Explainer: क्रेमलिन ने क्यों साइन किया एलेक्सी नवलनी का डेथ वारंट? पुतिन के सबसे बड़े दुश्मन की मौत की कहानी

Alexei Navalny News: एलेक्सी नवलनी रूस की अब उस लिस्ट में शामिल हो गये हैं, जिन्हें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ मुंह खोलने की सजा अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है।

मार्च 2020 में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन से एक सवाल पूछा गया था, कि क्या आपको लगता है, कि व्लादिमीर पुतिन एक हत्यारे हैं? और बाइडेन ने इस सवाल के जवाब में जो कहा था, उसने पूरी दुनिया की राजनीति में तहलका मचा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सवाल के जवाब में कहा, 'हम्म.. हां मैं मानता हूं।'

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बाइडेन के इस जवाब को लेकर भारी बवाल हुआ, लेकिन कई वैश्विक नेता ऐसे थे, जो बाइडेन की बातों से इत्तेफाक रखते थे, कि पुतिन एक हत्यारे हैं। और एलेक्सी नवलनी की मौत को कई लोग सीधे तौर पर पुतिन से जोड़ रहे हैं।

एलेक्सी नवलनी रूस के सबसे बड़े विपक्षी नेता थे, जिन्हें भ्रष्टाचार और आतंकवाद के आरोपों में कम से कम 20 सालों की सजा सुनाई गई थी और वो 2022 से जेल में बंद थे। नवलनी की जेल में ही मौत हुई और उनकी मौत की जानकारी उनके परिवार को मीडिया में आई खबरों से मिली।

नवलनी की मौत की खबरें फैलने के बाद राष्ट्रपति पुतिन को राजधानी मॉस्को के बाहरी इलाके में मजदूरों को संबोधित करते हुए देखा गया, जहां वो मुस्कुरा रहे थे।

रूसी राष्ट्रपति की सबसे दिलचस्प आदत ये है, कि वो कभी भी अपने विरोधी का नाम अपनी जुबान पर नहीं लाते हैं। लेकिन, पिछले हफ्ते नवलनी की मौत को उनके चेहरे पर पढ़ा जा सकता था।

पिछले एक दशक से ज्यादा वक्त से नवलनी और क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति भवन) के बीच द्वंद युद्ध चल रहा था और सालों से माना जा रहा था, कि नवलनी की आज नहीं तो कल मौत तय है।

क्रेमलिन की राह का कांटा थे नवलनी

नवलनी क्रेमलिन के लिए किसी कांटे से कम नहीं थे और रूस के कई लोगों के लिए वो उस उम्मीद की तरह थे, जो रूस में लोकतंत्र की स्थापना कर सकता है, लेकिन नवलनी की मौत के साथ ही वो उम्मीद भी दम तोड़ गई है।

साल 2000 में पुतिन पहली हर रूसी सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे थे और उसके बाद से ही रूस में लोकतंत्र सिर्फ कागजों तक सीमित होने लगा। साल 2013 में मॉस्को में मेयर चुनाव में भीषण धांधली की गई, मगर फिर भी नवलनी 27 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल करने में कामयाब रहे। हालांकि, नवलवी चुनाव तो हार गये, लेकिन वो एक ऐसा चेहरा बन गये, जिसके पीछे रूसी जनता खड़ी होने लगी थी। उन्होंने क्रेमलिन को भ्रष्टाचार और खौफनाक साजिशों का अड्डा करार दिया और रूस की जनता ने उनकी बातों को मानना शुरू कर दिया, जो क्रेमलिन को मंजूर नहीं था।

नवलनी सोशल मीडिया पर क्रेमलिन के लिए मुसीबतें पैदा करने लगे और धीरे धीरे पश्चिम ने उन्हें सिर पर बिठाना शुरू कर दिया। पश्चिमी देशों के लिए नवलवी पुतिन की विरोधी आवाज बन गये। इसका सबसे बड़ा सबूत ये है, कि जब नवलनी ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक महल का वीडियो जारी किया और उसे रूसी राष्ट्रपति का आलीशान किला बताया, तो उसे सवा अरब से ज्यादा हिट्स मिले।

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यूट्यूब डॉक्यूमेंट्री "डोंट कॉल हिम डिमन" में रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव, जो पुतिन के सबसे करीबी सहयोगी थे, उनके भ्रष्टाचार की कहानी बयान करती थी। इस वीडियो ने साल 2017 में रूस के लोगों को क्रेमलिन के खिलाफ भड़का दिया और 100 से ज्यादा शहरों में भारी प्रदर्शन किए गये। ये विरोध प्रदर्शन सीधे तौर पर पुतिन तक पहुंच रहा था और क्रेमलिन के अंदरूनी सूत्रों का मानना था, कि ये विरोध प्रदर्शन सफल रहा है और पुतिन के खिलाफ नवलनी का प्रचार कामयाब हो रहा है।

