वर्ल्ड कप: मेसी के नाम फ़ाइनल की रात, एमबापे और ग़ज़ब का रोमांच रहेगा याद
लियोनेल मेसी फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के क़रीब पहुंचे. थोड़ा झुके और बहुत अहिस्ता से ट्रॉफ़ी को चूम लिया.
और जब वर्ल्ड कप हाथ में आया तो बोले, "मैं इसे बहुत शिद्दत से चाहता था. मुझे लग रहा था कि गॉड मुझे ये देंगे. ये मेरा लम्हा है."
क़तर के लुसैल स्टेडियम में रविवार को जो कहानी लिखी गई, वो किसी 'परी कथा' जैसी मालूम होती है. लेकिन सिर्फ़ मेसी के लिए नहीं.
दिल में कोई मुराद लिए इस कहानी के प्लॉट में दाख़िल हुए हर किरदार के हिस्से कामयाबी, शोहरत और ख़ुशियां आईं. किसी के हिस्से थोड़ी ज़्यादा तो किसी के हिस्से थोड़ी कम.
लेकिन झोली शायद ही किसी की खाली रही. इनमें टीमों के समर्थक और फ़ाइनल खेल रही अर्जेंटीना और फ़्रांस की टीमों से तटस्थ फ़ुटबॉल का मज़ा लेने वाले फ़ैन्स भी शामिल हैं.
बकौल मेसी, "ये पूरी तरह दीवाना बना देने वाला मैच था."
'थम गई थीं सांसें'
मेसी तो ख़ैर मैदान पर थे, जो बाहर बैठकर या टीवी सेट पर मैच देख रहे थे, इस मैच को लेकर उनकी राय भी कोई अलग नहीं थी.
इंग्लैंड के पूर्व खिलाड़ी एलन शियरर ने कहा, "हमारी सांसें थम गई हैं. ये एक अविश्वसनीय फ़ाइनल था. मैंने पहले कभी ऐसा मैच नहीं देखा. मुझे नहीं लगता कि मैं आगे भी कभी ऐसा देख पाऊंगा. ये हैरान करने वाला मैच था. "
मज़ा देखिए, ये उस फ़ाइनल की बात हो रही है जहां मुक़ाबला शुरु होने के बाद 70 मिनट के लगभग तक मैच इतना एकतरफ़ा था कि सोशल मीडिया पर कई यूज़र इसके 'स्क्रिप्टेड' यानी नतीजा पहले से तय होने का आरोप तक लगाने लगे.
तब तक सबकुछ लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना टीम के हक़ में जा रहा था. मानो नियति ने तय कर लिया हो कि वो आधुनिक दौर के 'सबसे बड़े' फ़ुटबॉल खिलाड़ी को क़तर से खाली हाथ नहीं भेजेगी.
तब तक फ़्रांस की टीम अर्जेंटीना के सामने दोयम दिख रही थी. वो आई तो थी लगातार दो वर्ल्ड कप जीतकर ब्राज़ील के 60 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी करने लेकिन बिना जान लड़ाए ही 'सल्तनत' गंवाने जा रही थी.
जीत यूं मिलती तो भी मैसी, अर्जेंटीना और उनके समर्थकों का सातवें आसमान पर पहुंचना तय था लेकिन वो नतीजा क़तर वर्ल्ड के फ़ाइनल के कहानी को 'अमरता' नहीं दिला पाता.
जीत पर फैन्स झूम तो लेते लेकिन उन्हें तेज़ी से धड़कता अपना दिल सीने उछलकर बाहर आता मालूम नहीं होता. वो अपने साथ मैच देखने वालों से ये कहते हुए शर्त नहीं लगा पाते, 'बोलो कौन जीतेगा?' या ' (किलियान) एमबापे, मेसी पर भारी न पड़ जाए!'
तब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों 'प्रोटोकॉल' की सीमाओं के परे किसी किशोर उम्र फैन जैसे मुट्ठियां और दांत भींचे और आंखें निकाले नहीं दिखते.
आँखों में उन्माद और बेकाबू जज़्बात का सैलाब उमड़ता नहीं दिखता.
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सबसे दिलचस्प फ़ाइनल
लेकिन, इस कहानी में ये सब होना था. 79 वें मिनट में पहला, दो मिनट बाद दूसरा और एक्सट्रा टाइम में तीसरा गोल दागकर फ़ाइनल में हैट्रिक जमाने वाले एमबापे के करिश्माई खेल से फ्रांस का रुतबा और मैच का रोमांच चरम पर पहुंचना था.
