World No Tobacco Day 2023: भारत की 267 मिलियन आबादी को तंबाकू का नशा, कैसे बचेंगे बच्चों, जानिए उद्देश्य

तंबाकू के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कैंसर जैसी घातक बीमारी भी तेजी से फैल रही है। हर साल 31 मई को तंबाकू निषेध दिवस होता है। इस दिन वैश्विक स्तर पर तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूता फैलाने का प्रयास किया जाता है।

World No Tobacco Day 2023

World No Tobacco Day 2023: तंबाकू से होने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और तंबाकू का उपभोग कम करने के उद्देश्य से विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इसके विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेतृत्व में एक वैश्विक पहल के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य तंबाकू के उपयोग का बढ़ावा देने से रोकना के साथ जनता को धूम्रपान और धूम्रपान रहित तंबाकू उत्पादों और इसे स्वास्थ को होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना है। स्पष्ट शब्दों में विश्व तंबाकू निषेध दिवस तंबाकू का सेवन बंद करने को बढ़ावा देने के लिए मानाया जाता है।

भारत की बात करें तो 267 मिलियन से अधिक लोग तंबाकू या फिर तंबाकू से बने उत्पादों को प्रयोग करते हैं। चिंता इस बात की है यहां आने वाली पीढ़ी भी इस नशे की लत को अपना रही है। यही स्थिति भारत के बाहर भी है। दुनिया में तंबाकू से होने वाले कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में तंबाकू निषेध दिवस के दिन वैश्विक स्तर पर इस नशीले पदार्थ के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति लोगों को आगाह करने की अहम जिम्मेदारी है।

वर्ल्ड नो टोबैको डे 2023 का इतिहास
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 1987 में तम्बाकू के इस्तेमाल पर नियंत्रण की योजना बनाई। जिसके बाद पहली बार वर्ल्ड नो टोबैको डे 31 मई, साल 1988 को मनाया गया था। उस वक्त तंबाकू निषेध दिवस की थीम थी "तंबाकू या स्वास्थ्य: स्वास्थ्य चुनें।" जबकि इस साल (2023) की थीम है 'We need food, not tobacco' यानी हमें भोजन चाहिए तंबाकू नहीं। इस साल तंबाकू के उत्पाद की जगह अन्य पोषक फसलों के उत्पादन को लेकर अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए वैश्विक संस्थान मदद भी करेगा।

पहले 7 अप्रैल को मनाया जाता था
इससे पहले पहले 7 अप्रैल को तंबाकू निषेध दिवस दुनियाभर में मनाया जाता था। बाद में 1988 में इस दिवस को विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रस्ताव के बाद 31 मई की तारीख को इस दिवस को मनाया जाने लगा। दरअसल, 1987 में, विश्व स्वास्थ्य सभा ने प्रस्ताव WHA40.38 पारित किया, जिसमें 7 अप्रैल, 1988 को "विश्व धूम्रपान निषेध दिवस" ​​घोषित किया गया। 1988 में, संकल्प WHA42.19 पारित किया गया था, जिसमें हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाने का आह्वान किया गया था।

तंबाकू सेवन से मौत के आंकड़े
वर्ल्ड नो टोबैको डे यानी विश्व तंबाकू निषेध दिवस (No Tobacco Day) प्रति वर्ष 31 मई को मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के जारी किए गए आंकड़े को देखें तो विश्व में हर वर्ष ही लगभग 80 लाख लोग तंबाकू से होने वाली बीमारी से मौत के मुंह में चले जाते हैं। तंबाकू के अलावा निकोटीन युक्त प्रोडक्ट जैसे कि बीड़ी, गुटखा और सिगरेट के सेवन से होने वाली बीमारियों को लेकर भी लोगों को जागरुक किया जाता है। तंबाकू के बहुत अधिक सेवन और बहुत अधिक धूम्रपान से जानलेवा बीमारी जैसे कि कैंसर हो सकता है। इसके अलावा धूम्रपान से सांस संबंधी बीमारी जैसे ब्रोंकाइटिस व इम्फसिया जैसी दिक्कतों का खतरा तंबाकू के सेवन से बढ़ जाता है। इन मादक पदार्थों के सेवन से इससे हृदय और रक्त से जुड़ समस्या हो सकती है।

तंबाकू दिवसका महत्व
वैश्विक स्तर पर नागरिकों के बीच न केवल तम्बाकू के उपयोग के खतरों के बारे में बल्कि तम्बाकू कंपनियों की व्यावसायिक प्रथाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। तम्बाकू महामारी से लड़ने के लिए WHO क्या कर रहा है और दुनिया भर के लोग अपने अधिकार का दावा करने के लिए क्या कर सकते हैं। स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा के लिए। इस दिन विश्व के सभी देशों में लोगों को तंबाकू से होने वाले शारीरिक नुकसान के बारे में अवगत करवाया जाता है। आंकड़े आगर देखें तो तंबाकू से होने वाले रोगों से प्रतिवर्ष लाखों लोगों की मौत होती है।

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