन रायखेड़े के स्कूल में जॉइन करने के बाद से वह लगातार मानसिक और भावनात्मक रूप से परेशान हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल ने उनसे न केवल व्यक्तिगत संबंध बनाने की कोशिश की, बल्कि विरोध करने पर उन्हें स्कूल से निकालने की धमकी भी दी।

महिला शिक्षक ने एसपी ऑफिस पहुंचकर इस मामले की शिकायत की, और उन्होंने प्रिंसिपल के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की। एएसपी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बरगी पुलिस चौकी के प्रभारी को मामले की जांच सौंप दी है।

Allegation of female teacher in Bargi School Principal demands relation in exchange of joining

प्रिंसिपल का जवाब

प्रिंसिपल किशन रायखेड़े ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि महिला शिक्षक की जॉइनिंग 21 अगस्त 2024 को करवा दी गई थी और आरोप लगाने वाली टीचर खुद जांच से बच रही हैं। उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि शिकायतकर्ता के आरोप पूरी तरह निराधार हैं और वे जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं।

पूर्व की घटनाएं और प्रिंसिपल की छवि

महिला शिक्षक ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल किशन रायखेड़े की हरकतें नई नहीं हैं। उन्होंने बताया कि प्रिंसिपल ने पहले शुकरी के स्कूल में भी इसी तरह की हरकतें की थीं, जिसके कारण उन्हें निलंबित किया गया था। उस समय भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

इसके अलावा, 12वीं क्लास की एक छात्रा ने भी प्रिंसिपल की असंवेदनशीलता के बारे में शिकायत की। छात्रा ने बताया कि प्रिंसिपल ने उसे अकेले में मिलने और फिर स्कूल में बैठने की अनुमति देने की बात कही थी, जो कि स्कूल के नियमों और शिष्टाचार के खिलाफ है।

Allegation of female teacher in Bargi School Principal demands relation in exchange of joining

प्रिंसिपल का पक्ष

प्रिंसिपल किशन रायखेड़े ने दावा किया है कि महिला अतिथि शिक्षक को 21 अगस्त 2024 को स्कूल में पढ़ाने की अनुमति दी गई थी, और यह पोर्टल में प्रमाणित भी है। उनके मुताबिक, उसी दिन शाम को महिला शिक्षक ने उनके खिलाफ शिकायत की, और इसके बाद 29 अगस्त और 9 सितंबर को भी शिकायत की गई। रायखेड़े का कहना है कि उन्होंने महिला शिक्षक को बयान देने के लिए कई बार बुलाया, लेकिन वह नहीं आईं। इसके अलावा, 4 सितंबर को जिला शिक्षा विभाग की टीम के स्कूल दौरे के दौरान भी शिक्षक ने जांच से इंकार कर दिया।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

एएसपी सोनाली दुबे ने बताया कि महिला शिक्षक के बयान लिए गए हैं और बच्चों से भी पूछताछ की जा रही है, जिन्होंने प्रिंसिपल पर आरोप लगाए हैं। बरगी चौकी प्रभारी सरिता पटेल ने कहा कि 4 सितंबर को महिला शिक्षक ने पहली बार चौकी में आवेदन दिया था। इससे पहले उन्होंने न तो शिकायत दी थी और न ही प्रिंसिपल द्वारा परेशान किए जाने की जानकारी दी थी। आवेदन देने से पहले महिला शिक्षक ने कलेक्टर, एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी को भी आवेदन दिया था, और अधिकारियों के निर्देश पर जांच की जा रही है।

जिला शिक्षा अधिकारी का बयान

जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी ने कहा कि 20 अगस्त को महिला शिक्षक ने जिला शिक्षा कार्यालय में शिकायत की थी, लेकिन इसमें यौन उत्पीड़न जैसी कोई शिकायत नहीं थी। इसके बाद महिला शिक्षक ने कलेक्ट्रेट में भी शिकायत की। उन्होंने बताया कि आंतरिक परिवाद समिति को जांच के निर्देश दिए गए हैं, और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

छात्र-छात्राओं की भूमिका

सोमवार को, स्कूल में पढ़ने वाले 300 से अधिक छात्र-छात्राएं एसपी ऑफिस गईं, जबकि उनका स्कूल में पढ़ाई का समय चल रहा था। एक 9वीं क्लास के छात्र ने बताया कि शिकायत करने वाली महिला शिक्षक और एक रिटायर सर ने उन्हें एसपी ऑफिस जाने के लिए कहा था। इसके लिए दो बसों की व्यवस्था की गई थी, एक बस में छात्राएं और दूसरी में छात्र शामिल हुए।

इस गंभीर आरोप के चलते स्कूल प्रशासन और स्थानीय पुलिस के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया है। महिला शिक्षक और छात्राओं द्वारा किए गए आरोप यदि सही साबित होते हैं, तो यह न केवल स्कूल के प्रिंसिपल की छवि को धूमिल करेगा, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी दृष्टिकोण से भी गंभीर कदम उठाने की आवश्यकता होगी। इस मामले की निष्पक्ष जांच और जल्द से जल्द न्याय की उम्मीद की जाती है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और पीड़ितों को उचित न्याय मिल सके।

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