और, इसने एक सीधी सादी लगभग 'बोरिंग' सी लगने लगी कहानी में एक के बाद एक ऐसे मसाले भरने शुरू कर दिए जिनकी कल्पना कॉमर्शियल फ़िल्मों में ऑन डिमांड कहानी लिखने वाले भी न कर सकें.
इंग्लैंड के पूर्व खिलाड़ी रियो फर्डिनेंड ने कहा, " जो कुछ हुआ मैं उसकी कल्पनाा नहीं कर सकता था."
हालांकि, ऐसा नहीं है कि खिलाड़ियों और फैन्स ने मैच को लेकर कल्पनाएं न की हों.
फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप 2022 का फ़ाइनल मुक़ाबला शुरू होने के पहले ही स्टेडियम में मौजूद और दुनिया के कोने कोने में टीवी सेट पर आंखें लगाए फैन्स तय कर चुके थे कि वो किस टीम का समर्थन करने वाले हैं.
ऐसी दीवानगी....
अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स की सड़कों पर इतने लोग थे कि गिनना मुश्किल था. ये गिनती तो और भी मुश्किल थी कि उनमें से कितनों के जिस्म पर '10 नंबर' की वो चर्चित जर्सी है, जिसे पहनकर कप्तान लियोनेल मेसी वर्ल्ड कप में अपना आखिरी मैच खेलने को उतरने वाले हैं.
फैन्स की दीवानगी और जोश फ्रांस की राजधानी पेरिस में भी कम नहीं था. समर्थकों के बीच पेरिस में भी 10 नंबर की जर्सी का क्रेज़ था लेकिन वहां जर्सी का रंग वही था जो फ्रांस के मेगास्टार किलियान एमबापे पहनते हैं.
फ़ाइनल मुक़ाबले को मेसी और एमबापे की टक्कर के तौर पर ही देखा जा रहा था.
स्टेडियम में अर्जेंटीना के फैन्स संख्या में ज़्यादा थे. इनमें से कुछ फैन्स निकोलस जैसे भी थे, जिन्होंने बीबीसी को बताया कि 24 सौ डॉलर यानी करीब दो लाख रुपये चुकाने के बाद उन्हें एक टिकट हासिल हुआ है.
लेकिन, उन्हें अफ़सोस नहीं था. निकोलस का कहना था, "मेसी को वर्ल्ड कप उठाता देखने के लिए मैं इससे भी ज़्यादा कीमत दे सकता था."
वहीं, एमबापे का जोश बढ़ाने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मेक्रों जैसे हाई प्रोफ़ाइल फैन लुसैल स्टेडियम में मौजूद थे. वो चार दिन में दूसरी बार क़तर में थे. सेमीफ़ाइनल में मोरक्को पर जीत के बाद उन्हें फ्रांस के लिए 'लकी मस्कट' माना जा रहा था.
कल्पनाएं अपनी जगह थीं लेकिन फ़ाइनल की कहानी ने अपनी राह चुनी.
मैच में स्कोर
- 23वें मिनट में मेसी ने अर्जेंटीना के लिए पहला गोल किया
- 36वें मिनट में एंगेल डि मारिया ने अर्जेंटीना के लिए दूसरा गोल किया. पहले हाफ में कोई और गोल नहीं हुआ
- मैच फ़्रांस के हाथ से निकल रहा था लेकिन 80वें मिनट में एमबापे ने फ्रांस के लिए पहला गोल किया
- 81वें मिनट में एमबापे ने दूसरा गोल दाग फ्रांस को अर्जेंटीना की बराबरी पर ला दिया.
एक्स्ट्रा टाइम का रोमांच
निर्धारित समय तक दोनों टीमों के 2-2 से बराबर रहने पर मैच एक्सट्रा टाइम में गया.
- 108वें मिनट में मेसी ने गोल किया और अर्जेंटीना को बढ़त दिला दी
- 118वें मिनट में एमबापे ने हैट्रिक जमाते हुए फ़्रांस को बराबरी पर ला दिया.
एमबापे का करिश्मा 80वें मिनट से शवाब पर आया. तब तक मेसी के नाम की धूम थी लेकिन अगले 40 मिनट में से ज़्यादातर समय तक कहानी के केंद्र में एमबापे रहे.
