उइगर मुसलमानों का संगठन नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित, चीन का तिलमिलाना तय, क्या करेंगे जिनपिंग?
ऐसे आरोप हैं, कि शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति बनने के बाद उइगर बाहुल्य प्रांत शिनजियांग में सख्त ऑपरेशन चलाया है और 10 हजार से ज्यादा उइगर मुस्लिमों को डिटेंशन कैंप में बंद कर रखा है।

Uyghur rights group Nobel Prize: चीन में उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के बीच जर्मनी स्थिति उइगर अधिकार समूह, वर्ल्ड उइगर कांग्रेस को शांति, लोकतंत्र के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है, जिसके बाद चीन का तिलमिलाना तय माना जा रहा है। उइगर कांग्रेस को चीन और तुर्की में उइगर मुस्लिमों की दुर्दशा दिखाने और उनकी शांति के लिए काम करने के लिए नामांकित किया गया है। माना जा रहा है, कि उइगर संगठन को नामांकित किए जाने के बाद चीन की तरफ से सख्त प्रतिक्रिया आएगी।

उइगर समूह को शांति के लिए नोबेल?
वॉयस ऑफ अमेरिका (VOA) ने बताया है, कि वर्ल्ड उइगर कांग्रेस, जर्मनी में स्थिति एक मानवाधिकार संगठन है, जो चीनी अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाता है। वीओए ने बताया है, कि कनाडाई सांसदों और नॉर्वे में युवा उदारवादियों के एक नेता, नॉर्वे के वेंस्ट्रे राजनीतिक दल के युवा विंग ने इस संगठन को नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है। नामांकन पत्र में कहा गया है, कि "वर्ल्ड उइगर कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य उइगर लोगों के लिए लोकतंत्र, मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देना और शांतिपूर्ण, अहिंसक और लोकतांत्रिक साधनों के उपयोग का समर्थन करना है।" हालांकि, समिति ने नियमों के कारण नोबेल शांति के नामांकित व्यक्तियों के नामों का खुलासा नहीं किया। जबकि, समूह को नामित करने वाले दो कनाडाई संसद सदस्यों में से एक एलेक्सिस ब्रुनेल-डुसेप ने नाम का खुलासा किया और वीओए के साथ नाकांकन पत्र शेयर किया है।

दिसंबर में होगा नाम का ऐलान
आपको बता दें, कि नोबेल पुरस्कारों का ऐलान इस साल दिसंबर महीने में ओस्लो में होना है। वहीं, नामांकन पत्र में उल्लेख किया गया है, कि वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने चीनी सरकार द्वारा "शारीरिक, धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक दमन के भारी अभियान" के खिलाफ दुनिया का ध्यान खींचा है और उइगरों के अधिकारों के लिए काफी काम किया है। वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने चीनी सरकार द्वारा मुस्लिमों को गायब किए जाने, उनके अधिकारों के लिए, राजनीतिक कैदियों की जेल से रिहाई के लिए सशक्त अभियान चलाया है और उइगरों की बात को दुनिया के मंच पर रखा है, जिससे चीनी शासन की क्रूरता उजागर हो पाई है। ब्रुनेले-डुसेप ने नामांकन पत्र में लिखा है, कि वर्ल्ड उइगर कांग्रेस के अभियान की वजह से ही संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ को पता चल पाया, कि चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ अत्याचार किस हद तक बढ़ गई है। हालांकि, चीनी शासन ने बार बार उइगरों के साथ होने वाले अत्याचार की बात से इनकार किया है और चीन की राज्य समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने आरोपों को "पश्चिम में चीन विरोधी ताकतों" द्वारा "झूठ" के रूप में वर्णित किया है।
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उइगर मुस्लिमों पर चीन का पक्ष
शिन्हुआ न्यूज ने साल 2021 में उइगर मुस्लिमों को लेकर एक लेख छापा था, जिसमें उसने लिखा था, कि "शिंजियांग प्रांत से संबंधित मुद्दे मानवाधिकारों, जातीयता या धर्म के बारे में नहीं हैं, बल्कि हिंसक आतंकवाद और अलगाववाद से निपटने के बारे में हैं।" चीन का दावा है, कि इस क्षेत्र ने आर्थिक और सामाजिक विकास का अनुभव किया है। वहीं, वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए वर्ल्ड उइगर कांग्रेस के नामांकन की आलोचना की है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने एक ईमेल में वीओए को बताया, कि "उम्मीद है कि नोबेल पुरस्कार वैश्विक शांति की दिशा में योगदान देगा, ना कि ये एक राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने का उपकरण बन जाएगा।" मेल में आगे कहा गया है, कि "तथाकथित 'वर्ल्ड उइगर कांग्रेस' के आतंकवादी संगठनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। इस तरह के संगठन को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करना विश्व शांति के लिए बेहद हानिकारक है और नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर एक बड़ी विडंबना है।"

उइगर मुस्लिमों पर भारी अत्याचार
पिछले साल अगस्त में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने शिनजियांग प्रांत पर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था, कि चीन ने उइगर के खिलाफ "गंभीर मानवाधिकारों का उल्लंघन" किया है। वर्ल्ड उइगर कांग्रेस के एडवोकेसी मैनेजर जुमरेते अर्किन ने वीओए को बताया, कि "चीनी सरकार दशकों से एक ही तरह का झूठ बोलती रही है।" उन्होंने कहा, कि "तथ्य यह है, कि वर्ल्ड उइगर कांग्रेस को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है, जो यह इस बात का प्रमाण है, कि स्वतंत्र और लोकतांत्रिक दुनिया ने वर्ल्ड उइगर कांग्रेस के काम को मूल्यवान और महत्वपूर्ण माना है। ऐसे संगठनों को बदनाम करने के बजाय, चीनी सरकार को लोकतांत्रिक दुनिया की बात सुननी चाहिए।" वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की वेबसाइट के मुताबिक, वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की स्थापना 2004 में, जर्मनी के म्यूनिख में, पूर्वी तुर्किस्तान राष्ट्रीय कांग्रेस और विश्व उइगर युवा कांग्रेस के एक संगठन में विलय के बाद हुई थी।
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