नवलनी ने इसके बाद क्रेमलिन और रूस की तेल-गैस कंपनियों के बीच चल रहे भ्रष्टाचार को भयानक स्तर पर उजागर किया और नवलनी के वीडियो में बताया जा रहा था, कि अधिकारी कैसे रूस के लोगों का अधिकार छीन रहे हैं और उनका विरोध करने वालों को रास्ते से हमेशा के लिए हटा रहे हैं।

नवलनी ने रूस में युवाओं को इस तरह से मोहित करना शुरू कर दिया था, कि क्रेमलिन के लिए उन्हें बर्दाश्त करना अब संभव नहीं रहा था। नवलनी अब क्रेमलिन की जड़ों पर चोट करने लहे थे, क्रेमलिन डरने लगा था।

नवलनी को मारने की कोशिशें

नवलनी को सबसे पहले मारने की कोशिश 2020 में की गई थी, जब उन्हें नर्व एजेंट जहर नोविचोक दिया गया था। साइबेरिया में टॉम्स्क की यात्रा करते वक्त वो फ्लाइट में ही बेहोश हो गये थे। उनके समर्थक उन्हें विदेश भेजने की मांग करने लगे, जबकि रूसी डॉक्टरों ने उनके बेहोस होने को लो-बीपी बताया। हालांकि, बाद में रूसी सरकार नवलनी को जर्मनी भेजने के लिए तैयार हो गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें जहर दिए जाने की पुष्टि की।

जब नवलनी को मॉस्को से बाहर जाने की इजाजत दी गई, उस वक्त वो कोमा में थे और रूसी अधिकारियों ने शायद सोचा होगा, कि नवलनी का जिंदा रहना असंभव है, लेकिन उनकी जिंदगी बच गई। जर्मन डॉक्टर्स ने कहा, कि उनके अंडरपैंड में नोविचोक जहर रखा गया था, जो सोवियत युग का जहर था, जिसने सीधे तौर पर क्रेमलिन की तरफ इशारा किया।

ठीक होने के बाद नवलनी ने जर्मन मीडियो को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति पुतिन का उपनाम "व्लादिमीर द अंडरपैंट्स पॉइज़नर" रखा।

लेकिन, बाद में इस खतरे के बाद भी, कि रूस लौटना उनके लिए जानलेवा हो सकता है, साल 2021 में नवलनी वापस रूस लौट आए और कहा, कि निर्वासन से कुछ नहीं होता है। उनका मकसद रूसी राजनीति को बदलना है और ऐसा रूस में आकर ही संभव है।

उन्होंने कहा था, कि "अगर आपकी मान्यता मूल्यवान है, तो फिर आपको उसकी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए। और जरूरत पड़ने पर हर त्याग के लिए तैयार रहना चाहिए।"

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जेल में नवलनी से क्रूरता की हद

मॉस्को लौटते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फिर शुरू हुआ उनके खिलाफ मुकदमों का सिलसिला। उन्हें रूस के सबसे उत्तरी इलाके में स्थिति आर्कटिक जेल में रखा गया, जिसे "पोलर वुल्फ" जेल कहा जाता है। ये जेल उस इलाके में है, जहां नसें जमाने वाली ठंड पड़ती है। जेल के एक पूर्व कैदी ने कहा था, कि माइनस 30 डिग्री तापमान में कैदियों को हल्के कपड़ों में जेल की कैंपस में खड़ा रहने के लिए मजबूर किया जाता है। जाहिर तौर पर नवलनी के साथ भी क्रूरता की गई। लेकिन, उन्होंने एक बार भी क्रेमलिन के आगे घुटने नहीं टेके।

लेकिन, अंत में वही हुआ, जिसकी आशंका थी.. एलेक्सी नवलनी की रहस्यमयी मौत हो गई। नवलनी उस लिस्ट में शामिल हो गये हैं, जिन्हें पुतिन के विरोध की सजा मिली है। पत्रकार अन्ना पोलितकोवस्काया, पूर्व केजीबी अधिकारी अलेक्जेंडर लिट्विनेंको, रूसी राजनेता बोरिस नेमत्सोव, खुफिया अधिकारी सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया.. ये उस लंबी लिस्ट के चंद नाम हैं, जिनके मुकद्दर में मौत लिखी गई है।

नवलनी की मौत से भी रूस की राजनीति में कोई बदलाव आने वाला नहीं है, लेकिन नवलनी की मौत रूस के उस क्रूर शासन का चेहरा जरूर बन चुका है, जहां किसी के पास असहमति का अधिकार नहीं होता है।

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