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खाड़ी देशों को क्यों नाराज नहीं कर सकता भारत?

खाड़ी देशों के साथ भारत को जोड़ने वाले संबंध न केवल व्यापार और वाणिज्य पर बल्कि इतिहास और संस्कृति पर आधारित भी रही है।

नई दिल्ली, जून 07: नुपूर शर्मा के पैगंबर पर दिए गये बयान पर भारत में तो बवाल मचा ही हुआ है, इसके साथ ही साथ इस्लामिक देशों से भी कड़ी प्रतिक्रिया आ रही है। और इस वक्त बीजेपी की निलंबित नेता नुपूर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद पर दिए गये विवादित बयान पर विवाद पूरी दुनिया में हो रही है। खासकर इस्लामिक देशों की तरफ से कड़ी प्रतिक्रियाएं आई हैं, जिसमें वो देश भी शामिल हैं, जिनके मोदी सरकार से काफी करीबी संबंध हैं, जैसे संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और सऊदी अरब। लिहाजा, जानना जरूरी है, कि नुपूर शर्मा के इस विवादित बयान से भारत को कितना नुकसान हो सकता है और मोदी सरकार किस तरह से डैमेज कंट्रोल कर रही है?

भारत-खाड़ी देश संबंध

भारत-खाड़ी देश संबंध

खाड़ी देशों के साथ भारत को जोड़ने वाले संबंध न केवल व्यापार और वाणिज्य पर बल्कि इतिहास और संस्कृति पर आधारित भी रही है। खाड़ी देशों में, लाखों भारतीय रहते हैं और काम करते हैं और यह भारत को विदेशी मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा यहां ले मिलवता है। खासकर, मोदी सरकार के आने के बाद जब पाकिस्तान की तरफ से भारत के खिलाफ 'इस्लाम के खिलाफ' होने का प्रोपेगेंडा फैलाया गया, उस वक्त खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध ऐतिहासिक होते चले गये। भारत अब संयुक्त अरब अमीरात का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन चुका है और सऊदी अरब में भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, भारत अपनी तेल की जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर है।

किस देश में कितने भारतीय नागरिक?

किस देश में कितने भारतीय नागरिक?

संयुक्त अरब अमीरात की आबादी में भारतीयों की संख्या एक तिहाई से अधिक है। वहीं, खाड़ी देशों में 89 लाख से ज्यादा भारतीय नागरिक रहते हैं और काम करते हैं। यूएई में 34 लाख 25 हजार 144, सऊदी अरब में 25 लाख 94 हजार 947, कुवैत में 10 लाख 29 हजार 861 भारतीय, ओमान में 7 लाख 81 हजार 141, कतर में 7 लाख 46 हजार 550, बहरीन में 3 लाख 26 हजार 658, जॉर्डन में 20 हजार 760, इराक में 18 हजार 07, लेबनान में 8 हजार 537 भारतीय रहते हैं। वहीं, खाड़ी देशों में कई प्रमुख खुदरा स्टोर और रेस्टोरेंट भारतीयों के स्वामित्व में हैं। लिहाजा, भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान भारतीयों के स्वामित्व वाले व्यवसायों को प्रभावित कर सकता है।

गल्फ देशों के साथ भारत का व्यापार

गल्फ देशों के साथ भारत का व्यापार

संयुक्त अरब अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वहीं, खाड़ी देश भी भारत पर काफी निर्भर हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद, संयुक्त अरब अमीरात भारत का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपर्ट ठिकाना और तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत और यूएई का द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में 72.9 अरब डॉलर का था, जिसमें भारत ने 28.4 अरब डॉलर का सामान यूएई को बेचा था। वहीं, भारत और यूएई के बीच फरवरी महीने में कॉम्पिहेंसिव इरोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट भी हुआ है, जिसके तहत दोनों देशों के कुल व्यापार को साल 2026 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत पर अनाज के लिए निर्भर खाड़ी देश

भारत पर अनाज के लिए निर्भर खाड़ी देश

खाड़ी देश, विशेष रूप से खाद्य और अनाज के आयात के लिए भारत पर निर्भर है। भारत खाड़ी देशों को उनके भोजन का 85% से ज्यादा और उनके अनाज का 93% निर्यात करता है। इसके साथ ही, खाड़ी देशों को भारत चावल, भैंस का मांस, मसाले, समुद्री उत्पाद, फल, सब्जियां और चीनी प्रमुख तौर पर निर्यात करता है। खाड़ी देशों का विमानन उद्योग* एएई भारतीय यात्रियों पर बहुत अधिक निर्भर करता है। अमीरात, एतिहाद एयरवेज और कतर एयरवेज जैसी स्थानीय एयरलाइन में ज्यादातर यात्री भारतीय ही होते हैं। इसके साथ ही भारत का आधा रेमिटेंस (नन कॉमर्शियल ट्रांसफर ऑफ मनी) भी पांच खाड़ी देशों से आता है। इन देशों में काम करने वाले भारतीय लोग सबसे ज्यादा पैसा भारत को भेजते हैं, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा केरल और फिर दिल्ली को आता है। वहीं, यूपी और बिहार में भी खाड़ी देशों से काफी पैसा ट्रांसफर किया जाता है।

खाड़ी देशों से तेल आयात

खाड़ी देशों से तेल आयात

भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा कारणों से भी खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने मार्च में संसद को बताया कि देश में प्रतिदिन 50 लाख बैरल तेल की खपत होती है, जिसमें से 60 प्रतिशत खाड़ी से आता है। लिहाजा, भारत और खाड़ी देश एक दूसरे के साथ कितने मजबूती से जुड़े हुए हैं, ये आसानी से समझा जा सकता है और इस तरह की विवादित टिप्पणियों से इन नेताओं को तो फायदा ही होता है, लेकिन देश नुकसान में रहता है। खासकर पिछले आठ सालों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी देशों के साथ संबंध को जितना मजबूत किया है, उसे नुपूर शर्मा के बयान से बड़ा झटका जरूर लगा है।

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