जानें, इमरान खान के शांति वार्ता राग का जवाब क्यों नहीं दे रहे पीएम मोदी
नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गुरुवार को इस्लामाबाद में भारतीय पत्रकारों से बात करते हुए वह पीएम नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। एक दिन पहले बुधवार को करतारपुर साहिब कॉरिडोर की नींव रखे जाने के कार्यक्रम में भी इमरान खान ने बार-बार शांति वार्ता, बातचीत की वकालत की थी। पीएम नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत में भी इमरान खान ने बातचीत का जिक्र किया। कुल मिलाकर इमरान खान ने हर मौके पर शांति वार्ता, बातचीत, कश्मीर हल, कारोबार की बात की, लेकिन एक बार भी उन्होंने कश्मीर में हो आतंकी हमलों का जिक्र नहीं किया। इमरान खान ने कभी आतंकवाद की बात नहीं की, मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का जिक्र नहीं किया। वह बार-बार भारत के साथ वार्ता की बात कर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने बुरी तरह पिछड़ चुके अपने देश- पाकिस्तान और खुद की छवि चमकाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उनके जितने भी बयान आए, उन पर एक बार भी पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रतिक्रिया नहीं दी। इमरान खान के इन बयानों में वो अभद्र ट्वीट भी शामिल है, जिसमें उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के गलत भाषा का इस्तेमाल किया था।

इमरान खान हैं सेना की कुठपुतली
इमरान खान असल में क्या हैं? जरा द ऑस्ट्रेलियन में छपे एक लेख से समझिए। यह आर्टिकल लिखा है, ब्रूस लाउडन ने। वह कहते हैं इमरान खान एक पूर्व प्लेबॉय क्रिकेटर है, जो पाकिस्तानी सेना की कठपुतली है। रक्षा विशेषज्ञ सुशांत सरीन पहले ही कह चुके हैं कि पाकिस्तानी सेना का चुनावी प्रक्रिया में दखल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की प्रतिष्ठा को खराब कर चुका है। उनका इशारा इमरान खान को पाकिस्तानी सेना के सपोर्ट की तरफ है। वरिष्ठ भारतीय पत्रकार शेखर गुप्ता ने भी अपने लेख इमरान खान के बातचीत राग पर कहा- वह न तो युद्ध लड़ सकते हैं और न ही शांति स्थापित कर सकते हैं। मतलब कश्मीर मसले के हल में इमरान खान की कोई भूमिका नहीं है।

जब से पीएम बने हैं इमरान खान, तभी से लगातार उकसा रही पाकिस्तानी सेना
इमरान खान लगातार शांति-शांति का राग अलाप रहे हैं और दूसरी ओर पाकिस्तान की सेना बॉर्डर पर लगातार सीज फायर तोड़ रही है। पाकिस्तान की ओर से लगातार घुसपैठ हो रही है। कश्मीर और पंजाब में आतंकी हमले हो रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू इमरान खान के शपथ ग्रहण में गए तो पीओके के राष्ट्रपति को उनके बगल में बिठाया। बुधवार को करतारपुर साहिब कॉरिडोर की नींव के कार्यक्रम में खालिस्तान समर्थक पहली पंक्ति में बैठा नजर आया। नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दावा कर दिया कि बातचीत प्रक्रिया के बारे में। बाद में भारत ने और खुद पाकिस्तान ने उसे दावे का खंडन कर दिया।

पीएम मोदी के बारे में किया अभद्र भाषा का इस्तेमाल
नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर जवान की बर्बर हत्या के बाद भारत के बातचीत रद्द करने के फैसले पर भी इमरान खान बौखला गए थे। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'शांति वार्ता के लिए मेरी पेशकश पर भारत की नकारात्मक प्रतिक्रिया से निराश हूं। मैं अपनी पूरी जिंदगी बड़े दफ्तर में बैठे ऐसे छोटे लोगों को देखता आया हूं, जिनके पास दूरदर्शिता नहीं है और बड़ी तस्वीर देखने की काबिलियत नहीं है।' जिस देश के पीएम के साथ इमरान खान वो मसला हल करना चाहते हैं जो 70 साल से चला रहा है और उसी प्रधानमंत्री के बारे में वह इस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। मतलब साफ है इमरान खान की नीयत में खोट है। वह वार्ता करना नहीं चाहते हैं, लेकिन वार्ता-वार्ता गीत गाते रहते दिखना जरूर चाहते हैं।

न चीन दे रहा मदद, न अमेरिका से मिल रहे डॉलर, दबाव में हैं इमरान खान
इमरान खान ने जब से पाकिस्तान के पीएम के तौर पर कार्यभार संभाला है, तभी से वह सिर्फ बात कर रहे हैं, लेकिन एक्शन के नाम पर अभी तक कोई ठोस कदम वह नहीं उठा पाए हैं। पाकिस्तानी की चरमराती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के वह कभी चीन तो कभी सऊदी अरब भाग रहे हैं। दरअसल, वह दबाव में हैं, पाकिस्तान की सेना भी दबाव में हैं। अर्थव्यवस्था हाथ से निकल रही है, अमेरिका डॉलर दे नहीं रहा, चीन से भी मदद सीमित ही मिलनी है। इतना सब होने के बाद पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने को तैयार नहीं है। जब तक वह ठोस एक्शन नहीं लेगा, तब बड़ा मुश्किल है कि उनके शांति वार्ता राग पर
भारत की ओर से कोई जवाब मिले।












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