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इमरान ख़ान की पार्टी के सांसद आमिर लियाक़त ने हिंदू समुदाय से क्यों माँगी माफ़ी?

आमिर लियाक़त
Reuters
आमिर लियाक़त

पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़' (पीटीआई) के नेशनल असेंबली के सदस्य और प्रसिद्ध टीवी एंकर आमिर लियाक़त ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक हिंदू देवी की तस्वीर पोस्ट की थी. इस ट्वीट को उन्होंने हिंदू समुदाय से माफ़ी मांगते हुए डिलीट कर दिया है.

आमिर लियाक़त हुसैन ने इस तस्वीर का इस्तेमाल मरियम नवाज़ की आलोचना करने के लिए किया था.

आमिर लियाक़त ने, ज़ाहिरी तौर पर हिंदू देवी 'काली' की तस्वीर 'पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़)' की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ के टीवी में चल रहे बयान के फोटो के साथ, हैशटैग 'दूसरा रूप' लिख कर ट्विटर पर पोस्ट की थी.

https://twitter.com/AamirLiaquat/status/1364624922539143170

मरियम नवाज़ ने बयान में लिखा था कि "ये अब मेरा दूसरा रूप देखेंगे."

बाद में आमिर लियाक़त ने ट्वीट को डिलीट करते हुए कहा है, "मैं हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत करने के लिए माफ़ी चाहता हूँ. मेरा उद्देश्य बिल्कुल भी ऐसा नहीं था. ट्वीट को हटा दिया गया है. मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ. यही मेरे धर्म की शिक्षा है. एक बार फिर माफ़ी चाहता हूँ."

आमिर लियाक़त के ट्वीट की आलोचना

आमिर लियाक़त के इस ट्वीट की सोशल मीडिया पर आलोचना की गई, जहाँ अधिकांश यूज़र्स ने कहा कि उन्होंने हिंदू समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है. कुछ यूज़र्स ने पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ (पीटीआई) और प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से इस मामले में संज्ञान लेने का अनुरोध भी किया.

जबकि कुछ लोगों ने ख़ुद आमिर लियाक़त से, इस ट्वीट को हटाने के लिए कहा था. कई यूज़र्स ने यह भी सवाल उठाया, कि क्या पाकिस्तान का ईशनिंदा क़ानून इस पर लागू नहीं होता है?

बीबीसी ने इस बारे में आमिर लियाक़त हुसैन से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.

आमिर लियाक़त धार्मिक विद्वान के तौर पर कई स्थानीय टीवी चैनलों पर प्रोग्राम भी करते रहते हैं.

आमिर लियाक़त
TWITTER/KDSINDHI
आमिर लियाक़त

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कपिल देव ने लिखा, कि "यह मौजूदा नेशनल असेंबली के एक सदस्य और पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ के सदस्य हैं, जो एक हिंदू देवी की तस्वीर को मुस्लिम लीग नवाज़ की नेता मरियम नवाज़ के ख़िलाफ़ सिर्फ़ राजनीतिक छींटाकशी के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं."

कपिल देव ने लिखा कि, "इस तरह से, ये दूसरे धर्म और अपने ही देश के 50 लाख हिंदू नागरिकों का सम्मान करते हैं. जिनमें उनकी पार्टी के हिंदू सदस्य और मतदाता भी शामिल हैं."

नीरज सुनील नाम के एक अन्य यूज़र ने लिखा है, "ये ईशनिंदा नहीं है, क्योंकि आप विशेषाधिकार प्राप्त हैं. यह एक प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान की तरफ़ से आ रहा है, जिन्हें धर्मों के बीच सहिष्णुता की बात करनी चाहिए."

आरती कुमारी, नाम की एक यूज़र ने लिखा है, "ऐसे कोई क़ानून नहीं होते हैं, जब बात हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने की होती है. हम चाहते हैं कि यह (ट्वीट) तुरंत हटा दिया जाए और आमिर लियाक़त के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए."

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली वकील और क़ानूनी विशेषज्ञ राबिया बाजवा ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान में लागू ईशनिंदा क़ानून में सभी धर्मों के लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए सज़ा शामिल हैं.

वो कहती हैं, "पाकिस्तान की दंड संहिता, 295A के अनुसार, अगर किसी भी धर्म से संबंधित व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जाता है या उसकी धार्मिक मान्यताओं का उपहास किया जाता है, तो उस पर ईशनिंदा क़ानून के तहत क़ानूनी कार्रवाई की जा सकती है."

उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों के मामले में मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करानी पड़ती है, जिसके बाद क़ानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है.

हालाँकि, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अमली तौर पर ईशनिंदा क़ानून को सख़्ती से लागू किया जाना दो मामलों में देखा जा सकता है. वो कहती हैं, "अगर आरोप पैग़ंबर या क़ुरान की निंदा के बारे में है, तो उन्हें अधिक गंभीरता से लिया जाता है."

आमिर लियाक़त
Getty Images
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विरोध की चेतावनी

एक यूज़र, विनोद माहेश्वरी ने पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ के ट्विटर अकाउंट को टैग करते हुए चेतावनी दी कि ट्वीट को तुरंत हटा दिया जाए, "अन्यथा विरोध के लिए तैयार रहें."

ट्विटर पर आमिर लियाक़त के ट्वीट के बाद, इस पर की जाने वाली चर्चा में ज़्यादातर लोगों की राय थी कि उन्हें "किसी के धर्म का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए."

शुमाइला इस्माइल नाम की एक ट्विटर यूज़र ने आमिर लियाक़त के ट्वीट के नीचे लिखा, "किसी के ख़ुदा को बुरा मत कहो, कोई तुम्हारे ख़ुदा को बुरा नहीं कहेगा. आप ख़ुद को धार्मिक विद्वान कहते हैं, किसी के धर्म का मज़ाक उड़ाना कहाँ लिखा है?"

शहज़ाद अहमद नामक एक और यूज़र ने लिखा है, "सर, यह आपकी तरफ़ से बहुत ही शर्मनाक बयान है. हम अपने हिंदू भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता में खड़े हैं, जिन्हें आपने बदनाम करने की कोशिश की है."

उन्होंने आगे लिखा है, "उम्मीद है, कि आप इसे जल्द ही हटा देंगे और उन लोगों से माफ़ी माँगेंगे, जिनका आपने मज़ाक उड़ाया है."

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