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CAA पर भारत में घमासान.. अलजजीरा फैला रहा अफवाह, जानिए CNN समेत विदेशी मीडिया क्या लिख रहा है?

Foreign Media on CAA: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू कर दिया है, जिसमें साफ साफ शब्दों में लिखा गया है, कि भारत के तीन पड़ोसी देशों में रहने वाले सताए गये हिंदुओं को भारत की नागरिकता दी जाएगी।

सीएए कानून में लिखा गया है, कि इस कानून के कहत किसी की भी नागरिकता जाएगी नहीं, बल्कि ये कानून सिर्फ तीनों मुस्लिम देशों में सताए गये हिंदुओं को भारत की नागरिकता देने के लिए है, लेकिन भारत में कुछ लोगों के साथ साथ कुछ विदेशी मीडिया भी इस कानून को लेकर अफवाह फैला रहा है।

Foreign Media on CAA

आइये जानते हैं, कि सीएएन को लेकर विदेशी मीडिया क्या लिख रहा है?

अलजजीरा फैला रहा अफवाह

भारत के खिलाफ रिपोर्टिंग के लिए कुख्यात कतर के न्यूज चैनल अलजजीरा ने हमेशा की ही तरह अपनी रिपोर्ट में भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला है और सीएए को लेकर अफवाह फैलाने की कोशिश की है। अलजजीरा की रिपोर्ट पढ़कर ऐसा नहीं लगता, कि उसने सीएए को लेकर जारी नोटिफिकेशन को एक बार भी बढ़ा है।

अलजजीरा की वेबसाइट पर हेडलाइंस में ही लिखा गया है, "भारत ने एंटी मुस्लिम 2019 नागरिकता कानून चुनाव से पहले लागू किया।" यानि, अलजजीरा में बताया गया है, कि ये कानून मुस्लिमों के खिलाफ है, जो अफवाह फैलाने की कोशिश की है।

अलजजीरा की रिपोर्ट में लिखा गया है, कि "प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपनी हिंदू राष्ट्रवादी सरकार के लिए एक दुर्लभ तीसरा कार्यकाल हासिल करने से कुछ हफ्ते पहले, भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने के लिए नियमों की घोषणा की है। मोदी सरकार द्वारा 2019 में पारित विवादास्पद कानून ने भारत के पड़ोसी देशों के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए भारतीय नागरिकता की अनुमति दी है।"

aljazeera on caa

इसके अलावा, अलजजीरा की रिपोर्ट में लिखा गया है, कि "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर सवाल उठाते हुए, मुस्लिम समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखने के लिए कई अधिकार समूहों द्वारा कानून को "मुस्लिम विरोधी" घोषित किया गया था।

रिपोर्ट में आगे लिखा गया है, कि दिसंबर 2019 में इसके पारित होने पर देशव्यापी विरोध के बाद मोदी सरकार ने कानून के लिए नियमों का मसौदा तैयार नहीं किया था।

विरोध प्रदर्शन के दौरान राजधानी नई दिल्ली में हिंसा भड़क उठी, जिसमें कई दिनों तक चले दंगों में दर्जनों लोग मारे गए, जिनमें अधिकतर मुसलमान थे और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे।

इसके अलावा, अलजजीरा ने कुछ मानवाधिकार समूहों के हवाले से आरोप लगाया है, कि 2014 में प्रधान मंत्री बने मोदी के शासनकाल में मुसलमानों के साथ दुर्व्यवहार बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि "देश में मुसलमानों और उनकी आजीविका के खिलाफ हमलों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिसमें मुस्लिम घरों और संपत्तियों का विध्वंस भी शामिल है।"

इसके अलावा भी अलजजीरा की रिपोर्ट में जमकर भारत के खिलाफ जहर उगला गया है, जो उसके एंटी-इंडिया एजेंडे को साफ तौर पर दर्शाता है।

क्या कह रहा अमेरिकी मीडिया?

CNN ने सीएए नोटिफिकेशन को अपने हेडलाइंस में विवादित कानून बताया है। CNN के हेडलाइंस में लिखा गया है, "भारत ने विवादित नागरिकता कानून को लागू कर दिया है, जिससे मुस्लिमों को बाहर रखा गया है।"

सीएनएन की रिपोर्ट में लिखा गया है, कि "भारत ने ऐसे नियमों की घोषणा की है, जो उसे एक विवादास्पद नागरिकता विधेयक को लागू करने की अनुमति देगा, जिसमें मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है।"

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, कि "नागरिकता (संशोधन) अधिनियम अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अप्रवासियों के लिए नागरिकता का त्वरित मार्ग प्रदान करता है - बशर्ते कि वे मुस्लिम न हों। विवादास्पद कानून धार्मिक आधार पर सताए गए धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लागू होगा, जिनमें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं।"

CNN ने आगे लिखा है, कि "हिंदू राष्ट्रवादी PM मोदी ने बिल का स्वागत किया है, लेकिन बिल का विपक्षी दलों ने इसका भारी विरोध किया है और दावा किया है, कि यह असंवैधानिक है और भारत के 20 करोड़ मुस्लिम आबादी को हाशिए पर धकेल दिया गया है।"

हालांकि, अमेरिकी मीडिया कुछ भी रिपोर्टिंग करे, लेकिन भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने इसका स्वागत किया है और कहा है, कि इसकी लंबे वक्त से प्रतीक्षा की जा रही थी। हिंदू अमेरिकी समूहों ने कहा है, कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), जिसे भारत में सोमवार को अधिसूचित किया गया था, लंबे समय से लंबित था और संयुक्त राज्य अमेरिका में धार्मिक शरणार्थियों के लिए लॉटेनबर्ग संशोधन को प्रतिबिंबित करता है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एचएएफ) के कार्यकारी डायरेक्टर सुहाग शुक्ला ने कहा, कि "भारत का नागरिकता संशोधन अधिनियम लंबे समय से लंबित और आवश्यक है। यह भारत में सबसे कमजोर शरणार्थियों में से कुछ की रक्षा करता है, उन्हें वे मानवाधिकार प्रदान करता है, जिनसे उन्हें अपने देश में वंचित किया गया, और उन्हें अपने जीवन का पुनर्निर्माण शुरू करने के लिए आवश्यक नागरिकता का स्पष्ट और त्वरित मार्ग प्रदान करता है।"

पाकिस्तानी मीडिया का रिएक्शन

पाकिस्तान के जियो न्यूज के वेबसाइट पर 'भारत की मोदी सरकार ने एंटी मुस्लिम नागरिकता कानून-2019 लागू कर दिया है।' जियो न्यूज ने लिखा है, मोदी सरकार ने ये कदम भारत में होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उठाया है, जिसको लेकर कई मानवाधिकार संगठनों का कहना है, कि ये एंटी-मुस्लिम कानून है। जियो ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हवाले से लिखा है, कि "ये कानून भारत की सेक्युलर प्रकृति के खिलाफ है।"

इसके अलावा, डॉन ने लिखा है, कि "नई दिल्ली ने विवादास्पद नागरिकता कानून को लागू किया।" डॉन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, कि "विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) लागू होने के चार साल बाद, नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को कानून को लागू करने के लिए आवश्यक नियमों को अधिसूचित कर दिया है।"

डॉन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, कि "मोदी सरकार ने उस वक्त इस कानून को अधिसूचित किया है, जब भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे को लेकर एसबीआई की अर्जी खारिज कर दी है और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है, कि अखबारों में हेडलाइंस बदलने के लिए सीएए की अधिसूचना जारी की गई है।"

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