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World Aids Day 2021: जानिए, कौन था वो शख्स, जिसने दुनिया में फैलाया एड्स

नई दिल्ली, 01 दिसंबर। पूरी दुनिया इस समय कोरोना महामारी से लड़ रही है, इस अदृश्य दुश्मन ने अब तक लाखों लोगों की जिंदगियां छीन ली हैं। वैसे कोरोना तो इंसानों के लिए नया खतरा है, लेकिन इससे पहले से हमारे बीच बहुत सी खतरनाक बीमारियां पली हैं। इन्हीं में से एक भयावह बीमारी का नाम है- 'एड्स'। यह भी जानलेवा संक्रमण है, लेकिन कोरोना वायरस की तरह यह हवा में ट्रैवल नहीं करता।

दुनिया में एक शख्स ने फैलाया एड्स

दुनिया में एक शख्स ने फैलाया एड्स

एक तरफ जहां कोरोना वायरस के खिलाफ वैज्ञानिकों ने वैक्सीन तैयार कर लिया है, वहीं दूसरी ओर दुनिया आज भी एड्स का सटीक इलाज नहीं खोज सकी है। एड्स के प्रति जागरूकता के लिए देश अलग-अलग तरीका अपनाते हैं लेकिन साल में एक ऐसा दिन होता है, जब पूरी दुनिया इसे 'वर्ल्ड एड्स डे' के रूप में मनाती है। आज वही खास दिन है, जब हम इस खतरनाक बीमारी के जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां आपको बताने जा रहे हैं।

क्यों मनाया जाता है 'विश्व एड्स दिवस'?

क्यों मनाया जाता है 'विश्व एड्स दिवस'?

दुनियाभर में 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है, इस दिन की शुरुआत साल 1988 में हुई थी। संक्रमित इंसान के संपर्क में आने से फैलने वाला ये 'शैतान', अब तक कई लोगों की जान ले चुका है। 'विश्व एड्स दिवस' मनाने का मुख्य मकसद इस लाइलाज बीमारी के बारे में लोगों की जागरुक करना है। इस बीमारी को नियंत्रित तो किया जा सकता है लेकिन इसका इलाज संभव नहीं है।

बीमारी का नाम सुनते ही डर जाते हैं लोग

बीमारी का नाम सुनते ही डर जाते हैं लोग

इस बीमारी का नाम सुनते ही लोग दूर भागने लगते हैं लेकिन कई लोगों को पूरी जानकारी नहीं होने की वजह से वह गलतफहमी के शिकार भी हैं। कई ऐसी बातें है जिसके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एड्स कैसे फैला? या सबसे पहले एड्स किसे हुआ था? आज हम आपको ऐसे ही अन सुने सवालों के जवाब देने जा रहे हैं। जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

सबसे पहले इस जानवर में पाया गया वायरस

सबसे पहले इस जानवर में पाया गया वायरस

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंसानों में एड्स सबसे पहले चिम्पांजी से फैला। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह वायरस अफ्रीका के कांगो के जंगल में रहने वाले एक चिम्पांजी की बॉडी में मौजूद था। कहा जाता है कि एक शिकारी ने उस चिम्पांजी का शिकार कर उसे घायल किया। इसके बाद चिम्पांजी खून उस इंसान के खून में मिल गया जिसके बाद ये जानलेवा बीमारी इंसानों में पहुंची। हालांकि इस कहानी को कई एस्पर्ट्स ने मानने से इनकार कर दिया था।

कौन था एड्स का सबसे पहला इंसानी मरीज?

कौन था एड्स का सबसे पहला इंसानी मरीज?

इंसानों में एड्स पहुंचने का इतिहास जानने के बाद अब आपको बताते हैं कि HIV संक्रमित सबसे पहला व्यक्ति कौन था। रिपोर्ट के मुताबिक उस शख्स का नाम गैटन दुगास था। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की रिपोर्ट की मानें तो दुनियाभर में एड्स फैलाने का जिम्मेदार इसी गे शख्स को माना जाता है। गैटन दुगास एक कैनेडियन फ्लाइट अटेंडेंट था, वह समलैंगिक था और उसने जानबूझकर इस बीमारी को लोगों में फैलाया।

जानबूझकर फैलाया एड्स

जानबूझकर फैलाया एड्स

गैटन दुगास को समझ में आ गया था कि उसे एड्स हैं और उसकी मौत निश्चित है। गैटन दुगास को पेशेंट जीरो के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि शुरुआत तक यह बीमारी कई सालों तक सिर्फ मर्दों में ही देखने को मिली, जब अमेरिका में लोगों को ऐसी खतरनाक बीमारी के बारे में पता चला तो वह हैरान रह गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक बीमारी का पता चलने से 8 साल तक कुल मरीजों में 92 फीसदी सिर्फ मर्द थे।

गैटन दुगास की मौत के बाद किया गया दोषमुक्त

गैटन दुगास की मौत के बाद किया गया दोषमुक्त

हालांकि अब गैटन दुगास इस दुनिया में नहीं रहा और उसकी मौत के बाद की गई एक रिसर्च में उसे 'पेशेंट जीरो' के नाम से मुक्त कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि गैटन दुगास एड्स का पहला संक्रमित व्यक्ति नहीं था, बल्कि पहली बार 1970 या 1971 में हैती से अमेरिका आया था। हालांकि कई वर्षों तक इसका पता नहीं चला। हर संक्रमित व्यक्ति अपने साथी को इसका जिम्मेदार बताता था लेकिन कई गैटन दुगास पर सारा आरोप मढ़ना सही नहीं था। आखिरकार उन्हें एड्स फैलाने के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया है।

2020 में 37.7 मिलियन लोग एचआईवी पॉजिटिव

2020 में 37.7 मिलियन लोग एचआईवी पॉजिटिव

इसके अलावा सिर्फ 8 प्रतिशत महिलाओं में ही यह बीमारी पायी गई। हालांकि धीरे-धीरे उनकी संख्या भी बढ़ती गई। आज एचाईवी-एड्स की चपेट में पूरी दुनिया है और इसे रोकने को लेकर प्रयास जारी हैं। आज भी एड्स का सिर्फ एक ही इलाज है- बचाव और जागरूकता। तमाम रिसर्च के बावजूद दुनिया के वैज्ञानिक और डॉक्टर एड्स की दवा बनाने में नाकाम साबित रहे हैं। यूएनएड्स के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार 2020 में वैश्विक स्तर पर 37.7 मिलियन लोग एचआईवी के साथ जी रहे थे।

यह भी पढ़ें: तनीषा मुखर्जी ने बताया उनसे क्‍या हुई बड़ी भूल, जिसके कारण दोनों डोज लगवाने के बाद भी हो गया कोरोना

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