अफगानिस्तान के सड़क-बाजार से औरतें गायब, दिखते हैं सिर्फ मर्द ही मर्द, तालिबान राज के 18 महीने

तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं से सारे अधिकार छीन लिए हैं और अब घर से बाहर नहीं निकल सकती हैं। अफगानिस्तान की सड़कों पर चलने पर ऐसा लगता है, कि देश में महिलाएं बची ही नहीं हैं।

Women In Afghanistan

Women In Afghanistan: 15 अगस्त 2021, जिस दिन तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा किया था, उस दिन साफिया का ग्रेजुएशन पूरा होना था और राजधानी काबुल के पास बहाल दारुल अमन पैलेस में स्थिति कर्दन बिजनेस यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम का आयोजन होना था, जहां ग्रेजुएट हो चुकी लड़कियों को सर्टिफिकेट बांचा जाना था। 22 साल की साफिया, अफगानिस्तान में आए उस बदलाव का प्रतीक थीं, जो अब प्रोफेशनल कोर्स फाइनल कर चुकी थीं और अब अपना व्यापार करने के लिए, या किसी कंपनी में काम करने के लिए तैयार हो चुकी थीं। लेकिन, उसी दिन तालिबान का शासन अफगानिस्तान पर कायम हो गया है और साफिया की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई।

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तालिबान शासन, खत्म हुई महिलाओं की आजादी

साफिया, जो अब 24 साल की होने वाली हैं, उन्होंने स्काई न्यूज को बताया, कि 'हम बहुत उत्साहित थे और मैंने अपने दो दोस्तों के साथ ग्रेजुएशन कार्यक्रम में जाने के लिए अपने गाउन के नीचे मैचिंग गुलाबी सूट पहनने की योजना बनाई थी।' साफिया, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में ग्रेजुएट होने वाली 30 अफगान महिलाओं में से एक थीं और ऐसा पहली बार हुआ था, कि क्लास में पुरूष छात्रों की तुलना में, महिला छात्राएं ज्यादा थीं, जो इस बात का सबूत था, कि अफगानिस्तान महिलाओं को आजादी देने के लिए तैयार हो रहा था। कर्दन बिजनेस यूनिवर्सिटी से डिग्री मिलने का मतलब था, सफलता की गारंटी, क्योंकि इस यूनिवर्सिटी को देश में नंबर-1 यूनिवर्सिटी होने का खिताब मिला था। लेकिन, 15 अगस्त 2021 को कार में सवार होकर यूनिवर्सिटी जाने के बजाए अब सोफिया अपना सामान बांध रही थी, ताकि किसी तरह एयरपोर्ट पहुंच सके। ग्रेजुएशन कार्यक्रम शुरू होने के डेढ़ घंटे बाद साफिया के घर के सामने सफेद झंडों के साथ तालिबान की गाड़ियां मार्च कर रही थी और इसके साथ ही साफिया का सपना भी चकनाचूर हो रहा था।

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हर जगह, सिर्फ तालिबान ही तालिबान

तालिबान का झंडा जल्द ही हर जगह था और यह दो दशकों के अंतरराष्ट्रीय कब्जे के बाद देश के लिए नाटकीय परिवर्तन की का डंका था। सफिया के साथ साथ अफगानिस्तान की सभी महिलाओं की जिंदगी इसके साथ ही बदल गई थी और इसका मतलब था, पढ़ाई का अंत, काम का अंत, करियर का अंत, आजादी का अंत, आवाज का अंत और घर की चाहरदीवारी के अंदर कैद की शुरूआत। स्काई न्यूज से बात करते हुए साफिया ने बताया, कि 'हर वाहन में दस तालिबान रेंजर्स थे, जो अपने कंधों पर रॉकेट के साथ झंडे लहरा रहे थे।' वह कहती है, कि 'मैं घबरा गई और मैंने अपने घर की खिड़की बंद कर ली। मेरा भाई घर आया और हमें बताया कि हमारे पड़ोसी, जो अफगान सेना के जनरल थे, उन्होंने उसे बताया है, कि तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है और वो काबुल हवाई अड्डा जाने वाले हैं, ताकि देश से बाहर निकल सकें। साफिया कहती है, कि जिस दिन में ग्रेजुएशन पार्टी करने वाले थे, उस दिन दोपहर तक, तालिबान के अधिकारी, हमारे पड़ोसी सैन्य अधिकारी की तलाश में हमारे घर के सामने पहुंच चुके थे। तालिबान ने सत्ता हथिया ली थी और अब वे बदला लेना चाहते थे। जनरल के नहीं मिलने पर उन्होंने सफिया के परिवार से खाना मांगा। साफिया कहती है, कि तालिबान के सदस्यों के पास रॉकेट लॉन्चर समेत कई हथियार थे।

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महिलाओं के लिए शुरू हुए बुरे दिन