10नंबर की जर्सी पहनकर धमाल मचाता ये खिलाड़ी 10 नंबर की जर्सी पहनने वाले विरोधी खिलाड़ी की पार्टी बिगाड़ने की ज़िद ठाने नज़र आने लगा.
पेनल्टी शूटआउट के हीरो
लेकिन, कहानी अभी बाकी थी. मैच का नतीजा पेनल्टी शूटआउट से होना तय हुआ और फ़ाइनल के पहले मेसी के लिए वर्ल्ड कप जीतने का एलान कर चुके अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज़ ने मोर्चा संभाल लिया.
वो फ्रांस और वर्ल्ड कप के बीच दीवार बन गए. फ्रांस ने चार मौके आजमाए और उनमें से दो ही भुनाए. दो प्रयासों को एमिलियानो ने बेकार कर दिया.
जीत तय करने के बाद एमिलियानो ने कहा, " मैंने जो ख्वाब देखा था वो पूरा हो गया."
उन्होंने आगे कहा, "मेरे पास शब्द नहीं है. पेनल्टी शूटआउट के दौरान मैं शांत था. हम जैसा चाहते थे, सबकुछ वैसा ही हुआ."
'दिल तोड़ने वाली हार'
एमिलियानो की कोशिश ने एमबापे की मेहनत पर पानी फेर दिया. सऊदी अरब के ख़िलाफ़ हार से अभियान की शुरुआत करने वाली अर्जेंटीना टीम वर्ल्ड कप चैंपियन बन गई.
हार से मायूस एमबापे ने टी शर्ट चेहरे पर खींचकर मुंह छुपा लिया. मानो अपनी भावनाएं छुपा लेना चाहते हों. उन्हें तसल्ली देने के लिए ख़ुद मैक्रों को मैदान पर आना पड़ा.
मैक्रों ने कहा, " हम सब बहुत दुखी हैं. ख़ासकर ये देखते हुए कि हार किस तरह मिली. हम जीत के करीब थे. मैंने ड्रेसिंग रुम में खिलाड़ियों से कहा कि हमें उन पर बहुत गर्व है. "
मैक्रों के मुताबिक, "जितने भी वर्ल्ड कप फ़ाइनल देखे हैं,मेरी नज़र में ये उनमें सर्वश्रेष्ठ है."
फ्रांस के कोच दिदिए देशाँ ने कहा, "ये हार दिल तोड़ने वाली है."
लेकिन हार के भी एमबापे खाली हाथ नहीं लौटे.
वर्ल्ड कप के पुरस्कार
- एमबापे (8 गोल) को गोल्डन बूट अवॉर्ड मिला
- लियोनेल मेसी को गोल्डन बॉल (सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी) अवॉर्ड मिला. वो 2014 में भी ये अवॉर्ड हासिल कर चुके हैं.
- अर्जेंटीना के एमिलियानो मार्टिनेज़ को गोल्डन ग्लोव अवॉर्ड मिला
- अर्जेंटीना के एंजो फ़र्नांडेज़ को यंग प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट का अवॉर्ड मिला.
पूरी हुई कहानी
तमाम अनचाहे मोड़ से गुजरती वर्ल्ड कप फ़ाइनल की कहानी आखिरी मोड़ पर आ गई. फ्रांस के खिलाड़ियों की आंखें छलक रही थीं. अर्जेंटीना के खिलाड़ियों की आंखें भी नम थीं. कहीं गम के आंसू थे तो कहीं खुशी के.
साथियों के साथ गोल घेरे में जश्न मनाने के बाद मेसी की नज़रें वर्ल्ड कप पर टिक गईं. टी शर्ट के ऊपर अरब जगत के स्टाइल की पोशक पहने मेसी ने फ़ीफा के प्रेसिडेंट जियानी इन्फेंटीनो और क़तर के शेख तमीम से हाथ मिलाया और फिर वो मशहूर ट्रॉफी थामी जो अब तक सिर्फ़ उनके ख्वाबों में आती थी.
क़तर में हुए पहले वर्ल्ड कप की कहानी पूरी हुई. मेसी और अर्जेंटीना के लिए ये परीकथा जैसी थी और जब क़तर इसे याद करेगा तो उसे भी शायद ऐसा ही लगे.
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