चीन का डिप्लोमेटिक डिजास्टर: मानचित्र पर भारत से पंगा लेकर कैसे आग से खेल रहे हैं शी जिनपिंग? जानिए
China Map Row: 28 अगस्त को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय की तरफ से "चीन के स्टैंडर्ड मानचित्र का 2023 एडिशन" लांच किया जाता है, जिसे देखकर चीन के सैन्य जनरल सुन त्ज़ु गर्वीला महसूस करते हैं, लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गलत समय पर भारत से पंगा ले लिया है।
चायनीज कम्युनिस्ट प्लेबुक में एक प्रसिद्ध कहावत है, कि "Besiege Wei to rescue Zao" जिसका मतलब है, कि जब दुश्मन सीधे हमला करने के लिए बहुत मजबूत हो, तो उस चीज़ पर हमला करें, जिसे वे पसंद करे।

दुर्भाग्य से कम्युनिस्ट चीन के लिए, यह तरकीब बहुत पुरानी और प्रभावहीन हो चुकी है, क्योंकि चीन के लिए ये एक काफी पुराना हथकंडा रहा है, जिसे वो कई बार इस्तेमाल कर चुका है। लिहाजा, अपने मानचित्र में भारतीय राज्य अरूणाचल प्रदेश और लद्दाख के हिस्सों को शामिल करना, शी जिनपिंग के लिए कैसे बुरे समय की शुरूआत हो सकती है, आइये समझते हैं।
लिहाजा, इसे समझने के लिए हमें एक और प्रश्न का उत्तर समझना होगा, कि आखिर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मकसद क्या है और इस "कार्टोग्राफ़िक कैलीस्थेनिक्स" (मानचित्र एक्सरसाइज) के जरिए चीन क्या करना चाहता है?
चीन की आर्थिक दुर्दशा
चीन की पोस्ट-कोविड अर्थव्यवस्था विकराल हालातों से जूझ रहा है, जिसकी वजह से चीन अपस्फीति में प्रवेश कर चुका है, यानि सामानों की कीमत इतनी ज्यादा कम हो गई है, कि व्यापारी सामानों का लागत नहीं निकाल पा रहे हैं।
अर्थव्यवस्था में आई दरारों को छिपाने के लिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी काफी मशक्कत कर रही है, लेकिन चीन की आर्थिक हालात और भयावह होते जा रहे हैं।
वहीं, चीन की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण रियल एस्टेट फर्म, एवरग्रांडे, जिसने 27 अगस्त को दोबारा कारोबार की शुरुआत थी, वो पहले ही दिन 14 प्रतिशत और गिर गई। पिछले तीन वर्षों में इसने अपने बाजार मूल्य का लगभग 99 प्रतिशत खो दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की रिएल एस्टेट कंपनी एवरग्रांडे, जो दिवालिया हो चुकी है, उसके साथ साथ कई और चीनी रिएय एस्टेट कंपनियां जल्द ही दिवालिया होने वाली हैं, और सबसे ज्यादा दिलचस्प बात ये है, कि इनमें से कुछ कंपनियां चीन की सरकार की है।
चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी की अयोग्य नीतियों की वजह से देश के उत्तरी प्रांतों में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसने देश की आम जनता को बुरी तरह प्रभावित किया है। बाढ़ आने की वजह से फसलें तबाह हुई हैं और देश का एक बड़ा हिस्सा खाद्य संकट में जल्द ही फंसने वाला है।
खाद्य संकट को देखते हुए चीन ने कई स्रोतों से भारी मात्रा में चावल खरीदना शुरू किया, लेकिन ठीक उसी समय भारत ने चावल बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसने चीन को बुरी तरह से हिला दिया है।