तालिबान के सत्ता में आने के साथ ही साफिया समेत अफगानिस्तान की महिलाओं के लिए बुरे दिन शुरू हो चुके थे। साफिया के पिता की कई साल पहले मौत हो चुकी थी और परिवार को संभालने की जिम्मेदारी मां पर थी, जो लड़कियों के स्कूल में प्रिंसिपल थीं। साफिया कहती है, कि तालिबान के लोगों ने उस दिन हमारे घर में खाना खाया और उन्होंने उस दौरान मुझे देखा। बाद में तालिबान के वो सदस्य वापस लौटे और उसके भाई से कहा, कि 'वो दस लोग अविवाहित हैं और उसका कर्तव्य है, कि अपनी बहन की शादी उन दस लोगों में किसी एक से कर दे।' साफिया ने कहा, कि "उस वक्त मेरे भाई ने उनसे झूठ बोला और फिर मेरी मां ने मेरे चाचा को फोन किया और उनसे मदद मांगी।" साफिया ने कहा, कि "मेरे चाचा ने उसके बाद तालिबान लड़ाकों से बात की और फिर काफी झूठ बोलने के बाद उन्हें मुझसे शादी करने से रोका गया।" साफिया कहती है, कि 'मैं इस बारे में सोच भी नहीं सकती। मुझे पता है, कि जिस तरह से उन्होंने हमारे देश, हमारे सपनों और हमारे लक्ष्यों को खत्म किया, वे मुझे उनसे शादी करने के लिए भी मजबूर कर सकते हैं। लेकिन मैं किसी तालिबान लड़ाके से शादी करने के बजाय मरना पसंद करूंगी।'

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अफगानिस्तान से गायब होती महिलाएं

साफिया समेत तमाम अफगान महिलाएं, अफगानिस्तान की सार्वजनिक जीवन से मिटाई जा चुकी हैं। देश की सड़कों पर और बाजारों में अब सिर्फ मर्द ही मर्द दिखाई देते हैं। कहीं भूले भटके, ऊपर से नीचे तक काले लबादे में कोई महिला दिख जाए तो दिख जाए। तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा पर पूर्ण पाबंदी लगा दी है और छोटी बच्चियां अब सिर्फ छठी क्लास तक पढ़ सकती हैं। मेडिकल फील्ड की कुछ लड़कियों को पढ़ाई करने की इजाजत दी गई है। अब अफगान लड़कियों के किसी भी एनजीओ में काम करने में पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जबकि पहले एनजीओ में ज्यादातर महिलाएं काम करती थीं। अफगान महिलाएं घर से तभी बाहर निकल सकती हैं, जब उनके साथ परिवार का कोई सदस्य हो और इस तरह से अफगानिस्तान की महिलाओं की जिंदगी घर में सिमट गई है।

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    अब कैसी है साफिया की जिंदगी?

    साफिया अब विकलांग हो चुकी है। साफिया एक दिन टैक्सी से कहीं जा रही थी, जिसे तालिबान ने एक चौकी पर रोक लिया और फिर उस टैक्सी को तालिबान के कहने पर एक ट्रक से टक्कर मारी गई, जिसमें साफिया बुरी तरह से घायल हो गई। साफिया की रीढ़ की हड्डी और पैरों में काफी चोट आई और अब हालात ये हैं, कि साफिया का शरीर आधा झुक गया है और रीढ़ की हड्डी पर दिनों दिन दबाव बढ़ता रहता है, उसे तेज दर्द होता है और शायद ऑपरेशन के बाद ही वो ठीक हो सकती है। यानि, जो साफिया बिजनेस की पढ़ाई कर किसी कंपनी में काम कर सकती थी और अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ आत्मनिर्भर हो सकती थी, वो अब अपने परिवार के ऊपर बोझ बन चुकी है। साफिया बताती है, कि 'तालिबान ने हमसे सब कुछ छीन लिया है, हमारी ज़िंदगी, हमारे सपने, हमारी उम्मीदें।' साफिया बताती है, कि एक बार उसने डिग्री लेने की कोशिश की और वो यूनिवर्सिटी अपनी मां के साथ पहुंची, लेकिन कुछ बंदूकधारी तालिबानियों ने यूनिवर्सिटी गेट पर ही उन्हें रोक दिया। साफिया के कुछ बाल दिख रहे थे, तो उन लोगों ने साफिया के सिर पर बंदूक लगा दिया, जिसके बाद उसकी मां ने घबराकर उसके बाल ढंके और साफिया से कहा, कि "वो डिग्री लेकर क्या करेगी, अगर वो जिंदा ही नहीं रही।" फिर वो दोनों लौट आए अब दोनों घर में कैद रहती हैं। ये अकेली साफिया की कहानी नहीं है, बल्कि अफगानिस्तान की हर लड़कियों और महिलाओं की बस यही कहानी है, जिनके पास अब सिर्फ दो काम बचे हैं। एक काम घर के सभी लोगों के लिए खाना बनाना और दूसरा काम अपने पति की सेक्स जरूरतों का पूरा करना। अफगानिस्तान में रहने वाली लड़कियां, अब इन दो कामों के अलावा अपना भविष्य किसी और चीज में नहीं देख सकती हैं।

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