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Yogi Adityanath: नेपाल में क्यों सुर्खियों में हैं UP के CM योगी, नेपाली PM समर्थकों को किस बात का सता रहा डर?

Yogi Adityanath Nepal: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों एक अप्रत्याशित वजह से नेपाल में भी काफी सुर्खियों में हैं। दरअसल, पिछले रविवार को काठमांडू में वहां के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के स्वागत में एक भव्य रैली आयोजित की गई थी, जिसमें योगी आदित्यनाथ का पोस्टर भी नजर आ रहा था। इस पोस्टर ने नेपाली राजनीति में भूचाल ला दिया है और वहां की सत्ताधारी पार्टी भीतर ही भीतर हिली हुई लगती है।

नेपाल की राजधानी काठमांडू में करीब दो दशकों बाद राजशाही की वापसी समर्थन में हुई इस विशाल रैली को नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनकी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जो पहले से ही भ्रष्टाचार समेत कई विवादों की वजह से आरोपों से घिरी हुई है।

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Yogi Adityanath News: योगी आदित्यनाथ और नेपाल का क्या है रिश्ता?

दरअसल, योगी आदित्यनाथ और नेपाल के बीच एक गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहा है। योगी आदित्यनाथ आज भी उस गोरखनाथ मठ के प्रमुख हैं, जिसका नाता नेपाल की शाह वंश की आस्था और धार्मिक मान्यता से जुड़ा हुआ है। यह माना जाता है कि नेपाल की शाह वंशीय राजशाही को गुरु गोरखनाथ का ही आशीर्वाद प्राप्त था। इस कारण, नेपाल के कई धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों में गोरखनाथ मठ की उपस्थिति स्वाभाविक होती है।

नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की मुलाकात जनवरी में गोरखपुर और लखनऊ में हुई थी। इससे पहले भी योगी आदित्यनाथ नेपाल में धार्मिक आयोजनों में शामिल होते रहे हैं। 2023 में, वे जनकपुर में राम-जानकी विवाह उत्सव में शामिल हुए थे, जहां खुद नेपाली प्रधानमंत्री ओली भी मौजूद थे।

Yogi Adityanath Nepal Ex King Gyanendra Shah: नेपाल में क्यों चर्चा में हैं UP के CM योगी?

काठमांडू में आयोजित रविवार की रैली में योगी आदित्यनाथ का पोस्टर नजर आने से नेपाल के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। सत्ताधारी पार्टी इस पोस्टर की वजह से राजशाही समर्थक रैली के पीछे भारत का हाथ बताने में लगा है, जबकि आयोजकों के मुताबिक यह सब नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) का किया-धरा है।

Gorakhpur: नेपाली PM ओली समर्थकों को किस बात का सता रहा डर?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के समर्थकों ने इसे नेपाल के आंतरिक मामलों में 'भारत की दखल' का प्रमाण बताया है। उनका आरोप है कि इस रैली को 'भारत का समर्थन' प्राप्त है और यह नेपाल में राजशाही की बहाली की कोशिशों का संकेत है।

Nepal Yogi Adityanath: राजशाही समर्थक बता रहे हैं ओली सरकार की साजिश

वहीं, रैली के आयोजकों और राजशाही समर्थकों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह पोस्टर ओली सरकार की ओर से एक 'साजिश' के तहत लगाया गया, ताकि इस आंदोलन को 'बदनाम' किया जा सके।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन ने स्पष्ट किया कि आयोजकों ने केवल नेपाल का राष्ट्र ध्वज और राजा ज्ञानेंद्र का चित्र इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था। योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।

Nepal Politics: नेपाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति

नेपाल में पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ओली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष भी हैं। उनकी सरकार भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों से घिरी रही है, और जनता में भी असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे समय में, पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की नेपाली राजनीति में बढ़ती सक्रियता को सरकार के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

नेपाल में राजशाही समर्थकों का एक वर्ग मानता है कि 2008 में नेपाल की राजशाही को हटाना बहुत गलत फैसला था और देश को वापस राजशाही की ओर लौटना चाहिए।

हाल ही में हुए कई प्रदर्शनों में 'राजा आओ, देश बचाओ' जैसे नारे लगाए गए हैं। ऐसे समय में, ज्ञानेंद्र शाह का काठमांडू में भव्य स्वागत और उनके पक्ष में हुए विशाल प्रदर्शन को प्रधानमंत्री ओली के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है, जिनका झुकाव पहले कार्यकाल से ही चीन की ओर रहा है और कई मौकों पर उन्होंने भारत के साथ विवाद पैदा करने की भी कोशिश की है।

Nepal Politics and CM Yogi: भारत-नेपाल संबंधों पर प्रभाव

नेपाल की जनता के एक वर्ग में वहां का एक सियासी तबका हमेशा से अपनी आंतरिक राजनीति में भारत के कथित दखल को लेकर संदेह पैदा करता रहा है। इस वजह से भारत की ओर से नेपाल की राजनीति में किसी भी प्रकार की भागीदारी को लेकर वहां के राजनीतिक दलों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं दिखाई देती हैं। जब 2008 में नेपाल की राजशाही को हटाने का फैसला लिया गया था, तब भारत की यूपीए (UPA) सरकार ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

तब भारत में मनमोहन सिंह सरकार को वामपंथी दलों का भी समर्थन हासिल था और इसी वजह से तब उन्होंने नेपाल के सत्ता परिवर्तन में बहुत ही सक्रिय भूमिका निभाई थी। नेपाल की जनता के एक बड़े वर्ग में आज भी राजशाही खत्म होने के लिए उस दौर को जिम्मेदार माना जाता है।

यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ जैसे भारत के एक प्रमुख नेता की तस्वीर नेपाल के राजनीतिक आंदोलन में दिखाई पड़ने को वहां के सत्ताधारी दल को इसे भारत का कथित हस्तक्षेप बताना आसान लगता है।

यही वजह कि ओली सरकार इस घटना को कथित रूप से नेपाल में भारत के बढ़ते दखल के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, जबकि राजशाही समर्थक इसे नेपाल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों के रूप में देख रहे हैं।

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