भारत का बढ़ता ग्लोबल स्ट्रक्चर
आंतरिक स्तर के अलावा, बाहरी स्थिति भी चीन के लिए सही नहीं है और भारत, ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर एक महाशक्ति बनकर उभरने लगा है, जिसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी बहुत अच्छे से समझ पा रही है।
पिछले महीने ही खत्म हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में लाख कोशिशों के बाद भी चीन, अपने जिगरी दोस्त पाकिस्तान को इस ग्रुप का हिस्सा नहीं बनवा पाया और ब्रिक्स के विस्तार में वही देश शामिल हो पाए, जिनके भारत के साथ भी अच्छे संबंध हैं, जैसे UAE, सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया और अर्जेंटीना।
इसके साथ ही, चीन ने भरपूर कोशिश की थी, कि अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में चीनी मुद्रा युआन के इस्तेमाल को ब्रिक्स मंजूरी दे दे, ताकि ब्रिक्स के देश हर अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन चीनी करेंसी में करे, लेकिन भारत ने चीन के इस आह्वान को सिरे से खारिज कर दिया, जिससे अपनी करेंसी को आगे बढ़ाने की चीन की उम्मीदें खत्म हो गई हैं।
वहीं, भारत की भुगतान प्रणाली UPI की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय लोकप्रियता ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए स्थिति और खराब कर दी है और चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग ने भारत की अंतर्राष्ट्रीय साख को सितारों तक पहुंचा दिया है।
भारत की जी20 की अध्यक्षता और ग्लोबल साउथ के मुद्दों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता, विश्वसनीयता से भरी हुई है और इस प्रकार भारत को ग्लोबल साउथ से भारी समर्थन मिल रहा है।
वहीं, भारत में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को छोड़कर सभी नेता शामिल हो रहे हैं और इसी बात से बौखलाकर, शायद शी जिनपिंग भारत आने का प्लान कैंसिल कर सकते हैं और भारत के लिए ये कोई हैरानी वाली बात नहीं होगी।

चीन की काल्पनिक सिल्वर गोली
यानि, आंतरिक परेशानियों से जूझते चीन को जब देश के बाहर भी बड़े बड़े झटके लगे, तो फिर कम्युनिस्ट पार्टी पुराने 'कार्टोग्राफ़िक कैलिस्थेनिक्स' की अपनी 'विश्वसनीय' प्लेबुक पर वापस आ गई है।
और उसने मानचित्र वाला बखेड़ा शुरू किया है।
अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन के पूरे क्षेत्र को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाकर, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपनी सभी कमियों को एक सिल्वर बुलेट से खत्म करने की कोशिश कर रही है। यानि, एक ऐसा मुद्दा उछालो, जिसमें बाकी के मुद्दे गायब हो जाएं।
इन नक्शों के जारी करने के समय को भी चीन ने बहुत सावधानी से चुनने की कोशिश की है और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का लक्ष्य, शायद नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन में अपने गौरव के क्षण से पहले 'भारत को झटका देने की कोशिश' करना है।
लेकिन, इस रणनीति में एक परेशानी ये है, कि चीन का ये प्रोपेगेंडा काफी पुराना हो गया है और अपनी चमक खो चुका है। शायद यह सीसीपी के मातहतों की कल्पनाशीलता की घोर कमी को भी दर्शाता है।
चीन के लिए सबसे बड़ा झटका तो ये है, कि साउथ चायना सी के बाकी सभी देश भारत के समर्थन में आ गये हैं और उन्होंने चीन के नक्शे को लेकर गहरी आपत्ति जताई है। यानि, चीन की ये पैंतरेबाजी भी फेल हो गई है।
वहीं, भारतीय विदेश मंत्री ने चीन के नक्शे को लेकर एक ही लाइन में ऐसा जवाब दिया, जिससे चीन तिलमिला गया होगा। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 29 अगस्त को एनडीटीवी से बात करते हुए पूरे कहा, कि "बेतुके दावे करने से दूसरे लोगों का क्षेत्र आपका नहीं हो जाता।"
यानि, नक्शे को लेकर भारत पर प्रेशर बनाने की कोशिश करने के चक्कर में चीन अपने पड़ोसियों में भी घिर गया है और एक बार फिर से दुनिया में ये संदेश गया है, कि चीन अपनी विस्तारवादी नीति को किस तरह से आगे बढ़ाने में लगा हुआ है।












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